नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में उनके रोड शो पर तृणमूल कांग्रेस द्वारा किये गए हमले, आगजनी और पथराव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए ममता दीदी और तृणमूल सरकार पर जमकर हमला बोला। साथ ही, चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में संपन्न हुए सभी छ: चरणों के मतदान में तृणमूल समर्थकों द्वारा की गई व्यापक हिंसा पर मूकदर्शक बनने का आरोप लगाया। शाह ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आखिर चुनाव आयोग कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? चुनाव आयोग से अनुरोध है कि कम से कम वे यह सुनिश्चित करें कि सातवें चरण का मतदान पूरी तरह निष्पक्ष हो। इस मौके पर अमित शाह ने मीडिया के सामने कुछ तस्वीरें पेश कीं और कहा कि मैं सीआरपीएफ की सुरक्षा के कारण ही जिंदा लौट सका।
भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमित शाह ने कहा कि अब तक छह चरण के चुनाव समाप्त हो चूके हैं लेकिन देश के किसी भी हिस्से में कहीं कोई हिंसक घटना नहीं हुई सिवाय पश्चिम बंगाल के। यह हास्यास्पद है कि ममता बनर्जी इस हिंसा के लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रही हंै। ममता बनर्जी को यह बात याद रखनी चाहिए कि वे सिर्फ पश्चिम बंगाल के 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी देश के हर राज्य में कांग्रेस या फिर स्थानीय पार्टियों से सीधे मुकाबला कर रही है, लेकिन कहीं भी हिंसा नहीं हुई। यदि सभी छह चरणों में सिर्फ और सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही हिंसा हुई तो इसका स्पष्ट कारण है कि तृणमूल कांग्रेस ही हिंसा की जिम्मेवार है। यदि पश्चिम बंगाल में हुए छह चरणों के मीडिया कवरेज का संकलन किया जाए तो उससे स्पष्ट जाहिर होगा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का किस प्रकार गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि पंचायत चुनावों के दौरान भी पश्चिम बंगाल में 60 से भी अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई जो सबके सब विपक्ष के थे, इसमें भी अधिकतर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे। देशभर में ऐसा कोई चुनाव अब तक नहीं हुआ जिसमें इतने राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हों।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कल घटित घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए कहा कि कल भारतीय जनता पार्टी का रोड शो था। भारतीय जनता पार्टी ने जो पोस्टर-बैनर लगाए थे, रोड शो से तीन घंटे पहले ही उसे अधिकृत तरीके से हटाने का कार्यक्रम तृणमूल कांग्रेस द्वारा रखा गया और स्थानीय प्रशासन मूक दर्शक बनी रही। हमारे कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए बार-बार उकसाने का काम किया गया लेकिन भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तब भी शांति बनाए रखी।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कल जिस तरह से कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के 7 किमी लंबे ऐतिहासिक रोड शो में नागरिकों का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा, यह अपने आप में अभूतपूर्व था और इस बात का संकेत था कि पश्चिम बंगाल से अब ममता दीदी का समय समाप्त होने वाला है। इस रोड शो में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। ढाई घंटे तक इतना बड़ा रोड शो बिलकुल शांतिपूर्वक चला, कोई हिंसक घटना नहीं हुई लेकिन रोड शो को मिल रहे अपार जन-समर्थन से घबरा कर टीएमसी और उसके द्वारा संरक्षित गुंडों ने हताश होकर रोड शो पर तीन हमले किये- पथराव किये गए, आगजनी की गई और बोतल में केरोसिन डाल कर और आग लगा कर फेंके।
उन्होंने कहा कि कई अवांछित पदार्थ मुझ से दो-दो फुट की दूरी पर गिरे। यह ममता सरकार की बड़ी साजिश का हिस्सा था। यह लोकतंत्र का काला अध्याय है, पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को कभी माफ नहीं करगी। इसके दौरान हमारे कई कार्यकर्ता और पत्रकार भी घायल हुए। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ। अमित शाह ने कहा कि कल सुबह से इस बात की आशंका थी कि ईश्वर चन्द्र विद्यासागर कॉलेज से आकर कुछ छात्र दंगे करेंगे लेकिन स्थानीय पुलिस ने न किसी को हिरासत में लिया और न ही वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था की गयी।
टीएमसी आरोप लगा रही है कि ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की मूर्ति को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तोड़ी लेकिन जब कॉलेज के अन्दर टीएमसी के कार्यकर्ता थे, विश्वविद्यालय का गेट बंद था औ रईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की प्रतिमा भी सार्वजनिक रूप से नहीं बल्कि विश्विद्यालय के दो कमरों के अन्दर थी तो फिर प्रतिमा हमारे कार्यकर्ताओं ने कैसे तोड़े?
अभी-अभी पता चला है कि मुझ पर पश्चिम बंगाल में एफआईआर दर्ज कराई गई है लेकिन मैं ममता दीदी को बता देना चाहता हूँ कि तृणमूल सरकार में हमारे 60 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या की गई है, इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सत्य और विचारधारा की लड़ाई लडऩे के लिए अडिग हैं। ममता जी यदि यह सोचती हैं कि मुझ पर एफआईआर दर्ज कराने से सातवें चरण में भाजपा कार्यकर्ता डर जायेंगे तो उन्हें बता देना चाहता हूँ कि पार्टी कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल की जनता और अधिक जोश, जूनून व आक्रोश के साथ ममता सरकार को हटाने के लिए मतदान करने जा रही है।
दो दिन पूर्व ही ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अपने भाषण में धमकी दी कि मैं इंच-इंच बदला लूंगी तो उसी वक्त चुनाव आयोग ने इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया? ममता जी के प्रचार को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया?