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राष्ट्रीय राजधानी में गिरा 44 प्रतिशत मौतों का ग्राफ

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राष्ट्रीय राजधानी में गिरा 44 प्रतिशत मौतों का ग्राफ

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— स्वास्थ्य व्यवस्था पर फोकस के कारण कोविड से कम हुई मौतें

नई दिल्ली /टीम डिजिटल : जून की शुरुआत में जब दिल्ली में लाॅकडाउन खुला, तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता कोविड -19 के कारण कम से कम मौतों को सुनिश्चित करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के मद्ेदनजर कई तरह की विशेष पहल की गईं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिगत रूप से स्वयं इसकी निगरानी की, जिसके परिणाम स्वरूप जून और जुलाई के बीच कोविड के कारण मौतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली में कोविड-19 के कारण हुई मौतों का विस्तार से विश्लेषण किया, जिसमें पाया गया कि 1 से 12 जून और 1 से 12 जुलाई की अवधि के दौरान मौतों में 44 प्रतिशत की गिरावट आई है। 1 से 12 जून के दौरान 1089 मौतें हुई थीं, जबकि 1 से 12 जुलाई के बीच 605 मौतें हुईं।

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विश्लेषण से पता चला कि दिल्ली सरकार के कोविड अस्पतालों में जून से जुलाई तक मौतों में 58 प्रतिशत की कमी देखी गई, जो जून में 361 और जुलाई में 154 थी। वहीं, सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी कोविड अस्पतालों में जून से जुलाई तक 25 प्रतिशत की कमी देखी गई और केंद्र सरकार के कोविड अस्पतालों में 55 प्रतिशत की कमी देखी गई। अस्पताल वार विश्लेषल करने से पता चला कि केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में मृत्यु दर (कुल भर्ती बनाम कुल मौतें) का प्रतिशत जून में 81 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घट कर 58 प्रतिशत हो गई।

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केंद्र सरकार के एक अन्य सफदरजंग अस्पताल में जून में मृत्यु दर 40 प्रतिशत से घट कर जुलाई में 31 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार, दिल्ली सरकार के सबसे बड़े कोविड अस्पताल एलएनजेपी में मौतें जून की शुरूआत में 28 प्रतिशत थी, जो जुलाई की शुरूआत में घट कर 16 प्रतिशत हो गई। दिल्ली सरकार का राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल मृत्यु दर के मामले में राष्ट्रीय राजधानी के सबसे अच्छे कोविड अस्पतालों में से एक है, यहां जून की शुरूआत में 6 प्रतिशत और जुलाई की शुरूआत में 7 प्रतिशत मौतें हुई।

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स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए मौत के आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि जून की शुरुआत में अस्पतालों में भर्ती होने वाले अधिकतर लोगों की हालत काफी गंभीर थी और कई की 4 दिनों के अंदर मौत हो गई, जबकि कुछ का निधन 24 घंटे के अंदर ही हो गया। 1 से 12 जून तक कुल मौतों का प्रतिषत पिछले चार दिनों में भर्ती हुए कुल मरीजों का 67 प्रतिशत था, जबकि अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर होने वाली मौतों का प्रतिशत 34 था। तुलाना में, 1 से 12 जुलाई के बीच प्रवेश के 4 दिनों के अंदर हुई मौतों का प्रतिशत केवल 35 प्रतिशत था, जबकि भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर होने वाली मौतों का प्रतिशत 15 प्रतिशत था।

दिल्ली के निवासियों का विश्वास बहाल करने में मदद

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पहल पर ध्यान केंद्रित करने के कारण इसमें त्वरित बदलाव संभव हो सका, जो सीधे तौर पर मौतों को रोकने के साथ ही गंभीर मरीजों के स्टेटस की प्रतिदिन निगरानी में मददगार हो सकी। स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा, “सीएम केजरीवाल शुरू से ही व्यक्तिगत रूप से कोविड के गंभीर मरीजों और उसके कारण मौतों के स्टेटस की प्रतिदिन निगरानी कर रहे हैं। उनके द्वारा मौतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण पहल को समय पर लागू करने पर दिए गए जोर ने स्थिति को उलटने और दिल्ली सरकार के अस्पतालों के प्रति दिल्ली के निवासियों का विश्वास बहाल करने में मदद की है।

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