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पंजाब आंदोलन : 2225 मालगाडिय़ां और 1350 यात्री ट्रेनें हुई प्रभावित

रेल समाचार

पंजाब आंदोलन : 2225 मालगाडिय़ां और 1350 यात्री ट्रेनें हुई प्रभावित

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–रेलवे का दावा, रेलवे को 1200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
–पंजाब में 32 स्थानों पर रेलवे परिसरों और पटरियों पर धरना आज भी जारी

नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : पंजाब में रेल पटरियों को बाधित किये जाने से माल भाड़ा ढुलाई गतिविधियां ठप हो गई हैं, जिसके चलते भारतीय रेलवे को भारी नुकसान हो रहा है। अभी तक आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाली 2225 से अधिक माल गाडिय़ों का संचालन नहीं हुआ। इससे होने वाला नुकसान 1200 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्लेटफॉर्मों और रेल पटरियों के नजदीक अपना धरना जारी रखे हुए हैं। इसकी वजह से संचालनात्मक और सुरक्षा कारणों को लेकर ट्रेनों की आवाजाही एक बार फिर कैंसिल कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों के जान्दियाला, नाभा, तलवंडी, साबू और भटिण्डा में अचानक पटरियों को रोके जाने से ट्रेनों की आवाजाही संचालन और सुरक्षा कारणों की वजह से रोकी गई। आज सुबह 6 बजे तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन कुल 32 स्थानों पर जारी था। रेल मंत्रालय ने पटरियों की सुरक्षा तथा रेलवे गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के मद्देनजर स्टाफ की सुरक्षा को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री को 26 अक्टूबर को पत्र लिखा था। पंजाब में कई स्थानों पर रेल पटरियों को लगातार बाधित किए जाने की वजह से कई स्थानों पर से मालभाड़ा गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पडऩे से खेती, उद्योग और आधारभूत ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर असर पड़ा है।
इसके चलते पंजाब से गुजरने वाली सभी यात्री रेलगाड़ी पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। आज तक 1350 से अधिक यात्री ट्रेनों को कैंसिल किया गया। मार्ग परिवर्तन करने या कुछ समय तक इन्हें बंद करने से कोविड महामारी के समय यात्रियों को गम्भीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब, जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं को लाने और लेजाने वाली सभी रेलगाडिय़ों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

मालभाड़ा ढुलाई रेल गाडिय़ां और भरी हुई रेल गाडिय़ां 15 से 20 दिनों से फंसी

रेल मंत्रालय के प्रवक्ता की माने तो आंदोलन की वजह से काफी संख्या में मालभाड़ा ढुलाई रेल गाडिय़ां और भरी हुई रेल गाडिय़ां 15 से 20 दिनों से फंसी हुई हैं। व्यापार में हुए नुकसान के बाद अनेक माल भाड़ा उपभोक्ता आवश्यक वस्तुओं को भेजने अन्य विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। पंजाब से आवश्यक वस्तुओं को लेकर बाहर जाने वाली रेल गाडिय़ों पर भी इसका असर पड़ा है। इसकी वजह से खाद्यानों, कन्टेनर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट, पेटकोक और उर्वरकों की लोडिंग पर पंजाब में औसतन 40 रैक प्रतिदिन का नुकसान हुआ है। पंजाब में आने वाला यातायात भी इसकी वजह से प्रभावित हुआ है और आंदोलन के कारण कंटेनर, सीमेंट, जिप्सन, उर्वरक राज्य में महत्वपूर्ण स्थानोंपर पहुंच नहीं पा रहे हैं और यह प्रतिदिन 30 रैक का औसतन नुकसान है।

24 सितम्बर से बाधित है रेल पटरियां, 1 अक्टूबर से पूरे पंजाब में व्यवधान

पंजाब क्षेत्र में किसानों ने 24 सितंबर को रेल पटरियों और स्टेशनों को बाधित करना शुरू किया था। 1 अक्टूबर के बाद यह आंदोलन पूरे पंजाब में फैल गया। इसकी वजह से पंजाब के फिरोजपुर डिविजन में सम्पूर्ण रेलगाड़ी संचालन प्रभावित हुआ और अम्बाला, दिल्ली तथा बीकानेर डिविजन में इसका आंशिक तौर पर असर हुआ। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने 22 अक्टूबर से मालगाडिय़ों की सशर्त आवाजाही को अनुमति दी, लेकिन इसके 2 दिन बाद संचालन और सुरक्षा कारणों से इसे फिर रद्द करना पड़ा क्योंकि अमृतसर, नाभा, फिरोजपुर मोगा, जान्दिया और भटिण्डा में अनेक स्थानों पर रेल पटरियों को बाधित कर दिया गया था। रेल पटरियों को अनेक स्थानों पर अभी भी बाधित किया जाना जारी है और अगर प्रदर्शनकारी नियंत्रण में नहीं रहते हैं तो ऐसे में रेलगाडिय़ों को चलाना काफी जोखिम भरा है।

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