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सिखों ने BJP-कांग्रेस को नकारा, AAP को दिया खुलकर वोट

दिल्ली देश

सिखों ने BJP-कांग्रेस को नकारा, AAP को दिया खुलकर वोट

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–दिल्ली में सिखों का जनादेश बदल सकता है पंजाब में तस्वीर
-भाजपा ने 4 सिखों, कांग्रेस ने 5 एवं आप ने 2 सिखों को उतारा था
–अकालियों ने भी बीजेपी से लिया खुलकर बदला, नहीं डाले वोट
–केजरीवाल के विकास रूपी एजेंडे को सिखों ने स्वीकार किया
–आप ने 2 सिखों को दिया टिकट, दोनों जीते चुनाव

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार 2 सिख विधायक विधानसभा में पहंचेंगे। जबकि, 2015 में 4 सिख विधायक बने थे। उस समय भी सिख विधायक आम आदमी पार्टी से ही जीते थे और इस बार भी दोनों विजयी सिख विधायक आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। इसमें तिलकनगर से जरनैल सिंह और चांदनी चौक से प्रहलाद सिंह साहनी हैं। खास बात यह है कि पिछले पांच साल के केजरीवाल राज में 4 सिख विधायकों के होने के बावजूद एक भी सिख को मंत्री नहीं बनाया गया था। साथ ही केजरीवाल ने 2 मौजूदा सिखों के वोट भी काट दिए थे। बावजूद इसके सिखों ने केजरीवाल पर भरोसा जताया। इसके अलावा भाजपा और कांग्रेस के सभी सिख प्रत्याशी हार गए। भाजपा ने 4 और कांग्रेस ने 5 सिख उतारे थे।

भाजपा की तरफ से खड़े चारों सिख उम्मीदवार सरदार आरपी सिंह, तेजिंदर पाल सिंह बग्गा, इंप्रीत सिंह बख्शी, सुरिंदर पाल सिंह बिटटू जीत नहीं पाए हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की तरफ से पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली, तरविंदर सिंह मारवाह, अरविंदर सिंह देवली (पूर्व मंत्री बूटा सिंह के बेटे) , अमनदीप सिंह सूदन और रमिंदर सिंह स्वीटा भी विधायक बनने में नाकामयाब रहे। कांग्रेस के इन पांच उम्मीदवारों में से 2 दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान सदस्य भी हैं।


सिख हलकों में कांग्रेस व भाजपा उम्मीदवारों के हारने का मतलब माना जा रहा है कि सिखों ने खुलकर आम आदमी पार्टी को वोट दिया है। अगर दिल्ली के सिखों की तरह पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में ऐसे ही बनी रही तो पंजाब में भी आप के सत्ता में आने का रास्ता खुल सकता है। ऐसी चर्चाएं भी शुरू हो गई है। दिल्ली के बाद पंजाब में भी कांग्रेस पार्टी को आम सिख, सिखों का कातिल मानता है, पर भाजपा के द्वारा भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ किए जाते कुप्रचार तथा हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को बल देने के कारण सिख हितों को सुरक्षित नहीं समझता है। यही वजह है कि सिखों ने खुलकर दिल्ली में इस बार आप का साथ दिया है।

दिल्ली के सिख बहुल इलाकों में वोटिंग वाले दिन ही सिखों के द्वारा आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान करने की खबर थी, जो आज साफ हो गई। हालांकि शिरोमणि अकाली दल के द्वारा इस चुनावों में टिकटें ना देने के बावजूद समर्थन देने का ऐलान किया गया था। लेकिन, जमीनी स्तर पर दिल्ली कमेटी के सदस्य एवं अकाली नेता भाजपा उम्मीदवारों के हक में प्रचार करते नजर नहीं आए। जिस वजह से माना जा रहा है कि अकाली दल ने भाजपा द्वारा अपने को टिकट ना देने का बदला आम आदमी पार्टी को वोट डालकर ले लिया है।
वहीं, नवगठित पार्टी जागो के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने भी भाजपा को समर्थन दिया था लेकिन, तिलक नगर के अलावा किसी और सिख बहुल सीट पर सिखों की भावनाओं को देखते हुए भाजपा के पक्ष में प्रचार करने के लिए खुलकर सामने नहीं आए।

आम सिखों को पसंद नहीं आया सीएए मुद्दा

सिख राजनीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा के द्वारा सीएए के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ किया गया प्रचार आम सिखों को पसंद नहीं आया। सिख खुले में ये बात भी कर रहे थे कि सीएए की आड़ में मुसलमानों के बाद भाजपा सिख हितों पर हमला कर सकती है। यही कारण रहा कि अकाली दल और जागो पार्टी भाजपा हाईककमान को हां करने के बाजवूजद सिखों को नाराज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इसके साथ ही हरिद्वार के गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी, व उड़ीसा में मंगू मठ को लेकर भाजपा के लचर रवैये पर सिखों का गुस्सा भी रहा, जो आम आदमी पार्टी को बंपर वोट दिलवा गया। बता दें कि दिल्ली में 8 से 9 लाख के करीब आम सिखों के वोट है।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का प्रचार भी नहीं बचा पाई जमानत

दिल्ली में सबसे ज्यादा सिख एवं 1984 सिख विरोधी दंगों के पीडि़त वाले तिलक नगर और राजौरी गार्डन विधानसभा में प्रचार के लिए कांग्रेस पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मैदान में उतरा था,लेकिन दोनों सीटों पर कांग्रेस के सिख उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए। तिलक नगर में कांग्रेस को महज 1000 वोट और राजौरी गार्डन में 2000 वोट मिले हैं। इससे साफ है कि भाजपा व कांग्रेस को वोट देने की बजाय सिखों ने आम आदमी पार्टी को वोट देना सिख हितों के लिए जरूरी समझा है।

पंजाब में दूसरे नंबर पर है आम आदमी पार्टी

पंजाब के 117 सीटों वाले विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की सरकार है। जबकि, 20 सीटों के साथ आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर काबिज है। सबसे पुरानी पार्टी शिरोमणि अकाली दल को 15 सीट और उसके साथ गठबंधन के तहत लड़ी भाजपा को महज 3 सीटें 2017 में मिली थी। वहीं नव गठित लोक इंसाफ पार्टी को 2 सीट मिली है। दिल्ली के ऐतिहासिक चुनाव के बाद अब आप का अगला बड़ा निशाना भी पंजाब ही होगा।

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