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कोविड-19 : ट्रेनें कब चलेगी, यात्री रोजाना पूछ रहे हैं सवाल

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कोविड-19 : ट्रेनें कब चलेगी, यात्री रोजाना पूछ रहे हैं सवाल

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–रोजाना 13 हजार सवालों के जवाब दे रही है भारतीय रेलवे
–रेलवे ने बनाया कोविड-19 आपातकालीन प्रकोष्ठ
–24 घंटे यात्री पूछ रहे हैं सवाल, हर भाषाओं में रेलवे दे रहा है जवाब
–यात्रियों को परेशानी न हो, 400 अधिकारी कर रहे हैं निगरानी

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली / टीम डिजिटल : कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान बंद की गई सभी यात्री ट्रेनों के संभावित यात्रियों की समस्याओं को रेलवे रोजाना सुलझा रही है। इस दौरान लाखों मुसाफिरों ने टिकटें आरक्षित करवाई थी,लिहाजा हर यात्री रेलवे से लगातार संपर्क कर रहा है। हालात यह है कि रोजाना रेलवे 13 हजार से अधिक सवालों एवं सुझावों का जवाब दे रही है। इसमें ज्यादातर यात्री ट्रेनों के फिर से शुरू होने एवं टिकटों के कैंसिलेशन को लेकर सवाल पूछ रहे हेंै। यात्री पूछ रहे हैं कि ट्रेनें कब शुरू होगी…। लोगों ने हर साल की तरह इस साल भी घूमने फिरने की सभी की तैयारियां महीनों से सुनिश्चित थी। कुछ लोग निकल भी चुके थे और कुछ निकलने वाले थे, लेकिन कोरोना ने सभी को घरों में कैद कर दिया।

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इस बीच राष्ट्रव्यापी लॉकाडाउन हो गया, लिहाजा, जो लोग घूमने फिरने निकले थे वह एक दूसरे शहरों में फंस गए। अब अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहते हैं, रेलवे की टिकटें भी उनके पास हैं, लेकिन ट्रेनें बंद है। लिहाजा अब ट्रेनों के फिर से चलने का इंतजार उनको है। यही कारण है कि अब बड़ी बेसब्री से उनकी नजरें रेलवे की हेल्पलाइन नंबरों पर आकर टिक जाती हैं। बता दें कि लॉकडाउन अभी 3 मई तक है। लेकिन, इसके आगे बढऩे की संभावना प्रबल हो गई है।

भारतीय रेलवे की रोजाना करीब 13 हजार से अधिक यात्री ट्रेनें देशभर में दौड़ती थी। वर्तमान में सिर्फ मालगाडिय़ों को आवश्यक वस्तुओं, खाद्य सामग्रियों को ढोने के लिए चलाया जा रहा है। आजादी के बाद यह पहला मौका होगा, जब यात्री ट्रेनों को बंद किया गया होगा।
बता दें कि लॉकडाउन के दौरान यह महसूस किया जाने लगा था कि रेलवे के पास ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे वह लोगों की शिकायतें और सुझाव सुन सके और उन पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सके। इसे ध्यान में रखते हुए ही अलग से एक कोविड-19 आपातकालीन प्रकोष्ठ बनाया गया।

400 रेलवे अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं निगरानी

यह प्रकोष्ठ एक राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया गया, जिसमें रेलवे बोर्ड से लेकर उसके डिवीजनों तक के लगभग 400 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान, यह प्रकोष्ठ पांच संचार और प्रतिक्रिया प्लेटफार्मों – हेल्पलाइन नंबर 139 और 138, सोशल मीडिया (विशेष रूप से ट्विटर), ईमेल और सीपीग्राम के माध्यम से लगभग 13,000 प्रश्नों, अनुरोधों और सुझावों का प्रतिदिन जवाब दे रहा है। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों का सीधे तौर पर टेलीफोन पर जवाब दिया गया वो भी कॉल करने वाले व्यक्ति की स्थानीय भाषा में। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो रात दिन 24 घंटे काम करने वाले इस प्रकोष्ठ के माध्यम से भारतीय रेल जनमानस की समस्याओं को समझने के लिए जमीनी स्तर पर जुड़ी हुई है।

चार हफ्तों में 2,30,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए

रेलवे अधिकारी के मुताबिक रेल मदद हेल्पलाइन 139 पर लॉकडाउन के पहले चार हफ्तों में टेलीफोन पर सीधे संवाद के जरिए 2,30,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए गए। हेल्पलाइन नंबर 138 और 139 पर रेल सेवाओं के शुरू होने और टिकट वापसी के नियमों की जानकारी दी जा रही है।
गौरतलब है कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान, पार्सल के माध्यम से चिकित्सा आपूर्ति, चिकित्सा उपकरण और भोजन जैसी आवश्यक वस्तुओं के त्वरित परिवहन की आवश्यकता महसूस की गई,जिसपर एक बार फिर से रेलवे ने तेजी से जीवन रक्षक दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की समयबद्ध आपूर्ति के लिए पार्सल रेलगाडिय़ों की शुरुआत की।

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