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कोविड-19: राज्यों की सहमति के बगैर अब श्रमिक ट्रेन चलाएगा रेलवे

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कोविड-19: राज्यों की सहमति के बगैर अब श्रमिक ट्रेन चलाएगा रेलवे

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–देश भर में फंसे मजदूरों को देखते हुए सरकार ने बदला नियम
–केंद्र ने रेलवे के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की
-श्रमिक ट्रेन चलाने के लिए राज्यों से सहमति की जरूरत नहीं : रेलवे
–राज्यों के बीच आपसी विवाद के चलते हो रही है परेशानी

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : लॉकडाउन के चलते देशभर में फंसे प्रवासी श्रमिकों को ट्रेन से भेजने को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच विवाद के बाद भारतीय रेलवे अब बिना सहमति के ट्रेन चलाने को तैयार हो गया है। इस बावत मंगलवार को कहा कि ऐसी ट्रेनों के परिचालन के लिए गंतव्य राज्यों की सहमति की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए इन ट्रेनों को चलाने के वास्ते रेलवे के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की, जिसमें कहा गया कि गृह मंत्रालय से चर्चा के बाद रेल मंत्रालय श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए मंजूरी देगा।
एसओपी जारी होने के कुछ घंटे बाद रेल मंत्रालय के प्रवक्ता राजेश दत्त बाजपेई ने कहा, श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए उन राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है जहां यात्रा समाप्त होनी है। उन्होंने कहा कि नई एसओपी के बाद उस राज्य की सहमति लेना अब आवश्यक नहीं है जहां ट्रेन का समापन होना है।

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रेल मंत्रालय ने दो मई को जारी दिशा-निर्देशों में कहा था कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए रवानगी स्थल वाले राज्य को गंतव्य राज्य से अनुमति लेनी होगी और इसकी एक प्रति ट्रेन के प्रस्थान करने से पहले रेलवे को भेजनी होगी। नई एसओपी के बाद अब गंतव्य राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
केंद्र ने कहा था कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य इन ट्रेनों के लिए मंजूरी नहीं दे रहे हैं, जिससे लाखों प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर पैदल जाने को मजबूर हैं। हालांकि, राज्यों ने इन आरोपों को खारिज किया है। श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए अब सिर्फ रवानगी स्थल वाले राज्यों से ही मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे प्रवासी मजदूरों को ट्रेन से यात्रा करने में आसानी होगी।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेलवे को अगले सप्ताह में ऐसी 300 ट्रेन चलाए जाने और शेष प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाए जाने की उम्मीद है।

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बता दें कि एक मई से रेलवे ने 1,565 प्रवासी श्रमिक ट्रेनों का परिचालन किया है और 20 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाया है। इस बीच रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक ट््वीट में कहा कि उत्तर प्रदेश ने जहां 837 ट्रेनों को मंजूरी दी है, वहीं बिहार ने 428 और मध्य प्रदेश ने 100 से अधिक ट्रेनों को मंजूरी प्रदान की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक छत्तीसगढ़ ने केवल 19, राजस्थान ने 33 और झारखंड ने केवल 72 ट्रेन चलाने की अनुमति दी थी।

रेलवे के पास  300 ट्रेन रोजाना चलाने की क्षमता

रेल मंत्रालय के अनुसार, रेलवे के पास लगभग 300 ट्रेन रोजाना चलाने की क्षमता है, लेकिन वह इसकी आधी संख्या में ही ट्रेनों का परिचालन कर पा रहा है क्योंकि गंतव्य राज्य पर्याप्त संख्या में अनुमति नहीं भेज रहे। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य प्रवासी मजदूरों को वापस भेजने को तैयार हैं, लेकिन कई गंतव्य राज्य मंजूरी नहीं दे रहे।

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