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दुष्कर्म व पॉस्कों के मुकदमें जल्द निपटाएं राज्य

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दुष्कर्म व पॉस्कों के मुकदमें जल्द निपटाएं राज्य

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–नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप एवं महिला हिंसा को लेकर सरकार सख्त
-दुष्कर्म और पॉस्को अधिनियम के मुकदमों का जल्द होगा निपटारा
–1023 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों का गठन
-राष्ट्रीय महिला सुरक्षा मिशन के अंतर्गत हुई बड़ी पहल
–कानून मंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा पत्र

(ISHA SINGH)
नई दिल्ली : 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म तथा महिलाओं के खिलाफ इसी तरह के जघन्य अपराधों की घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रखा दिया है। इसको लेकर केंद्र सरकार गंभीर हो गई है। साथ ही महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के अपराधों पर अंकुश लगाने एवं यौन अपराधों से संबंधित मुकदमों की जल्द सुनवाई पूरी कर लेने की पहल की गई है। साथ ही इस बावत विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी राज्यों को पत्र लिखा है। साथ ही सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे देश भर में फास्ट -ट्रैक विशेष अदालतों का गठन करें और योजना का कारगर क्रियान्वयन करें, ताकि ऐसे अपराधों की रोकथाम की जा सके।

सरकार की पहल पर राष्ट्रीय महिला सुरक्षा मिशन के अंग के रूप में फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के गठन के साथ की गई है। साथ ही देश भर में केंद्र सरकार ने 1023 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के गठन की योजना शुरू की है। इसके तहत विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मुकदमों (31 मार्च 2018 तक कुल लंबित मुकदमों की संख्या 1,66,882) के मद्देनजर दुष्कर्म और पॉस्को अधिनियम के लंबित मुकदमों की जल्द सुनवाई और उनका निपटारा किया जाएगा।

इसके अलावा स्वमेव रिट याचिका (आपराधिक संख्या 01/2019), 25 जुलाई के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार 1023 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों में से 389 अदालतों का खासतौर से पॉस्को अधिनियम से संबंधित उन जिलों में गठन किए जाने का प्रस्ताव किया गया है, जहां ऐसे लंबित मामलों की संख्या 100 से अधिक है। इस योजना से सभी संबंधित राज्य सरकारों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों को सितंबर 2019 में सूचित कर दिया गया है।

बता दें कि 354 विशेष पॉस्कों अदालतों सहित 792 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के गठन के संबंध में 31 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में से अब तक 24 राज्य योजना में शामिल हो चुके हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, दिल्ली, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, चंडीगढ़ केन्द्रशासित प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

12 राज्यों में चल रही हैं 216 पॉस्को अदालतें

केंद्र सरकार के कानून विभाग उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों को इन अदालतों के गठन के लिए लगातार सहयोग और सहायता प्रदान कर रहा है, ताकि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा तथा सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए उनके खिलाफ होने वाले अपराधों के मुकदमों की जल्द सुनवाई हो सके। योजना के तहत 12 राज्यों में 216 पॉस्को अदालतें चल रही हैं। ऐसे मुकदमों को निपटाने के संबंध में अधिक सख्त प्रावधानों और तेज सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2018 को लागू किया है।

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