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निर्भया के चारों दरिदों को फांसी, हुआ इंसाफ

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निर्भया के चारों दरिदों को फांसी, हुआ इंसाफ

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—5.30 बजते ही जल्लाद ने फांसी पर लटका दिया
—फांसी से पहले निर्भया के दोषी खौफ में थे
—दोषी घबरा भी गया और वहीं फांसी घर में लेट गया
—पूरी रात अदालती प्रक्रिया चलती रही, दोषी आखिरी दांव खेलते रहे

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली / टीम डिजिटल : 7 साल, 3 महीने और 3 दिन बाद आखिरकार निर्भया को इंसाफ मिल ही गया। निर्भया गैंगरेप केस के सभी चारों दोषियों को आज तिहाड़ जेल में तय निर्धारित वक्त सुबह साढ़े 5 बजे फांसी दे दी गई। इससे पहले पूरी रात अदालती प्रक्रिया चलती रही और दोषी आखिरी दांव खेलते रहे। लेकिन,पहले हाईकोर्ट और आधी रात के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तड़के तक एक दोषी पवन गुप्ता की अर्जी पर सुनवाई की और उसकी आखिरी अर्जी भी खारिज कर दी। बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने सभी चार दोषियों का 20 मार्च के लिए डेथ वॉरंट जारी किया था। इस फैसले पर देश की 7 साल से नजरें थी। सही मायने में देश को आज एक बडे न्याय की उम्मीद जगी।

घड़ी में जैसे ही सुबह 5.30 बजे का वक्त हुआ। तिहाड़ में मौजूद जल्लाद ने लीवर खींच दिया और दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। फांसी से पहले निर्भया के दोषी किस तरह खौफ में थे, यह जेल में मौजूद लोगों ने देखा। फांसी के लिए ले जाते वक्त चारों दोषियों के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता था। इस दौरान एक दोषी घबरा भी गया और वहीं फांसी घर में लेट गया।

तिहाड़ जेल के मेडिकल अफसर ने निर्भया के सभी दोषियों को मृत घोषित कर दिया है। तिहाड़ में पवन, मुकेश, विनय और अक्षय को दी गई थी फांसी। फांसी के बाद करीब आधा घंटे तक दोषियों के शरीर फंदे से झूलता रहा था। आधे घंटे बाद मेडिकल ऑफिसर ने शवों की जांच की। अब डॉक्टरों का पैनल मृतकों के शव का पोस्टमॉर्टम करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, एक दोषी फांसी के लिए आगे नहीं जा रहा था, फिर फांसी घर में मौजूद लोग उसे जबरन आगे लेकर गए। इससे पहले दो दोषियों ने अपने हाथ बंधवाने से भी इनकार किया था। फिर पुलिसवालों की मदद से उनके हाथ बांधे गए थे।

रातभर रहे थे बेचैन, खाना नहीं खाया

निर्भया के दोषियों की हालत रात से ही खराब थी। 19 मार्च यानी अपनी आखिरी रात को दोषी सोए नहीं थे। रात को मुकेश-विनय ने डिनर किया था। वहीं पवन और अक्षय रातभर बेचैन रहे।

निर्भया के दोषियों की 24 घंटे पहले से मॉनिटरिंग शुरू हो गई थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जेल अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि ये चारो अपने आप को चोट पहुंचा सकते हैं ताकि फांसी से बच सके।

निर्भया की मां बोलीं, जारी रखेंगे संघर्ष

निर्भया की मां ने दोषियों की फांसी के बाद कहा कि आज देश के बच्चियों को इंसाफ मिला। उन्होंने कहा कि जिस तरह निर्भया केस में देरी की तकनीक अपनाई गई लेकिन शीर्ष अदालत ने सबको खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें देर से ही सही लेकिन न्याय मिला। इस न्याय व्यवस्था के प्रति हमारा विश्वास बना रहेगा। हम सबको इंसाफ मिला। हम ये लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे। निर्भया को इंसाफ मिला है। देश की बच्चियों को न्याय दिलाने के लिए हम यह लड़ाई जारी रखेंगे।’

दोषियों ने किया कानून के साथ खिलवाड

दोषियों ने किस कदर कानून के साथ खिलवाड़ किया, इसको इसी से समझा जा सकता है कि दोषी मुकेश ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि 16 दिसंबर 2012 की उस रात को वह दिल्ली में ही नहीं था। पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस केस में निचली अदालत ने दोषियों को मौत की सजा सुनाई। इस पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भी मुहर लगी। हर तरह के रिव्यू और क्यूरेटिव पिटिशन खारिज हुए। इसके बावजूद एक दोषी ने फांसी से ऐन पहले शीर्ष अदालत में दावा किया कि वह मौका-ए-वारदात पर था ही नहीं। इस याचिका का भी वही हश्र हुआ जो होना था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि दोषी मुकेश सिंह ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लिया है। इस स्तर पर अब किसी भी तरह के ‘नए सबूत’ पर विचार नहीं किया जा सकता।

16 दिसम्बर 2012 को हुआ था निर्भया कांड

गौरतलब है कि 16 दिसम्बर 2012 को 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या करने के मामले में दोषी मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा(26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दी गई। तिहाड़ जेल में पहली बार एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जेल में 16,000 से अधिक कैदी हैं। मेरठ से जल्लाद पवन मंगलवार शाम तिहाड़ जिला प्रशासन के पास पहुंच गया था ताकि फांसी की तैयारी की जा सके।

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