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जामिया यूनिवर्सिटी : कलम की बजाय छात्रों के हाथ में पत्थर कैसे

दिल्ली देश

जामिया यूनिवर्सिटी : कलम की बजाय छात्रों के हाथ में पत्थर कैसे

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-BJP ने जामिया घटना पर पूछे सवाल, कांग्रेस पर बोला हमला
कहा- जिन हाथ में पत्थर दिखाई दे रहे हैं, वे आखिर कौन हैं?
-अगर ये छात्र हैं तो नकाब क्यों पहना, पहचान क्यों छुपाई : राव

(खुशबू पाण्डेय) 
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : भारतीय जनता पार्टी ने जामिया यूनिवर्सिटी (Jamia University)  में हिंसक प्रदर्शन की आड़ में वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति करने के लिए कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को आड़े हाथों लेते हुए करारा प्रहार किया। साथ ही कहा कि कांग्रेस द्वारा लगातार अराजक तत्वों का समर्थन किया जा रहा है। कांग्रेस ऐसे तत्वों के साथ तो अपनी संवेदना जताती है लेकिन पुलिस बल के जवान जो विपरीत परिस्थितियों में भी देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी कुर्बानी देते हैं, कांग्रेस उनके खिलाफ सवाल उठाती है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा (GVL Narasimha Rao) राव ने कहा कि जामिया घटना के संदर्भ में कल ही वायरल हो रहे कुछ वीडियो पर कहा कि जामिया यूनिवर्सिटी के कुछ विडियो मीडिया में चल रहे हैं। ये सभी वीडियो दिल्ली पुलिस के पास हैं और दिल्ली पुलिस इसकी जांच करेगी। लेकिन, वीडियो में कुछ चीजें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। वीडियो में छात्र नकाब पहने हैं, साथ ही, उनके हाथों में पत्थर भी दिखाई दे रही है। जिन लोगों के हाथ में पत्थर दिखाई दे रहे हैं, वे आखिर कौन हैं? उन्होंने कहा कि अगर वे छात्र हैं तो उनके हाथों में पत्थर क्या कर रहे हैं? हमने तो आज तक सुना था कि कॉलेज में कंप्यूटर या कलम से पढ़ाई होती है तो फिर पत्थर से ये कौन सी पढ़ाई हो रही है? अगर ये छात्र हैं तो उन्होंने नकाब क्यों पहना हुआ है और अपनी पहचान छुपा रहे हैं? क्या ये जामिया के छात्र हैं या बाहर के लोग भी इसमें अराजकता फैलाने आए हैं, यह जांच का विषय है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि वैसे भी जामिया के बाहर कितना शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था कि चार बसों में आग लगा दी गई, यह हम सभी जानते हैं। ऐसे कार्य छात्र नहीं कर सकते, ये असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों का काम है, इसलिए कांग्रेस को इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।


राव ने कहा कि हमें यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) में हुए हिंसात्मक प्रदर्शनों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि हम अधिकारों का निर्धारण करेंगे लेकिन दंगे की हालातों में यह नहीं हो सकता है। आपको विरोध प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन आप छात्र हैं, इसलिए आपको हिंसा का अधिकार नहीं मिल जाता है।

राव ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है, वे हिंसा, तोडफ़ोड़ आगजनी और उपद्रव में शामिल थे और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की, अलग-अलग वीडियोज में वे लोग हिंसा में शामिल नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उस हिंसा में जामिया के सभी छात्र ही शामिल थे लेकिन जो भी लोग शामिल थे उनके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता राव ने कहा कि अगर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया तो यह देखना पुलिस का काम है और हम उम्मीद करते हैं कि पुलिस इस दिशा में भी जांच कर अपनी कार्रवाई करेगी, लेकिन यह कह देना कि किसी के खिलाफ कार्रवाई होनी ही नहीं चाहिए थी, वह गलत है। पुलिस की कोशिश थी कि हालात को सामान्य किया जाए और जो लोग भी हिंसा में शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो और उसी कड़ी में यह कार्रवाई हुई थी।

भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के पक्ष में लगातार बोलना आज कांग्रेस की नीति बन गई है। वास्तव में कांग्रेस हिंसा को राजनीतिक रंग दे रही है, इस कुकृत्य के लिए कांग्रेस को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी हिंसा करने वालों का कभी भी साथ नहीं दे सकती है।

उपद्रवियों के समर्थन में बोल रही है कांग्रेस : राव

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राव ने कहा कि राहुल गांधी ने दो दिन पहले पुलवामा में शहीद हुए जवानों के प्रति कोई संवेदना नहीं व्यक्त की, लेकिन सैनिक बलों के खिलाफ सवाल उठाए। प्रियंका वाड्रा ने भी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पूरा मामला जाने बिना पुलिस के खिलाफ आवाज उठाई और पुलिस बलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाटला हाउस में एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के लिए आंसू बहाए थे और अब प्रियंका वाड्रा भी उसी नक़्शे-कदम पर चलते हुए बिना किसी जांच-पड़ताल के हिंसा में शामिल लोगों और उपद्रवियों के समर्थन में बोल रही हैं। कांग्रेस नेताओं के ऐसे बयानों से पुलिस बलों और सैन्य बालों का मनोबल गिरता है। इसलिए कांग्रेस के नेताओं को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए और सुरक्षाबलों का सम्मान करना सीखना चाहिए।

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