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1984 सिख दंगा, SC ने 34 आरोपियों को दी जमानत

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1984 सिख दंगा, SC ने 34 आरोपियों को दी जमानत

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–पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में 95 लोगों की हुई थी मौत, 100 घरों को जलाया था
–दिल्ली हाईकोर्ट ने ठहराया था 70 लोगों को दोषी
–केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में डाली पुर्नविचार याचिका
–त्रिलोकपुरी हिंसा मामले में अब तक 49 लोग आ चुके जमानत पर बाहर

(खुशबू पाण्डेय)

नई दिल्ली, 23 जुलाई : 1984 सिख विरोधी दंगों के त्रिलोकपुरी मामले में आरोपी 34 लोगों को आज देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। त्रिलोकपुरी में हुए दंगों के दौरान मारे गए 95 लोगों की मौत के बाद दिल्ली पुलिस की दंगा विरोधी शाखा ने दंगें तथा आगजनी के आरोपों में 89 लोगों को नामजद किया था। इसपर निचली अदालत ने आरोपियों को दंगा तथा आगजनी के आरोपों में 5 साल तक की सजा सुनाई थी।

आरोपियों के द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में डाली गई अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 70 आरोपियों की सजा को बरकरार रखा था। इसमें से 15 आरोपियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल 2019 को बरी कर दिया था। इसी आदेश की आड़ में 34 और आरोपियों ने अपने को बरी किए जाने के अर्जी सुप्रीम कोर्ट में डाली थी। इस पर 5 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। मंगलवार को कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए।

उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि केंद्र सरकार के द्वारा बरी हुए 15 आरोपियों के खिलाफ पुर्नविचार याचिका दाखिल की जा रही है। इसलिए इन आरोपियों केा सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले का फायदा ना दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने तुषार मेहता की अपील को सुनने के बाद पुर्नविचार याचिका के साथ आरोपियों की याचिका नत्थी कर दी। लेकिन सभी 34 आरोपियों को जमानत भी दे दी। इस प्रकार अभी तक त्रिलोकपुरी हिंसा मामले में 49 लोग जमानत पर बाहर आ चुके हैं।

साढ़े 34 साल पहले 1984 में त्रिलोकपुरी में हुए थे सिख विरोधी दंगा


दरअसल, करीब साढ़े 34 साल पहले 1984 में पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में सिख विरोधी दंगा हुए थे। दंगों के सिलसिले में दायर 88 दोषियों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 नवंबर 2018 को बड़ा फैसला सुनाया था। इसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी दोषियो की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट का यह फैसला 22 साल बाद आया था। इसमें निचली अदालत ने 1996 में पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में 95 शव बरामद हुये थे, लेकिन किसी भी दोषी पर हत्या की धाराओं में आरोप तय नहीं हुये थे। इनके खिलाफ 2 नवंबर 1984 को कफ्र्यू का उल्लंघन कर हिंसा करने का आरोप था। उस हिंसा में त्रिलोकपुरी में करीब 95 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 100 घरों को जला दिया गया था। इसके बाद 95 शव बरामद हुए थे। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इन लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और फिर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

30 अप्रैल को 15 लोग हुए थे बरी


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को इसी त्रिलोकपुरी वाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए दोषी ठहराए गए 15 लोगों को बरी कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले नवम्बर में इन लोगों के दोषी होने और निचली अदालत से मिली सजा को सही ठहराया था। साथ ही पांच साल की सजा बरकरार रखी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि इनके खिलाफ दंगों में शामिल रहने के न तो सीधे सबूत मिले और ना ही गवाहों ने उनकी पहचान की। लिहाजा इन्हें बरी किया जाए। सजायाफ्ता लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी थी। बरी होने वाले लोगों में गनशेनन, वेद प्रकाश, ताराचंद, सुरेंद्र सिंह (कल्याणपुरी), हबीब, राम शिरोमणि, ब्रह्म सिंह, सुब्बर सिंह और सुरेंद्र मूर्ति आदि शामिल हैं।

जमानत पर अफसोस, जेल में वापिस पहुंचायेंगे : सिरसा


दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि 1984 के त्रिलोकपुरी सिख विरोधी दंगों में बरी हुए 15 व्यक्तियों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार द्वारा डाली रिव्यु पटीशन स्वीकार कर ली है। आज इसी मामले में चार अलग-अलग पटीशनों में 34 व्यक्तियों द्वारा पिछले दिनों बरी हुए व्यक्तियों को आधार बना कर डाली गई रिहाई की अर्जिय़ों को स्वीकार करते हुए इस पर अगली सुनवाई के साथ रिव्यु पटीशन पर भी अदालत ने बहस करवाना स्वीकार कर लिया है। सिरसा ने कहा कि हमें इस बात पर अफसोस है कि इन 34 व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, उन्होंने कहा कि निर्दोष सिखों को कत्ल करने वाले कातिलों को जेल से बाहर नहीं आना चाहिए था पर हमें पूरा विश्वास है कि सरकार द्वारा डाली गई रिव्यु पटीशन से पिछले दिनों रिहा हुए 15 व्यक्ति और जमानत पर जेल से बाहर आये 34 लोगों को दुबारा जेल में जरूर भेजेंगे।

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