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रेलवे ग्रुप D भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थी मनाएंगे काला दिवस… जाने कैसे

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रेलवे ग्रुप D भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थी मनाएंगे काला दिवस… जाने कैसे

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रेलवे ग्रुप D भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थी मनाएंगे काला दिवस 
—एक हफ्ते से दिल्ली के मण्डी हाउस पर प्रदर्शन कर रहे दिव्यांग अभ्यर्थी
—मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस को काला दिवस के रूप में मनाएंगे

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे द्वारा 2018 में ग्रुप D की मेगा भर्ती निकाली गयी थी, जिसको लेकर मंत्री नेता हर जगह अपनी वाहवाही लूटते रहे हैं। लेकिन उसी मेगा भर्ती में हुई अनियमितताओं के ख़िलाफ़ दिल्ली के मण्डी हाउस पर प्रदर्शन चल रहा है। भर्ती परीक्षा देने वाले दिव्यांग अभ्यर्थी पिछले एक सप्ताह से खुले आसमान के नीचे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अब तक जाने सरकार का कोई नुमाइंदा हाल पूछने तक नहीं आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नया नामकरण करते हुए दिव्यांग तो कह दिया, लेकिन दिल्ली के बीचोबीच मंडी हाउस से न्याय की गुहार लगा रहे इन अभ्यर्थियों की सुनने की फुर्सत उनकी सरकार के पास नहीं।

वायु प्रदूषण के कारण गैस चैंबर बन चुके दिल्ली में अलग अलग राज्यों से रेलवे ग्रुप D के विकलांग उम्मीदवार राजधानी में प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के मंडी हाउस सर्किल पर प्रदर्शन कर रहे हैं यह जानते हुए कि ट्रैफिक रेड लाइट के पास सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है। क्यूंकि प्रदूषण या स्वास्थ से ज्यादा अब इन्हें नौकरी की चिंता है। रात को जब पूरी दिल्ली सो रही थी तो यह लोग इस सर्किल में बैठकर अपने भविष्य के बारे में सोच रहे थे।

 

पिछले अक्टूबर में जब अभ्यर्थियों ने आवाज़ उठाई थी तो रेलवे बोर्ड ने 14 दिनों में समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब एक महीने से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी रेलवे की तरफ से कोई हलचल नहीं है। अब तो प्रदर्शन के बावजूद इन दिव्यांगजनों की सुध लेना भी बंद कर दिया सरकार ने।

रिवाइज़्ड नतीजों में दिव्यांगजनों का नाम गायब था

परीक्षा दिए विकलांग उम्मीदवारों का कहना है 2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप डी की लिखित परीक्षा में यह लोग पास हो गए थे। लिखित परीक्षा के रिजल्ट जब आये तब कट ऑफ मार्क नहीं दिखाया गया। जो लोग लिखित परीक्षा में पास हुए थे उन्हें कहा गया था कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा। छात्र डाक्यूमेंट बनवाने में जुट गए। लेकिन कुछ दिन के बाद रेलवे ने सीटों की संख्या बढ़ाकर दुबारा नतीजे निकाल दिए। इस रिवाइज़्ड नतीजों में इन दिव्यांगजनों का नाम गायब था। जिन्होंने शुरू में प्रदर्शन किया पहले तो उन्हें लिखित में पास कर दिया गया फिर बिना कारण बताए फेल भी कर दिया गया। इनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं हुआ लेकिन बाद में इन्हें बताया गया कि डॉक्यूमेंट वेरिकेशन के बाद यह लोग फेल हैं और इनका चयन नहीं हुआ है। उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाए कि विकलांगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से सीट नहीं दिया गया है। सीट बढ़ाने के साथ कई नई कैटेगरी भी जोड़े गए हैं जिस में मल्टीप्ल डिसेबल्ड भी एक कैटेगरी होता है। छात्रों का कहना है जब एग्जाम के फॉर्म भरे गए थे तब सिर्फ 7 कैटगरी की बात कही गई थी लेकिन सीट बढ़ाने के साथ साथ और 14 कैटोगरी जोड़ दिया गया यानी कुल-मिलाकर कैटगरी 21 हो गए।

रिवाइज नोटिस निकाला तो सीट को लेकर कई परिवर्तन थे

रेलवे में जब रिवाइज नोटिस निकाला तो उस में सीट को लेकर कई परिवर्तन भी थे। जैसे अहमदाबाद बोर्ड में ओ एल, यानी वन लेग एक पांव वाली श्रेणी में जो 95 सीटें थीं वहां घटाकर 61 कर दिया गया। ज़्यादातर उम्मीदवारों ने अहमदाबाद बोर्ड का विकल्प भरा था क्योंकि वहां पर 95 सीटें थीं। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि आवेदन के समय मल्टीप्ल डिसेबल्ड कैटोगरी के तहत बोथ लेग और बोथ हेड का विकल्प नहीं था लेकिन रेलवे बोर्ड MD सीट बढ़ाकर उसका रिजल्ट कैसे दिखाया है। जब इस कैटोगरी के तहत सीट नहीं था तो जाहिर सी बात है कैंडिडेट उस कैटोगरी के तहत फॉर्म ही नहीं भरे होंगे तो फिर रिजल्ट में किन अभ्यर्थियों को लिया गया है।

हमें विकलांग कह लीजिए लेकिन हमारा अवसर तो ना छीनिये

परीक्षा दिए विकलांग उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया कि नोटिफिकेशन के दौरान कई राज्य बोर्ड में सीट ही खाली नहीं थी जिस के वजह से उम्मीदवारों ने उस बोर्ड में फॉर्म ही नहीं भरा था। लेकिन जब सीट बढ़ाया गया तो जिस बोर्ड में सीट खाली नहीं थी वहां भी सीट बढ़ा दिया गया। जब कैंडिडेट्स ने उस बोर्ड में फॉर्म ही नहीं भरा है तो सीटों की संख्या बढ़ाने से फायदा किसको होगा? नौकरी किसको दिया जा रहा है? उम्मीदवारों का यह भी कहना है बोर्ड परिवर्तन करने का विकल्प भी नहीं दिया गया था। इस तरह कई आरोप लेकर दिव्यांग अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं।

अभ्यर्थी मनीष कुमार ने सवाल किया कि ऐसा क्या अपराध किया है हमने जो रेलवे के लिए चयनित होने के बावजूद निकाल दिया गया। भले ही हमें विकलांग कह लीजिए लेकिन हमारा अवसर तो ना छीनिये। क्या नामकरण कर देने मात्र से न्याय हो जाता है अगर हमें रोज़गार न दिया जाए।

सरकार का कोई नुमाइंदा अब तक इनकी सुध लेने नहीं आया

युवा हल्लाबोल के रजत यादव ने बताया कि रेलवे भर्ती के दिव्यांग उम्मीदवार पिछले एक सप्ताह से दिन रात मंडी हाउस पर धरना दे रहे हैं। खुले आसमान के नीचे,भारी ठंड और प्रदूषण में, सोने को चटाई तक नहीं, लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा अब तक इनकी सुध लेने नहीं आया है।

ऐसे में मंगलवार को होने वाले अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस को देश की राजधानी में प्रदर्शन कर रहे सभी विकलांग युवा काले दिवस के रूप में मनाएंगे। रजत ने मांग किया कि सरकार जल्द ही इन मांगों पर कोई कार्यवाही करे नहीं तो युवा हल्लाबोल सभी दिव्यांगजन अभ्यर्थियों के न्याय के लिए और भी व्यापक प्रदर्शन करेगा।

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