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दिल्ली चुनाव में पूर्वोत्तर के वोटरों पर BJP की नजर

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दिल्ली चुनाव में पूर्वोत्तर के वोटरों पर BJP की नजर

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दिल्ली चुनाव में पूर्वोत्तर के वोटरों पर बीजेपी की नजर
–भाजपा ने गुपचुप अभियान के लिए सुनील देवधर को मैदान में उतारा
–नार्थ ईस्ट के कम्युनिटी वोट पर बीजेपी की नजरें
–पार्टी के सचिव देवधर डोर-डोर क्षेत्र के लोगों से कर रहे हैं मुलाकात
–सीएए की सच्चाई से लोगों केा रूबरू करवा रही है पार्टी
–मोदी सरकार की उपलब्धियों का डिटेल ब्यौरा भी दे रही है भाजपा

खुशबू पाण्डेय
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल:  दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) अपना चुनाव प्रचार की रफ्तार और तेज कर दी है। पार्टी ने चुनावी रैलियों और बड़ी सभाओं के अलावा क्षेत्र वाइज डोर-टू-डोर प्रचार भी शुरू किया है। इसके लिए विभिन्न राज्यों के दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा गया है। दिल्ली में पूर्वोत्तर राज्यों के वोटरों के बीच कंपेनिंग की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर को सौंपी गई है। देवधर को नार्थ ईस्ट के विभिन्न राज्यों में जमीन पर काम करने का एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।

करीब 8 साल से अधिक समय तक वह मेघालय में प्रचारक के रूप में काम करते रहे। यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें गुपचुप तरीके से बड़ी जिम्मेदारी दी है। दिल्ली में 5 लाख से अधिक पूर्र्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के लोग रहते हैं और ठीक ठाक संख्या में दिल्ली के मतदाता भी हैं। सुनील देवधर (Sunil Deodhar)  इस क्षेत्र के लोगों से जुड़े हुए भी हैं। बताते हैं कि माई होम इंडिया संस्था के जरिये पिछले कई वर्षों से देवधर दिल्ली में बसे नार्थ ईस्ट के लोगों के लिए काम करते रहे और उनका मुद्दा सरकारों के समक्ष उठाते रहे।

दिल्ली में आसाम, मणिपुर, गोवाहाटी, इंफाल, त्रिपुरा आदि राज्यों के लोग रहते हैं। कुछ नौकरी करते हैं, तो कुछ कारोबार से जुड़े हैं। सूत्रों की माने तो भाजपा ने नार्थ ईस्ट के लोगों की बस्तियों में जाकर डोर-टू-डोर मोदी सरकार की उपलब्धियां, नार्थ ईस्ट में मोदी सरकार ने क्या-क्या काम अब तक किए उनकी जानकारियां दे रहे हैं। इसके अलावा मोदी सरकार के सबसे बड़े कानून सीएए और संभावित एनआरसी को लेकर लोगों में जो दुविधा बनी है, उसको लेकर विस्तार से बताया जा रहा है।

साथ ही पिछले पांच सालों में दिल्ली एवं अन्य शहरों में पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ हो रही घटनाओं पर कमी आने की ब्यौरा भी बता रहे हैं। सूत्रोंं की माने तो भाजपा ने अपने प्रचार अभियान को विशेष रणनीति के तहत तैयार किया है। सोमवार को सुनील देवधर ने पूर्वोत्तर के लोगेां को लेकर एक बड़ी बैठक भी की है। इसमें केंद्र सरकार के एक मंत्री भी मौजूद रहे। इसमें करीब 500 नार्थ ईस्ट के लोग भी मौजूद रहे। इस अभियान को पार्टी गोपनीय तरीके से तेज कर दी है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की माने तो कई सीटों पर ये कम्युनिटी वोट जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ये जिधर मुड़ गए, क्षेत्र का सारा वोट उधर ही डल जाता है। खास बात यह भी है कि इन कम्युनिटी वोटरों को दिल्ली के मुद्दों से बहुत ज्यादा मतलब भी नहीं होता है। वैसे भी इस बार जीत-हार का अंतर भी बहुत कम होने वाला है। लिहाजा, इन वोटरों पर भाजपा गंभीरता से निगरानी रख रही है।

त्रिपुरा में कमल खिलाने के जनक रहे हैं सुनील देवधर


पूर्वोत्तर के प्रमुख राज्य त्रिपुरा में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलाने में सुनील देवधर की बड़ी भूमिका रही। वह भाजपा की ओर से त्रिपुरा के प्रभारी के रूप में कई साल तक जमीन पर काम किया और एक-एक कस्बे में जाकर बीजेपी की नींव रखी। उनकी कड़ी मेहनत की बदौलत ही त्रिपुरा में 25 साल पुरानी वामपंथी सरकार के एक युग का समापन हुआ। सुनील देवधर बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री भी हैं। त्रिपुरा में पहली बार भाजपा की सरकार बनवाने के बाद पार्टी ने उन्हें एक और अटपटे गैर भाजपाई राज्य आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में आंध्र प्रदेश के सहप्रभारी के रूप में काम कर रहे हैं। त्रिपुरा का प्रभार अभी भी उन्हीं के पास है।

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