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यात्री कृपया ध्यान दें, जल्द बढऩे वाला है रेल किराया

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यात्री कृपया ध्यान दें, जल्द बढऩे वाला है रेल किराया

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यात्री कृपया ध्यान दें, जल्द बढऩे वाला है रेल किराया
-वातानुकूलित श्रेणी सहित सभी श्रेणी के टिकटों पर 10 से 20 फीसदी बढ़ोतरी की तैयारी

–उपनगरीय मासिक-त्रैमासिक सीजन टिकटों के किरायों में भी होगी बढ़ोतरी
–बढ़ोतरी से खजाने में प्रतिवर्ष 4 से 5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी

(खुशबू पाण्डेय)

नई दिल्ली  :  यात्री कृपया ध्यान दें…भारतीय रेलवे की ट्रेनों में सफर करना अब और महंगा होने वाला है। लिहाजा, अब महंगी यात्रा के लिए तैयार हो जाएं। सबकुछ ठीक रहा है भारतीय रेलवे बहुत जल्द रेलवे का किराया बढ़ा देगा। ये बढ़ोत्तरी वातानुकूलित श्रेणी से लेकर अनारक्षित एवं उपनगरीय मासिक-त्रैमासिक सीजन टिकटों के किरायों तक सभी श्रेणियों पर होने जा रही है। जानकारों की माने तो रेल किरायों की यह बढ़ोतरी दस से लेकर 20 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यात्री किरायों में वृद्धि से रेलवे के खजाने में प्रतिवर्ष चार से पांच हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो जाएगी। इन उपायों से रेलवे का परिचालन अनुपात भी सुधर जाएगा।
रेलवे सूत्रों की माने तो संसदीय समितियों की सिफारिशों एवं परिचालन अनुपात पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेल मंत्रालय को आखिरकार अपने आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

रेलवे बोर्ड ने नई दरों का खाका तैयार कर लिया है और प्रधानमंत्री कार्यालय से उसे इसके लिए हरी झंडी भी मिल गयी है। सूत्रों की माने तो रेलवे बोर्ड को झारखंड विधानसभा के चुनाव संपन्न होने तक प्रतीक्षा करने को कहा गया था। लिहाजा, सोमवार को मतगणना होने के बाद नये किराया दर की कभी भी घोषणा हो सकती है। हालांकि, जहां का इंतजार हो रहा था, वहां भाजपा की सरकार हार गई है।

यात्री किराये को तर्कसंगत बनाया जाए

बता दें कि हाल ही में संसद में पेश रेलवे पर संसदीय स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि यात्री किराये को तर्कसंगत बनाया जाए। लेकिन, राजनीतिक कारणों से रेलवे बोर्ड किराया बढ़ाने को लेकर कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। जबकि रेलवे का खर्च चाहे वह डीजल हो या बिजली सब कुछ बढ़ चुका है। लगातार खर्च बढऩे से रेलवे का परिचालन अनुपात भी लगातार बढ़ता जा रहा है। संसदीय समिति की रिपोर्ट ने रेल किरायों में विभिन्न वर्गों को मिलने वाली रियायतों के दुरुपयोग के कारण भी राजस्व के बड़े नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष रेलवे का परिचालन अनुपात 98.4 प्रतिशत से अधिक हो गया है जो अब तक का सर्वाधिक है।

पाँच पैसा प्रति किमी से लेकर 40 पैसा प्रति किमी तक रहने की संभावना

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो रेलवे बोर्ड ने कई पहलुओं पर विचार करने के बाद प्रयास किया है कि किराया वृद्धि का किसी एक यात्री सेगमेंट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़े और बढ़ोत्तरी संतुलित एवं एकसमान हो। अधिकारी का कहना है कि रेलवे बोर्ड ने किराया दरों के निर्धारण के लिए बहुत विचार मंथन किया है। इसके लिए उपनगरीय ट्रेन और मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित और शयनयान एवं वातानुकूलित श्रेणियों के आरक्षित टिकटों के किराये में समान रूप से इस वृद्धि करने का प्रस्ताव किया गया है। यह बढ़ोतरी पाँच पैसा प्रति किलोमीटर से लेकर 40 पैसा प्रति किलोमीटर तक के बीच रहने की संभावना है।

रेलवे ने कई वर्षों में सीधे तौर पर नहीं बढ़ाया यात्री किराया

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो बीते कुछ वर्षों के दौरान रेलवे ने सीधे तौर पर यात्री किराया में न किसी तरह की वृद्धि नहीं की है, जिससे उसकी आर्थिक सेहत दुरुस्त रह सके। बीते वर्षों के दौरान रिफंड नियमों में बदलाव, फ्लेक्सी फेयर और पाँच से 12 वर्ष आयु के बच्चों की बर्थ देने एवज में पूरा किराया लेने के उपाय कर कुछ भरपाई करने की कोशिश की गई। लेकिन यह रेलवे की आर्थिक स्थिति में पर्याप्त सुधार लाने में नाकाम रहा। लिहाजा अब रेलवे के पास परिचालन अनुपात को संतुलित रखने के लिए यात्री किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया।

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