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प्रयागराज की धरती पर होगा वैज्ञानिक महाकुंभ

उत्तर प्रदेश टेक्नोलॉजी

प्रयागराज की धरती पर होगा वैज्ञानिक महाकुंभ

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—मुक्त विश्वविद्यालय में समाज वैज्ञानिकों का जमावड़ा शुरू
— पूर्व राज्यपाल पंडित केशरीनाथ करेंगे  सम्मेलन का उद्घाटन
—आगामी 2 से 4 फरवरी तक सप्तम समाज विज्ञान सम्मेलन आयोजित होगा
—’राष्ट्र निर्माण एवं समाज विज्ञान: मुद्दे एवं चुनौतियां’ विषय पर

(विनोद मिश्रा) 
प्रयागराज/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में एक तरफ जहां माघमेला की धूम है, वहीं देश भर के समाज वैज्ञानिकों का जमावड़ा उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (Rajarshi Tandon Open University) में लगना शुरू हो गया है। यहां आगामी 2 से 4 फरवरी 2020 तक भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उत्तर क्षेत्रीय केंद्र एवं उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में सप्तम समाज विज्ञान सम्मेलन आयोजित होगा।
इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में ‘राष्ट्र निर्माण एवं समाज विज्ञान: मुद्दे एवं चुनौतियां’ विषय पर देशभर के विख्यात संस्थानों से वरिष्ठ समाज वैज्ञानिक महत्वपूर्ण विचार व्यक्त करेंगे। सम्मेलन के आयोजन सचिव तथा समन्वयक प्रोफेसर गिरिजा शंकर शुक्ल निदेशक, स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन आगामी 2 फरवरी 2020 को अपराह्न 2.30 बजे पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी, पूर्व राज्यपाल, पश्चिम बंगाल करेंगे तथा अध्यक्षता उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह करेंगे। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन 4 फरवरी को अपराह्न 2.30 बजे होगा।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष तथा कानपुर एवं चित्रकूट विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर के. बी. पांडे होंगे।

मीडिया प्रभारी डॉ प्रभात चंद्र मिश्र के मुताबिक इस सम्मेलन में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं राजस्थान से विद्वान एवं शोधार्थी अपने शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण करेंगे। प्रोफेसर शुक्ला ने बताया की सरस्वती परिसर में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन की सफलता के लिए कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह के निर्देशन में विभिन्न समितियों का गठन किया गया है।

बाहर से आने वाले प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय में ठहरने की उचित व्यवस्था की गई है। प्रोफेसर शुक्ला ने बताया कि सम्मेलन में 10 उपविषय निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक उपविषय में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुत करने करने पर ₹2100 का नगद पुरस्कार तथा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

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