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यात्री ट्रेनें बंद, यात्रियों की समस्याएं निपटा रहा है कंट्रोल रूम

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यात्री ट्रेनें बंद, यात्रियों की समस्याएं निपटा रहा है कंट्रोल रूम

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–रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया आधुनिक सेंटर
–24 घंटे बज रही हैं घंटियां, हर भाषा में मिल रहा जवाब
–रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139,138 चौबीस घंटे कर रही है काम
-लॉकडाउन के पहले दस दिनों में 1.25 लाख से अधिक सवालों का दिए जवाब

नई दिल्ली / टीम डिजिटल : रेल यात्रियों तथा अन्य नागरिकों की सहायता करने और माल परिवहन से संबधित मुद्दों को सुलझाने में मदद करने के लिए, भारतीय रेल ने लॉकडाउन की घोषणा के बाद एक रेल सेंट्रलाइज कंट्रोल रूम स्थापित किया है। कार्यालय के खुलने के कुछ दिनों के बाद से ही, यह सुविधा केन्द्र सफल प्रबंधन की मिसाल बन गया है। लॉकडाउन अवधि के पहले दस दिनों में इस केन्द्र के संचार प्लटेफार्म के माध्यम से 1,25,000 से अधिक सवालों का जवाब दिया। इसमें से 87 प्रतिशत (1,09,000 से अधिक) मामले फोन पर व्यक्तिगत रूप से सीधे बातचीत कर निबटाए गए।
भारतीय रेल का यह नियंत्रण कार्यालय,हेल्पलाइन नंबर- 139, 138, सोशल मीडिया (ईएसपी ट्विटर) और ईमेल जैसे चार संचार और प्रतिक्रिया प्लेटफार्मों- की चौबीस घंटे निगरानी कर रहा है। यह लॉकडाउन के दौरान रेलवे प्रशासन और आम जनता के बीच सूचना और सुझावों के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए है।
इसकी निगरानी के लिए निदेशक स्तर के अधिकारियों को लगाया गया है। ये अधिकारी सोशल मीडिया और ईमेल पर लोगों द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं और उनके सुझावों पर नजर रख रहे हैं। साथ ही यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान रेलवे ग्राहकों को होने वाली किसी तरह की परेशानी विशेषकर माल परिवहन सें संबधित कठिनाइयों को दूर करने के लिए उचित कार्रवाई हो। एडीआरएम के स्तर के फील्ड अधिकारी इस टीम के एक भाग के रूप में मंडल स्तर पर सारे काम काज की निगरानी कर रहे हैं।

रेल मदद हेल्पलाइन नंबर 139 पर लॉकडाउन के पहले 10 दिनों में 80,000 से अधिक सवालों के उत्तर दिए गए जो आईवीआरएस सुविधा पर दिए गए जवाबों के अतिरिक्त थे। इनमें से ज्यादातर सवाल ट्रेन सेवाएं शुरु होने और टिकट वापसी के नियमों में दी गई ढील से संबधित थे। दूसरी ओर सोशल मीडियामें, भारतीय रेल की ओर से इस कठिन दौर में किए जा रहे प्रयासों की सराहना से जुडे संदेशों की भरमार रही।

रेलवे  अपनी पूरी ताकत लगा दी

कोविड-19 से निबटने के लिए रेल द्वारा माल गाडिय़ों को पूरी क्षमता के साथ चलाने, आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई, वैगनों से माल उतारने में देरी पर लगने वाले जुर्माने से छूट, यात्री रेलगाडी के डिब्बों को अस्पताल के वार्डों के रूप में परिवर्तित करने, भोजन के पैकेटों का वितरण तथा पीपीई, सैनिटाइजर और अन्य उपकरण तैयार करने जैसे कामों को खास तौर से सराहा गया। भारतीय रेल ने मौजूदा संकट की घड़ी में सामान्य यात्रियों और वाणिज्यिक ग्राहकों की सुविधाओं को ध्यान में रखने तथा माल परिवहन की राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

हेल्पलाइन 138 पर कैसे देते हैं तुरंत जवाब

हेल्पलाइन 138 पर प्राप्त कॉल जियो-नेटवर्क के साथ टैग की गई है। यदि कोई कॉल इस नंबर पर निकटतम रेलवे डिविजनल कंट्रोल ऑफिस पर आती है तो वहां तैनात रेल कर्मी, जो कि स्थानीय भाषा से अच्छी तरह से वाकिफ हैं सवाल का जवाब उसी भाषा में देते हैं। जवाब देने वाला रेल कर्मी यह सुनिश्चित करता है कि जिस भाषा में सवाल किया गया है उसका जवाब भी उसी भाषा में दिया जाए।यह सुविधा रेलवे के ग्राहकों के लिए सूचनाओं के प्रवाह को तेज बनाती है।

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