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DELHI: पंजाबी-सिख बहुल 12 विधानसभा सीटों पर BJP की नजर

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DELHI: पंजाबी-सिख बहुल 12 विधानसभा सीटों पर BJP की नजर

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पंजाबी-सिख बहुल 12 विधानसभा सीटों पर भाजपा की नजर
-भाजपा ने सिख प्रकोष्ठ को मैदान में उतारा, सक्रियता बढ़ी
–लोहड़ी के बहाने सभी क्षेत्रों में दो दिनों में हुए कार्यक्रम
–जमीन मजबूत करने के लिए भाजपा ने नया तरीका अपनाया

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) के लिए राजधानी दिल्ली में पंजाबी और सिख बहुल इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए भाजपा ने करीब 12 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है। यहां 50 फीसदी पंजाबी समुदाय के लोग चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें से आधा दर्जन सीटों पर अकाली दल पहले से ही अपनी जमीन मजबूत कर चुका है। अब अचानक भाजपा का इन सीटों पर उतरना कहीं न कहीं एक बड़ा सियासी संकेत देता है। लिहाजा, भाजपा ने पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गई है। इसके लिए भाजपा ने अपने सिख प्रकोष्ठ को जिम्मेदारी सौंपी है।

इसकी मानिटरिंग भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं दिल्ली चुनाव के संयोजक तरुण चुघ खुद कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो दिल्ली के 70 विधानसभा सीटों में से पंजाबी समुदाय से जुड़ी 12 विधानसभा सीटों पर सिख प्रकोष्ठ ने रविवार एवं सोमवार को लोहड़ी के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया। इन जगहों पर चुनाव प्रचार के लिए बनाए गए विशेष रथ को भी इस्तेमाल किया गया।

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पहली बार पंजाबी इलाकों में अपने सिख प्रकोष्ठ की तरफ से लोहड़ी मनाने का कार्यक्रम रखा गया है। अब तक अकाली दल के पास ही सिख हल्कों की जिम्मेदारी होती थी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा का सिख प्रकोष्ठ इस बार अकाली कोटे की सीटों पर भी नजर गड़ाए हुए है। यही कारण है कि वह अपने नेताओं के जरिये भाजपा हाईकमान तक दबाव भी बना रहा है कि अकालियों की बजाय सिख कोटे की सीटों को अपने प्रकोष्ठ से जुड़े नेताओं को ही दी जाए। प्रकोष्ठ के नेताओं का दावा है कि पार्टी के लिए काम वो करते हैं और मौका आने पर टिकटें अकाली दल ले जाता है। लिहाजा, अब देखना होगा कि पंजाबी समुदाय बहुल इलाकों में दोनों के बीच टिकटों का बंटवारा किस तरह होता है।

बता दें कि दिल्ली में करीब 50 फीसदी लोग पंजाबी समुदाय के लोग हैं। ये माना जाता है कि पंजाबी वोट दिल्ली की 20 से 25 सीटों के नतीजों केा अपने दम पर प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसमें ज्यादातर 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए हुए लोग हैं। इसमें सिख और हिंदू दोनों हैं।

प्रकोष्ठ के एक नेता की माने तो रविवार केा 12 जनवरी को हरीनगर विधानसभा के भाई कन्हैया जी मार्ग पर, जनकपुरी, मादीपुर, शालीमार बाग, मुंडका, तिमारपुर में दो स्थानों पर (परमानंद चौक मुखर्जी नगर एवं मुुखर्जी नगर), रिठाला, शाहदरा, मॉडल टाउन, नांगलोई एवं सदर बाजार में लोहड़ी के बहाने कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी प्रकार बाकी बचे इलाकों में आज सोमवार को कार्यक्रम आयोजित कर लोगेां को कनेक्ट किया गया।

सिख प्रकोष्ठ आधा दर्जन सीटों पर मांग रहा है टिकट

सूत्रों के मुताबिक भाजपा सिख प्रकोष्ठ की ओर से भी आधा दर्जन से अधिक नेताओं ने अपनी दावेदारी ठोंक दी है। इसमें राजिंदर नगर विधानसभा सीट से आरपी सिंह का नाम भी शामिल है। हालांकि, उनका टिकट तो पक्का ही माना जा रहा है। इसके अलावा तिलक नगर से दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिन्दरपाल सिंह बग्गा, जंगपुरा से इम्प्रीत सिंह बक्शी, तिमारपुर से जसप्रीत सिंह माटा एवं कुलदीप सिंह, हरीनगर से परमजीत सिंह मक्कड़, कालकाजी से केएस दुग्गल एवं जनकपुरी से रविंदर सिंह सोनू ने भी सिख कोटे से दावेदारी पेश की है।

किन-किन सीटों पर हैं सिख-पंजाबी

राजिंदर नगर में 7 फीसदी सिख एवं 28 फीसदी पंजाबी लोग हैं। इसी प्रकार तिलक नगर सीट पर 40 से 45 फीसदी सिख व पंजाबी, जंगपुरा में 20-25 फीसदी सिख व पंजाबी, तिमारपुर में 10 से 15 फीसदी सिख एवं 20-25 फीसदी पंजाबी, हरी नगर में 35-40 फीसदी सिख व पंजाबी, कालकाजी में 10-15 फीसदी सिख, 15-20 फीसदी पंजाबी एवं जनकपुरी विधानसभा में सिख 15-20 फीसदी, 20-25 फीसदी पंजाबी समुदाय के लोग हैं।

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