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शिवसेना की फ्रंट फाइट पर भाजपा का ‘ वीनिंग शॉट ‘

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शिवसेना की फ्रंट फाइट पर भाजपा का ‘ वीनिंग शॉट ‘

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शिवसेना की फ्रंट फाइट पर भाजपा का ‘ वीनिंग शॉट ‘
-विपक्षी दलों की गैर तैयारी और सांमजस्य नहीं बन पाया
–भाजपा ने पूरी तैयारी और योजनाबद्व तरीके से पूरे एपीसोड को खेला
–शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर फ्रंट पर फाइट में अड़ी रही

(नीता बुधौलिया)

नई दिल्ली, : महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर एक महीने से चल रही सियासी उठापठक, विपक्षी दलों की आपस में सभी मुद्दों पर सहमति न बन पाने और गुणा गणित के बीच भारतीय जनता पार्टी ने सभी को चौकाते हुए प्रदेश में सरकार बना ली। पूरा देश जब गहरी नींद में सोया था, उसी बीच भाजपा के चाणक्यों ने बड़ा सियासी दांव खेलते हुए पूरा राजनीतिक पांसा ही पलट दिया। भाजपा ने एनसीपी के अजीत पंवार गुट को साथ लेकर शनिवार को तड़के सरकार बना ली।

इसके साथ ही महाराष्ट्र में करीब 29 दिनों तक चले राजनीतिक एपीसोड भी खत्म हो गया। इस बीच सभी दल शिवसेना, कांग्रेस एवं एनसीपी का रुख लगातार बदलता रहा। नतीजे घोषित होने के बाद से ही शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर फ्रंट पर फाइट में आ गई। इसके चलते भाजपा के साथ उनका वर्षेां पुराना गठबंधन भी टूट गया।

 

शिवसेना ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पर पहले दिन से अड़ी रही। भाजपा से रिश्ता टूटने के बाद शिवसेना विपक्षी दलों को साथ लेकर सरकार बनाने के लिए आगे बढ़ी। उसकी यह फाइट 22 नवम्बर की शाम जीत में बदलती दिखाई दी, मगर 22 की आधी रात के बाद पूरा खेल ही बदल गया। सुबह जब नींद खुली तो भाजपा सत्ता पर काबिज हो चुकी थी। इस पूरे एपीसोड में भाजपा पूरी तैयारी ओर योजना बद्व तरीके से काम करती हुई दिखी। उसने इस 24 दिनों में उसे अपनी योजना को अंजाम तक पहुंचाने का पूरा मौका मिला और एनसीपी की कमजोर कड़ी पहचानने का भी अवसर मिला। जिसका फायदा लेते हुए उसने आज सरकार बना ली।

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अड़ी रही शिवसेना

महाराष्ट्र में सरकार को लेकर एक महीने तक रस्साकशी जारी रहा। भाजपा और शिवसेना अपने अपने रुख पर अड़ी रही। दोनों दल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अड़ी रही, नतीजन भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट गया। शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर अपने स्टैंड पर पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक कायम रही। शिवसेना सत्ता के बंटवारे में ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की बात भी रखी थी और दावा किया था कि बीजेपी को हर हाल में माननी होगी
भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र की सरकार में शिवसेना को डिप्टी सीएम का पद देने को तैयार थी, लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अडिग थी। भाजपा से रिश्ता टूटने के बाद कांग्रेस और एनसीपी को साथ लेकर सरकार बनाने का मसौदा तैयार हुआ, उसमें भी शिवसेना अध्यक्ष उद्वव ठाकरे मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पास रखने का फार्मला दे दिया। शुक्रवार की शाम इस फार्मूले पर तीनों दलों की सहमति भी बन गई और शनिवार को सुबह संयुक्त रूप से इसका खुलासा भी होना था। लेकिन इससे पहले भाजपा ने पूरा खेल ही बिगाड़ दिया।

किंगमेकर की भूमिका में रही एनसीपी, बदलता रहा स्टैंड

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी-शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर टूटे गठबंधन के बाद से ही एनसीपी की अहम भूमिका नजर आने लगी थी। महाराष्ट्र की सत्ता की चाबी एनसीपी के हाथों में नजर आ रही थी, जो आज साबित भी हो गई। रिजल्ट आने के बाद बदले सियासी खेल के बीच ऐसा कहा जा रहा था कि शरद पवार बीजेपी या शिवसेना में जिसके साथ खड़े हो जाएं, सत्ता का सिंहासन उसका है। बावजूद इसके शरद पवार ने विपक्ष में बैठने का फैसला करके शिवसेना के अरमानों पर पानी फेर दिया था। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने यह भी ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी के सामने महाराष्ट्र में सरकार गठन करने का विकल्प नहीं है, लिहाजा वे जनादेश के मुताबिक विपक्ष में बैठेंगे। शिवसेना का समर्थन करने के सवाल पर पवार ने कहा था कि हमारे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। लोगों ने हमें विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है। हम जनादेश को स्वीकार करते हैं। शरद पवार के साथ-साथ एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने भी साफ किया कि था कि वह शिवसेना के साथ जाने के बजाय विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। लेकिन, बाद में कांग्रेस की पहल करने पर एनसीपी शिवसेना के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने को तैयार हुई। इन सबके बीच पूरा एक महीना गुजर गया।

कांग्रेस ने शुरू से नहीं खोले थे पत्ते

महाराष्ट्र में चौथे नंबर पर रही कांग्रेस पार्टी शुरू से ही सरकार बनाने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थी। इसलिए उसके खोने या पाने का बहुत ज्यादा मतलब नहीं है। लेकिन अगर वहां गैर भाजपा सरकार बनती है तो बिना कांग्रेस के संभव भी नहीं था। इसलिए कांग्रेस अपने गठबंधन साथी एनसीपी के कहने पर सरकार बनाने को आगे बढ़ी थी। हालांकि, शिवसेना के हिंदुत्व, वीर सावरकर, राम मंदिर, और पूर्वांचल विरोध जैसे मुद्दों को लेकर शुरुआत से ही हिचकिचाहट में रही। जिसको लेकर लगातार बातचीत और कामन मिनिमम प्रोग्राम पर जोर रहा। कई दौर की बैठकों के बाद शुक्रवार को लगभग सभी मुद़दों पर सहमति भी बन गई थी। कुछेक मुददे रह गए थे, जिनपर और बिस्तार से चर्चा की जरूरत महसूस की गई थी और शनिवार को तीनों दलों की साढे 12 बजे एक बार फिर से बैठक बुलाई गई थी। माना गया था कि इस बैठक के बाद तीनों दलों की ओर से सरकार बनाने का ऐलान और राज्यपाल के समक्ष दावा पेश करने का कदम उठाया जाएगा। इसके पहले ही सुबह जब अजीत पवार के साथ मिलकर भाजपा की सरकार का शपथ ग्रहण हो गया तो लगभग कांग्रेस पूरी तरह से खुद को अलग करके किनारे हो गई है। अब वो एनसीपी और शिवसेना के अगले कदमों का इंतजार करेगी। शनिवार को देवेंद्र फड़णवीस की सरकार बन जाने के बाद कांग्रेस की ओर से अहमद पटेल ने बीजेपी पर हमला बोला। साथ ही कहा, सरकार बनाने में हमने नहीं, बल्कि एनसीपी ने देरी की। अहमद पटेल ने कहा कि आज शरद पवार के घर पर 12.30 बजे मिलना था। एनसीपी की ओर से कमी रही। हम पर लगे देरी करने के सारे आरोप बेबुनियाद है। सरकार बनाने में हमारी तरफ से 1 सेकेंड की देरी नहीं हुई है।

288 सीट वाले विधानसभा में 105 सीट पर है भाजपा

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित किए जाने के बाद फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले थे, लेकिन सहयोगी दल शिवसेना ने उनकी मंशाओं पर पानी फेर दिया। 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 164 सीटों पर चुनाव लड़कर 105 पर जीत दर्ज की वहीं शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की लेकिन शिवसेना द्वारा मुख्यमंत्री पद आधे- आधे समय के लिए बांटे जाने की मांग पर अडऩे के कारण गठबंधन टूट गया। विधानसभा चुनावों में राकांपा को 54 और कांग्रेस को 44 सीट हासिल हुई। मनसे 1 सीट और अन्यों के खाते में 28 सीट गई है। बहुमत के लिए कुल 145 सीट चाहिए था।

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