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1984 सिख दंगा: सज्जन कुमार को जेल भेजने वाली महिला को कोरोना ने जकड़ा

पंजाबी न्यूज

1984 सिख दंगा: सज्जन कुमार को जेल भेजने वाली महिला को कोरोना ने जकड़ा

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–1984 सिख दंगों की प्रमुख महिला गवाह को हुआ कोरोना

–24 तारीख से अस्पतालों के काट रही थी चक्कर
-हालात गंभीर, दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया
–परिवार ने सिख समाज व सरकारों से की मदद की गुहार

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : 1984 सिख दंगों के सुल्तानपुरी मामले की अहम गवाह को कोरोना होने की पुष्टि हुई है। उन्हें इस समय एम्स में भर्ती कराया गया है। इस बात की जानकारी सज्जन कुमार के खिलाफ एक दूसरी प्रमुख गवाह निरप्रीत कौर ने दिया है। साथ ही उन्होंने सिख समाज, दिल्ली सरकार एवं केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

उन्होंने बताया कि शीला कौर को 24 तारीख से बुखार चल रहा था, जिसके बाद उनका परिवार उनको लेकर एक निजी अस्पताल गया,लेकिन कुछ घंटे बाद अस्पताल में वापस भेज दिया। हालात ठीक न होने पर दूसरे दिन दीनदयाल अस्पताल हरीनगर इलाज के लिए गए। लेकिन, दीनदयाल अस्पताल ने बिना जांच किए ही इलाज करने में असमर्थता जता दी, और वापस घर भेज दिया। इसकेे बाद परिवार के लोग उनको लेकर खेत्रपाल अस्पताल गए, जहां पर टेस्ट हुआ और कोरोना पॉजिटिव पाई गई।

कारेाना की पुष्टि होने के बाद दूसरे ही दिन परिवार ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल से संपर्क किया और वहां पहुंच गए। हालात गंभीर होने के चलते राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने भी असमर्थता जताते हुए  हरियाणा के झज्जर स्थित एम्स भेज दिया। वहां से कल उन्हें एम्स दिल्ली शिफ्ट किया गया।

गवाह निरप्रीत कौर के मुताबिक उनकी हालात बहुत खराब है और उनके परिवार केे लोगों द्वारा दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी से संपर्क किया गया लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद निरप्रीत कौर ने दिल्ली कमेटी के लीगल सेल के इंचार्ज जगदीप सिंह काहलो और कमेटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा को भी फोन करके जानकारी दी। जब कहीं से कोई मदद नहीं मिली तब निरप्रीत कौर ने सोशल मीडिया पर लाइव गुहार लगाते हुए अपनी बात रखी साथ ही शीला कौर की मदद के लिए अरदास करने की अपील भी की।

बता दें कि ये वही  कौर हैं, जिन्होंने कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को भरी अदालत में जज के सामने दंगा करने वालों के रूप में पहचाना था। सुल्तानपुरी से जुड़े इस मामले को लेकर आंतरिक विवाद भी खूब हुआ था, जिसके बाद इनका केस कड़कडड़ूमा से पटियाला हाउस कोर्ट स्थानांतरित किया गया था। 1984 सिख विरोधी दंगों में इनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या हुई थी और ये प्रमुख गवाह भी हैं।

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