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रेल मंत्रालय ने 22 अफसरों, 10 कर्मचारियों को नौकरी से किया बाहर

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रेल मंत्रालय ने 22 अफसरों, 10 कर्मचारियों को नौकरी से किया बाहर

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रेल मंत्रालय ने 22 अफसरों, 10 कर्मचारियों को नौकरी से किया बाहर
–देशभर में रेलवे के 55 से अधिक अधिकारियों पर लटकी तलवार
–भारतीय रेलवे में पहली बार हुई इतनी बड़ी कार्रवाई, हड़कंप

(Khushboo Pandey)

नई दिल्ली,: रेल मंत्रालय ने पहली बार बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने 22 वरिष्ठ अधिकारियों (निदेशक एवं उससे बड़े) को जबरन रिटायर कर दिया है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड सेके्रटरी सर्विस सेवा (तीन कैटेगरी) के 10 कर्मचारियों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ये सभी अधिकारी कार्य मूल्यांकन की कसौटी पर खरे नहीं उतरने और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए थे। साथ ही इन पर जिम्मेदारी वाले पदों पर रहते हुए गैरजिम्मेदाराना काम का दोषी पाया गया है।
यह अभियान देशभर में जारी रहेगा और आने वाले समय में 55 से अधिक निदेशक स्तर के अधिकारी जल्द ही जबरन रिटायर किए जाने वाले हैं। उनका भी रिव्यू हो रहा है। इससे पहले रेलवे बोर्ड ने 2016-17 में अपने चार वरिष्ठ अधिकारियों को स्थाई रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था।


सूत्रों के मुताबिक जबरन रिटायर किए गए 22 वरिष्ठ अधिकारियों ने कभी रेलवे बोर्ड में नौकरी ही नहीं की थी। ये सभी लोग विभिन्न मंत्रालय एवं राज्य सरकारों में प्रतिनियुक्ति पर काम करते रहे और अपनी मूल सर्विस को तवज्जो नहीं दी। भारतीय रेलवे आम तौर पर इस तरह के फैसले नहीं करता है। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की पहल पर उसे यह फैसला लेना पड़ा है। पीएमओ ने भी देशभर के उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने को कह दिया है, जो भ्रष्टाचार, नॉन परफॉर्मेंस, कर्तव्य विमुखता, ईमानदारी में संदेश, अकर्मण्यता में पाये जाते हैँ, उन्हें जबरन रिटायर कर देना चाहिए। भारतीय रेलवे ने भी अपने 22 अफसरों एवं 10 कर्मचारियों को हटाने के लिए यही आधार बनाया है।
रेलवे मंत्रालय का कहना है कि यह असामान्य कदम जनता के फायदे को देखते हुए उठाया गया है। इन अधिकारियों की उम्र 50 साल से ज्यादा है। रेलवे के बयान के मुताबिक काम को लेकर असक्षमता, संदिग्ध गुटबाजी और अच्छा रेलवे सेवक न होने की वजह से यह कड़ा फैसला किया गया।

अधिकारियों की कारगुजारी की भी पड़ताल

सूत्रों की माने तो नौकरी काल में इन अधिकारियों की कारगुजारी की भी पड़ताल की गई, जिसमें पाया गया कि बड़े पदों पर बैठे ये लोग जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से सभी मंत्रालयों को लापरवाह अधिकारियों की पड़ताल करने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें सबसे पहली कार्रवाई रेलवे में की गई है। सूत्र बताते हैं कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के नियमों के अनुसार सरकार को रेलवे में असंतोषजनक कार्यप्रदर्शन, अकुशलता अथवा कदाचार के आधार पर निदेशक रैंक से ऊपर के अधिकारियों को 50 वर्ष की सेवा के बाद, जबकि उससे नीचे रैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों को 55 वर्ष की सेवा के बाद जबरन रिटायर करने का अधिकार है। इससे पहले 2016-17 में रेलवे में इस तरह से चार अफसर समय से पहले रिटायर किए गए थे। उस समय 1824 अधिकारियों के काम की समीक्षा की गई थी।

18 रेलवे जोन एवं उत्पादन ईकाइयों का भी रिब्यू

सूत्रों के मुताबिक भारतीय रेलवे में रेलवे बोर्ड के अलावा देशभर में 18 जोन (क्षेत्रीय कार्यालय) एवं 7 यूनिट (डिब्बा-इंज-ट्रेन बनाने वाली फैक्ट्रियां) हैं। इन सभी जगहों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों का रिब्यू किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो अब तक जो रिब्यू हो पाया है उसके हिसाब से 55 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं। लिहाजा, इनपर गाज गिरना तय है।

1410 अधिकारियों एवं 370 कर्मचारी थे संदिग्ध

रेलवे बोर्ड ने 1410 अधिकारियों के कार्यप्रदर्शन को कमतर पाया और उनमें सबसे खराब प्रदर्शन वाले 22 अधिकारियों को समय से पहले रिटायर करने का फैसला किया है। इसके अलावा इससे निचले ग्रेड तथा ग्रुप सी व डी के 370 अफसरों व कर्मचारियों की पहचान कर उनमें से 10 को जबरन रिटायर करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के मुताबिक इन अधिकारियों को इंडियन रेलवे एस्टेब्लिशमेंट कोड के नियम संख्या 1802 के तहत हटाया गया है। इस कानून के तहत रेलवे जनहित में उन अधिकारियों को रिटायर कर सकती है, जो 50 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने से पहले इन्हें नोटिस दिया गया था। जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है वे सभी अलग-अलग जोन से हैं। बताया जाता है कि पिछले तीन माह से सभी जगहों पर तैनात अधिकारियों के काम का आंकलन किया जा रहा था।

इन अफसरों पर गिरी गाज

अशोक कुमार (आईआरएएस)
जी. सेट्टी (आईआरपीएस-ईसीओआर)
एम. के. सिंह (आईआरटीएस -एनईआर)
आर. पी. मीना (आईआरटीएस-एनडब्ल्यूआर)
पी. सी. डूडी (आईआरटीएस- एनआर)
बी. सी. मीना (आईआरएसई -एनडब्ल्यूआर)
अनिल कुमार (आईआरएसई- एसईसीआर)
आर. के. मीणा (आईआरएसई -डब्ल्यूआर)
बी. गोपाल रेड्डी (आईआरएसई -एसडब्ल्यूआर)
के. वेंकटेश राव (आईआरएसई -डब्ल्यूसीआर)
वी. एस. रिजवी (आईआरएसई -डब्ल्यूआर)
वी. समाजधर (आईआरएसईई -ईआर)
एस. के. जेना (आईआरएसईई -ईसीआर)
के. मुखर्जी (आईआरएसईई -ईआर)
विजय सिंह मीणा (आईआरएसए -एनडब्ल्यूआर)
आर. ए. मीणा (एसएजी) आईआरएसएस सीआर
एल. एस. टॉपर (आईआरएसएस-ईसीआर)
राकेश (आईआरएसएस- कपूरथला)
एस. मंडल (आईआरएसएमई -एसईआर)
संजय पोद्दार (आईआरएसएमई -सीआर)
सी.पी. शर्मा (आईआरएसएमई -ईआर)

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