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रेलवे के बैकएंड योद्धाओं ने किया कमाल, मंगलमय होगी आपकी यात्रा

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रेलवे के बैकएंड योद्धाओं ने किया कमाल, मंगलमय होगी आपकी यात्रा

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–घरों में कैद रहे लोग, बैकएंड योद्धाओं ने संभाल लिया मोर्चा
—  बैकएंड योद्धाओं ने बदल दी रेलवे की तस्वीर
–50 से 100 साल पुराने प्रोजेक्टों का किया कायाकल्प
–लॉकडाउन के दौरान ट्रैक, यार्ड, सिग्नल, ओवरहेड एवं स्टेशन का मेंटीनेंस किया
–मशीनों के जरिये 12 हजार किमी ट्रैक मेंटीनेंस हुआ

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल : कोविड-19 के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान जब पूरा देश घरों में कैद है, इस बीच भारतीय रेलवे के बैकएंड योद्धाओं ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसे जानकार आप भी हैरान हो जाएंगे। कई वर्षों से लंबित पड़े रहने वाले अहम प्रोजक्टों की कायाकल्प चलती ट्रेनों के कारण संभव नहीं होता था, जो देश भर के विभिन्न रेलवे जोन में भारतीय रेलवे के लिए मुश्किलों का सबब रहे। लेकिन रेलवे के इन योद्धाओं ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अदभुत मिशाल पेश की है। इस दौरान 50 साल से लेकर 100 साल से लंबित रेलवे प्रोजक्टों को योद्धाओं ने पूरा किया है। ताकि लॉकडाउन खुलने के बाद जब रेलगाडियां स्पीड पकडें़ और आपकी यात्रा मंगलमय हो सके।


भारतीय रेलवे के बैकएंड योद्धाओं ने सुरक्षा एवं परिचालन क्षमता बेहतर करने के लिए लॉकडाउन के दौरान यार्ड रिमॉडलिंग और सीजर्स क्रॉसओवर के नवीकरण के अलावा काफी समय से लंबित पड़े पुलों और पटरियों के प्रमुख रखरखाव कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर डाला।
भारतीय रेलवे ने इसे ‘जीवन में सिर्फ एक बार मिलने वाला अवसर जैसा मानते हुए लॉकडाउन अवधि के दौरान इन कार्यों को पूरा करने की योजना बनाई, ताकि इन लंबित रखरखाव कार्यों को निपटाने के साथ-साथ ट्रेन सेवा को प्रभावित किए बिना ही काम को पूरा किया जा सके।
रेलवे मंत्रालय के मुताबिक इस दौरान ट्रैक का जो काम किया गया, उसमें काजीपेट यार्ड, विजयवाड़ा यार्ड, बेंगलुरु सिटी यार्ड में मरम्मत के साथ बड़ौदा स्टेशन का नवीनीकरण भी शामिल है। इसके अलावा भारतीय रेलवे के बैकएंड योद्धाओं ने इस लॉकडाउन के दौरान यार्ड रिमॉडलिंग, सीजर्स क्रॉसओवर के नवीकरण और पुलों की मरम्मत जैसे काफी समय से लंबित पड़े रखरखाव कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

12270 किमी लंबी सीधी पटरियों का मेंटीनेंस किया

ट्रैक, सिग्नल एवं ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) मेंटेनर के साथ लगभग 500 आधुनिक भारी ट्रैक मेंटेनेंस मशीनों ने 12270 किमी लंबी सीधी पटरियों और 5263 टर्न आउट के लंबित पड़े ट्रैक रखरखाव कार्य को पूरा करने के लिए 10749 मशीन दिवसों तक नियमित रूप से काम किया है। 30182 किलोमीटर लंबी पटरियों और 1,34,443 रेल वेल्ड में अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) का काम यूएसएफडी मशीन की मदद से किया गया है

2,246 किमी लंबी लॉन्ग वेल्डेड रेल की हुई डी-स्ट्रेसिंग

पटरियों की सही स्थिति की निगरानी समय-समय पर स्पंदन निगरानी प्रणाली (ओएमएस) को चला करके की जाती रही है। ओएमएस परीक्षण द्वारा इंगित 5362 पीक लोकेशन पर 1,92,488 किलोमीटर लंबी पटरियों का जायजा लिया गया, ताकि समुचित गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। 30182 किलोमीटर लंबी पटरियों और 1,34,443 रेल वेल्ड में अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) का काम यूएसएफडी मशीन की मदद से किया गया है। लॉन्ग वेल्डेड रेल (एलडब्ल्यूआर) की डी-स्ट्रेसिंग जैसी अहम ग्रीष्मकालीन एहतियाती गतिविधियां या कार्य, जिनमें बड़ी संख्या में श्रमबल की आवश्यकता पड़ती है, को सामाजिक दूरी बनाए रखने के मानदंडों का पालन करते हुए एक नई प्रक्रिया के साथ शुरू किया गया है। 2,246 किलोमीटर लंबी लॉन्ग वेल्डेड रेल की डी-स्ट्रेसिंग की जा चुकी है।

तुंगा नदी पर ब्रिज संख्या 86 की री-गर्डरिंग

मैसूर डिवीजन के बिरुर जंक्शन-तेलगुप्पा खंड पर एक महत्वपूर्ण पुल है जिसमें 61/100-500 किलोमीटर पर 18.30 मीटर के स्टील प्लेट गर्डर्स के 15 फैलाव हैं। सामान्य परिस्थितियों में इस काम के लिए प्रत्येक दिन 3 घंटे की दर से लगभग 45 घंटे तक यातायात को रोकना पड़ता।
मौजूदा स्टील गर्डर्स मानक स्तर के नहीं हैं और इनके स्थान पर 25 टन के लोडिंग स्टैंडर्ड स्टील गर्डर्स लगाए जा रहे हैं। पुल की ऊंचाई नदी के तल से लगभग 20 मीटर है। सभी गर्डरों की लॉन्चिंग आज पूरी हो गई।

100 साल पुराने लुधियाना रेलवे स्टेशन  पर जुड़वां एफओबी को गिराया

वर्ष 2014 से ही 100 साल पुराने जुड़वा एफओबी को यात्री उपयोग के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, ओएचई क्षेत्र में पुराने एफओबी को ढहाने के लिए नई दिल्ली-अमृतसर मार्ग पर कई दिनों तक 10-12 घंटे से भी अधिक समय तक सभी लाइनों को अवरुद्ध करना संभव नहीं था। लॉकडाउन के दौरान इन एफओबी को 8 दिनों तक 8-10 घंटे के ‘ट्रैफिक ब्लॉकÓ में ढहाने की योजना बनाई गई है। एफओबी के सफलतापूर्वक ढहाने के लिए पहले ही 2 ट्रैफिक ब्लॉक का उपयोग किया जा चुका है।

ट्रैक की मरम्मत से सुरक्षा बेहतर होगी : आरडी बाजपेई 

रेलवे बोर्ड के निदेशक (जनसंपर्क) आरडी बाजपेई के मुताबिक यात्री सेवाओं के निलंबन की अवधि का इस्तेमाल रेल नेटवर्क पर लंबे समय से अटके पड़े मरम्मत के काम को पूरा करने में किया गया। ट्रैक की मरम्मत से सुरक्षा बेहतर होगी और परिचालनात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी भी खत्म होगी। भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान यह सोचकर इस कार्य को करने की योजना बनाई कि मरम्मत के काम को पूरा करने का यह अच्छा अवसर है और इससे ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित नहीं होंगी।

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