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कोविड-19: Indian Railways 10 दिनों में 2600 श्रमिक ट्रेनें चलाएगा

रेल समाचार

कोविड-19: Indian Railways 10 दिनों में 2600 श्रमिक ट्रेनें चलाएगा

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-देश को जब तक जरूरत होगी ट्रेन चलाएगा रेलवे

–रेलवे ने अब तक 46 लाख श्रमिकों को घर पहुंचाया
–1 जून से चलने वाली ट्रेनों में 17 लाख टिकट बुक
–जिस स्टेशन से जरूरत होगी, उस शहर से रेलवे चलाएगी ट्रेन
–जब तक प्रवासियों का पंजीकरण होगा तब तक ट्रेन चलेगी
–रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली / टीम डिजिटल:: भारतीय रेलवे ने एक मई को शुरु हुई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से लगभग 46 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया तथा अगले दस दिनों में करीब 47 लाख और यात्रियों को पहुंचाने की योजना है। आने वाले 10 दिनों में सभी राज्यो से बातचीत कर 2600 श्रमिक ट्रेनें चलाने की योजना है। रेल मंत्रालय ने दावा किया कि जब तक प्रवासियों का पंजीकरण होगा, तब तक ट्रेनें चलती रहेगी। इसके अलावा देशभर में जिन शहरों एवं स्टेशनों से ट्रेन की जरूरत होगी, रेलवे ट्रेन चलाने को तैयार है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (CRB) विनोद कुमार यादव ने कहा कि विभिन्न राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके चलायी जा रहीं इन गाडिय़ों को तब तक चलाया जाता रहेगा जब तक इनकी मांग की जाती रहेगी। देश के प्रत्येक रेल मंडल मुख्यालय पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए आपात रैक तैयार खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि राज्यों एवं स्थानीय प्रशासन की मांग पर भारतीय रेल देश के किसी भी स्टेशन से कम से कम समय में श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए तैयार है। यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के बाद 12 मई से शुरू की गयीं 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के अलावा एक जून से 30 जून तक 200 से अधिक गाडिय़ों को शुरू करने की घोषणा की है। उनके लिए अब तक 17 लाख से अधिक टिकट बुक हो चुके हैं जो कुल उपलब्ध सीटों का करीब 30 फीसदी है।

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उन्होंने बताया कि रेलवे के अधिकतम बुकिंग विंडो खुल चुकीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे राज्य सरकारों के साथ मिल कर यात्रियों के लिए घोषित हेल्थ प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन कर रही है। इसीलिये गाडिय़ों को उन्हीं जगह रोका जा रहा है जहां उस प्रोटोकॉल के अनुपालन की व्यवस्था हो।

अनारक्षित यात्रा को पूरी तरह से बंद किया

CRB ने यह भी कहा कि रेलवे ने अनारक्षित यात्रा को पूरी तरह से बंद कर दिया है। वेटिंग एवं आरएसी टिकट का मतलब सोशल डिस्टेंसिंग से समझौता करना नहीं है और आरएसी टिकट उन्हीं को जारी किया जाएगा जिनकी सीट कन्फर्म हो सके। उन्होंने इस बात का खंडन किया कि रेलवे अधिक किराया ले रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे वही किराया ले रही है जो लॉक डॉउन के पहले लेती थी। कुछ रियायतों को अभी इसलिये स्थगित किया गया है क्योंकि रेलवे इस समय गैरजरूरी यात्रा को हतोत्साहित करना चाहती है।

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 80 फीसदी यूपी-बिहार के लोग

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि रेलवे इस समय रोजाना करीब 260 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करके साढ़े तीन लाख से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रहा है। इस समय तक 2600 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से करीब 36 लाख यात्रियों को अंतरराज्यीय गंतव्यों तक पहुंचाया गया है। इसके अलावा राज्य के भीतर ही गाडिय़ों की मांग मिलने पर दस लाख अन्य यात्रियों को पहुंचाया गया है। इस प्रकार से अब तक 46 लाख यात्री गंतव्य तक पहुंच चुके हैं।

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इन गाडिय़ों में 80 प्रतिशत गाडिय़ां उत्तर प्रदेश एवं बिहार के स्टेशनों के लिये चलायीं गयीं। इसके बाद मध्यप्रदेश और झारखंड का स्थान है। पश्चिम बंगाल को गाडिय़ों को लेकर विवाद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए 105 गाडिय़ों की मांग की गयी है जिसे रेलवे ने स्वीकार किया है। ये गाडिय़ां 15 जून तक चलायी जानी है। अभी राज्य सरकार ने चक्रवाती तूफान अम्फान से हुए नुकसान को देखते हुए फिलहाल गाडिय़ां नहीं चलाने को कहा है, जैसे ही राज्य सरकार की अनुमति मिलेगी, रेलवे तुरंत गाडिय़ां चलाने को तैयार है।

लॉकडाउन में खाद्यान्न की ढुलाई दोगुनी की

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन यादव ने कहा कि रेलवे ने लॉकडाउन के बाद माल ढुलायी में भी योगदान बढ़ाया है। खाद्यान्न की ढुलाई दोगुनी की है। कोयला, खाद, स्टील आदि की ढुलाई बढ़ी है। स्पेशल पार्सल सेवा गाडिय़ां समय सारणी के अनुसार चलायीं गयीं हैं जिनमें दवायें, चिकित्सा सामग्री आदि देश भर में पहुंचायी जा रही हैं। रेलवे को हुए वित्तीय नुकसान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि रेलवे ने इस दौरान गत वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत माल ढुलाई की है और यात्री परिवहन एक तरह से बंद ही है। चूंकि यह एक असाधारण परिस्थिति है और पूरी सरकार इससे एकजुटता से मुकाबला कर रही है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की लागत का 85 प्रतिशत सरकार वहन कर रही है और 15 प्रतिशत भाग किराये के रूप में राज्यों से लिया जा रहा है।

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