हक के लिए नकाब या घूंघट प्रथा को बाधा नहीं बनाना चाहिए
—झुंझुनूं सभापति नगमा बानो की विशेष बातचीत
—नगमा बानो ने कहा—हर महिला सशक्त हो…
(डॉ भावना शर्मा)
झुंझुनूं (राजस्थान) : अशोक गहलोत की मुहिम कि दुनिया चांद पर जा रही है और हम आज भी परंपराओं के नाम पर घूंघट या नकाब से उलझे बेठे हैं। आज गर्व का विषय है कि झुंझुनूं जिले की बेटी और जिले की ही बहू आज झुंझुनूं की सभापति है। इससे ज्यादा सशक्त उदाहरण क्या होगा झुंझुनूं जिले के लिए जहां पर्दा प्रथा एक संस्कृति मानी जाती थी उससे उपर उठ कर वास्तविक रूप से सशक्त महिला अपने वजूद को चरितार्थ कर रही है और इसमे उनके परिवार वालो ने भी सहयोग की कोई कमी नहीं रखी है। बशीर बरकत कुरेशी और खतीजा बानो के घर जन्मी नगमा बानो बचपन से ही संवेदनशील थी। तीन बहनें और दो भाई के साथ जब भी बाहर खेलती तो हमेशा महिलाओं के लिए कुछ अनसुलझे सवाल होते थे। वे जब भी जेके मोदी राजकीय विधालय मे पढ रही थी तब भी महिला सशक्तीकरण जैसे सवाल जेहन में घूमते थे।
सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार उनकी शादी ग्यारहवीं कक्षा में जुनेद अहमद से कर दी गई और एक अल्हड बचपन बहू के दायरे में सीमित हो गया। पर कुदरत तो कुदरत होती है और बड़े नसीब से उन्हें ससुर के रूप में तैयब अली जो कि पूर्व पालिका अध्यक्ष रह चुके थे और सास जमीला बानो मिली जो कि पार्षद रह चूकी थी, मिले। उनके पति जुनेद अहमद जो कि इंजीनियर थे,विदेश में काफी अच्छे अवसर के बाद भी इन्होंने झुंझुनूं ही व्यवसाय करने का मानस बनाया ताकि वे नगमा बानो के साथ भी कदम से कदम मिलाकर चल सके । समाज सेवा का जुनून ही उन्हें अब ज्यादा अच्छा लगता है पर समस्या यह थी कि या तो सामाजिक रीति रिवाजों के साथ चला जाए या फिर बहूओं को बेटी मानकर आगे बढ़ाया जाए।
बहू नगमा बानो को आगे बढ़ाने के लिए जेठ जुबेर अहमद, जेठानी यास्मीन, देवर तनवीर अहमद और ननद हसीना भी आगे आई और जमाने को धत्ता बता कर बहू को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। नगमा बानो सामाजिक सरोकार मे रुचि रखती थीं पर राजनीति से सर्वदा अनजान। ऐसे मे ससुर तैयब जी ने कहा कि परंपरागत संस्कृति अपनी जगह है और संस्कृति में आज की आवश्यकता के अनुरूप परिवर्तन नहीं होंगे तो हम कभी भी विकास नहीं कर पाएंगे। आज आप अपने साथ की बहूओं का विकास चाहती हो तो राजनीति के माध्यम से एक प्रेरणा बन सकती हो। नकाब या घूंघट प्रथा एक सीमा तक अच्छा है पर यदि किसी इंसान के हक के लिए आगे आना हो तो इस परंपरा को बाधा नहीं बनाना चाहिए।
कोई भी परंपरा इंसानियत के फर्ज से बड़ी नहीं। नगमा बानो ने अपनी प्रेरणा सास को माना और बताया कि उन्होंने आज जो रास्ता दिखाया है उसे मानव सेवा के लिए हमेशा निभाएंगी और तमाम सुविधाओं से वंचित लडकियों के हक के लिए सारे फर्ज भी निभाएगी। नगमा बानो ने बताया कि झुंझुनूं के हर वार्ड की समस्या के लिए हमारे घर के दरवाजे हमेशा से खुले हुए हैं और एक सभापति होने के नाते वे झुंझुनूं के हर कोने की समस्या पर आवाज ही नहीं उठाएगी, वरन विकास के लिए हर संभव कोशिश भी करेगी।
जन सेवा के लिए दरवाजे चौबीसों घंटे खुले
झुंझुनूं जिले की सभापति नगमा बानों कहती हैं कि समस्त वार्ड मेरे अपने है और मै सभी के साथ बराबर का व्यवहार करते हुए विकास करने का प्रयास करूंगी। मेरी कोशिश रहेगी कि झुंझुनूं जिले में समस्त नवाचारों को बढ़ावा दे सकू और यहां के वाशिंदों के लिए हमेशा जन सेविका के रूप मे सहायक सिद्ध हो सकू। शिक्षा हो या स्वास्थ्य, या स्वच्छता…. कोई भी अभियान हो। मेरे घर के दरवाजे चौबीसों घंटे जन सेवा के लिए तत्पर हैं। मै स्त्री हूँ इसलिए मेरे लिए सबसे बड़े गर्व की बात है कि मुझे झुंझुनूं सभापति के रूप में रचनात्मक कार्य करने का मौका मिला। मेरा सभी से वादा है कि मै अपनी हर भुमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन करूंगी।