Wednesday, 17 October 2018
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महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है दवाओं का साइड इफेक्ट्स?

महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है दवाओं का साइड इफेक्ट्स?

लंदन:  दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति महिलाएं पुरुषों से अधिक संवेदनशील क्यों होती हैं, इसका जवाब वैज्ञानिकों को मिल गया है। इसका कारण कोशिकाओं की संवेदनशीलता होती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।

 

महिलाएं खासकर जो रजोनिवृत्त हो चुकी हैं, की यकृत की कोशिकाएं दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति पुरुषों से ज्यादा संवेदनशील होती हैं। अध्ययन के मुताबिक, यह पहले से ही ज्ञात है कि यकृत को नुकसान पहुंचाने वाली दवाएं पुरुषों से अधिक महिलाओं को प्रभावित करती हैं, लेकिन पहली बार यह बात सामने आई है कि यह प्रभाव कोशिकीय स्तर पर होता है।

अध्ययन में कहा गया है, हमारे निष्कर्ष में यह बात सामने आई है कि महिलाओं की कोशिकाएं कुछ दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। अध्ययन के लिए यूरोपियन कमीशन ज्वाइंट रिसर्च सेंटर ने महिला व पुरुषों के शरीर से लिए गए यकृत कोशिकाओं पर पांच दवाओं (डाइक्लोफेनेक, क्लोरप्रोमाजीन, एसीटामिनोफेन, वेरापामिल तथा ओमेप्राजोल) का अध्ययन किया। इन दवाओं का यकृत पर दुष्प्रभाव पहले से ही ज्ञात है। अध्ययन के दौरान महिलाओं (रजोनिवृत्त) के यकृत की कोशिकाएं ज्यादा संवेदनशील पाई गईं। यह अध्ययन पत्रिका 'पीएलओएस ओएनई' में प्रकाशित हुआ है।

कुछ स्किन क्रीम में होता है पारा, गंभीर बीमारी का खतरा!

वाशिंगटन : आजकल कुछ लोग ऐसी स्किन क्रीम का इस्तेमाल करते हैं जिनमें पारा पाया जाता है। लोग इन क्रीम को चेहरे पर लगाते हैं या इंजेक्शन से त्वचा के अंदर भी पहुंचाते हैं ताकि अपनी त्वचा को गोरा बना सकें। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि पारा युक्त क्रीम के प्रयोग से गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब लोग पारायुक्त क्रीमों की पहले से कहीं अधिक तेजी से पहचान कर सकते हैं।

कैलिफोर्निया के लोक स्वास्थ्य विभाग के गोर्डन व्रदोलजक ने कहा, अमेरिका में उत्पादों में पारे की सीमा प्रति दस लाख में एक भाग है। उन्होंने कहा, विषैले उत्पादों की पहचान करना एक धीमी प्रक्रिया रही है। इसलिए हमने एक ऐसा उपकरण बनाया, जिसके जरिए एक्स रे की तरंगों के माध्यम से सौंदर्य उत्पादों में मौजूद पारे की पहचान की जा सकती है।

उन्होंने कहा, पुरानी तकनीक से जहां एक उत्पाद की जांच करने में कई दिन लग जाते थे वहीं नई तकनीक से एक दिन में 20 से 30 नमूनों का परीक्षण हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे उत्पादों की पहचान करके हम लोगों को जागरूक करते हैं कि वे उन उत्पादों का इस्तेमाल न करें।

मोटापा घटाने के लिये करें विटामिन का सेवन

वज़न कम करने का प्रभावी तरीका यह है कि आप इसके लिए एक सक्रिय कार्यक्रम अपनाएं जिसमें बहुत सारा व्यायाम और कैलोरी का ध्यान रखकर अपनाई गई पोषक तत्वों से भरपूर डाईट शामिल हो। वज़न कम करने में विटामिन्स ऊर्जा का स्तर बढ़ाकर, तनाव को कम करके, फैट (वसा) को जलाकर तथा पाचन में सहायक होकर वज़न कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोस्‍तों हम मोटापा कम करने के लिये आपको किसी सप्‍पलीमेंट का सेवन करने के लिये नहीं बोलेंगे बल्‍कि हम तो चाहते हैं कि आप सभी विटामिनों का सेवन खुद फल और सब्‍जियां खा कर लें। यहाँ वजन कम करने के लिए 9 सबसे उत्तम विटामिन बताये गए हैं (हालाँकि यहाँ कुछ खनिज भी शामिल हैं)।

 

स्वस्थ रहना है तो कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें

कोपेनहेगन: हाल ही में एक अध्ययन में कहा गया कि प्रतिदिन 30 मिनट का शारीरिक व्यायाम, ऊर्जा को बढ़ाता है। इसके साथ ही यह लोगों को स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के शोध में समझाया गया कि कैसे हल्का व्यायाम, कड़े प्रशिक्षण की अपेक्षा प्रेरणाप्रद है। निष्कर्ष को जनस्वास्थ्य पत्रिका स्कैनडिनावियन में प्रकाशित किया गया था।

साइंस डेली की रिपोर्ट के अनुसार, मोटापे के बड़े भारी सामाजिक-आर्थिक परिणाम हैं। स्वास्थ्य को लेकर दशकों तक चले अभियानों ने भी इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं की है।

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इस वृहद समस्या से बचने और इसके इलाज के एक नए एकीकृत तरीके को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल विभाग के प्रोफेसर बेंटे स्टालनेच ने कहा कि मोटापा एक जटिल समस्या है, इसके प्रति एक बहु-विषयक दृष्टिकोण रखने की जरूरत है। एक नए वैज्ञानिक लेख में हमने बायोमेडिकल अध्ययनों पर 13 सप्ताह की परीक्षण अवधि के दौरान के अनुभवों को गठित किया।

उन्होंने कहा कि यह उस आश्चर्यजनक तथ्य को बताने में समर्थ है कि प्रतिदिन 30 मिनट की कसरत एक घंटे किए गए कड़े शारीरिक परिश्रम के समान ही लाभकारी है।

कैसे करें साथी से कामसूत्र की बात

आमतौर पर प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी एक दूसरे से सम्भोग क्रियाओं अथवा कामसूत्र की चर्चा करने में कतराते हैं। शायद इसका कारण समाज में सेक्स और सम्भोग सम्बन्धी जानकारियों के प्रति फैली गलत धारणा का होना है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि किसी भी युगल के संबंधों को और अधिक सुन्दर व मजबूत बनाने में अच्छे सम्भोग का विशेष महत्व होता है।

कामसूत्र में स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचना और मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझाया गया है। इसीलिए यह ग्रंथ शिक्षा देता है कि प्रेम का आधार है संभोग और संभोग का आधार है प्रेम। शरीर और मन दो अलग-अगल सत्ता होने के बावजूद दोनों एक दूसरे का आधार होते हैं।

यदि आपके यौन जीवन में असंतुष्टि की स्थिति हो तो संबंधों के खराब होने यहां तक कि टूट जाने तक की नौबत आ जाती है। इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप अपने साथी के साथ खुल कर बात करें। इससे आप वर्तमान व भविष्य में हो सकने वाली समस्यायों से बच सकेंगे। साथ ही कामसूत्र आपको इस बात की जानकारी देता है कि किस तरह आप अपने दांपत्य जीवन में अपने साथी के साथ संबंधों में सामंजस बनाकर उसे और अधिक खुशहाल, और रोमांचक बना सकते हैं।

जिन्होंने कामसूत्र या कामशास्त्र नहीं पढ़ा वे इसे महज सेक्स या संभोग की एक किताब मानते हैं, जबकि कामसूत्र सिर्फ सेक्स की किताब नहीं है, बल्कि इसमें सेक्स के अलावा व्यक्ति की जीवनशैली, पत्नी के कर्त्तव्य, गृहकला, नाट्‍यकला, सौंदर्यशास्त्र, चित्रकारी और वेश्याओं की जीवन शैली आदि जीवन के बारे में विस्‍तार से चर्चा की गई है।

एक दूसरे का विश्वास जीतें:
विश्वास किसी भी रिश्‍ते की बुनियाद होता है। अगर आप साथ हैं तो बहुत जरूरी है कि आप एक दूसरे पर विश्वास करें। अगर आप एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास नहीं करेंगे तो इसका असर आपके आपसी शारीरिक और मानसिक संबंधों पर भी पड़ेगा।

बिस्तर में ना करें बात:
सम्भोग क्रियाओं से पहले, बाद में या इसके दौरान इस मुद्दे पर बात करने से बचें। कोई उपयुक्त समय चुनें। आप इस चर्चा के लिए कोई प्राकृतिक स्थान भी चुन सकते हैं।

अपने साथी के साथ कामसूत्र पर चर्चा करें:
कामसूत्र के किसी भी आसन का अनुसरण करने से पूर्व अपने साथी के साथ इस पर खुलकर चर्चा करें। कामसूत्र पुस्तक को पूरी तरह पढ़ें। यदि आप कामसूत्र का पूरा आनंद लेना चाहते हैं तो उसे ठीक प्रकार से पढ़े ताकि उसके किसी भी आसन या जानकारी का आपको सही ज्ञान हो जाये और पूरा आनंद मिल सके। हो सके तो पुस्तक को अपने साथी के साथ पढ़ें। और प्रत्येक विषय पर चर्चा करें। इस प्रकार से आप दोनों के बीच सामंजस्‍य की स्थिति बनी रहेगी।

सहयोग की भावना:
कामसूत्र आपके जीवन को सुखद बनाने की कुंजी है। इसका उद्देश्य मनुष्य के जीवन और संबंधों में मधुरता लाना है। इसलिए इसकी बताई किसी भी क्रिया में दोनों पक्षों में सहयोग होना बहुत आवश्यक है।

प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है। स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं। कामसूत्र मानता है कि प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है। दो आत्माओं के एक दूसरे को देखने का कोई उपाय नहीं है। शरीर ही शरीर को देखता है। स्त्री यदि संपूर्ण तरह से स्त्रेणचित्त है और पुरुष में पौरुषत्व है तो दोनों एक-दूसरे के मोहपाश से बच नहीं सकते।

आप कामसूत्र का अनुसरण यदि आपसी सहयोग से करते है तो इसमें कोई शक नहीं की आपको जीवन के परम आनंद की अनुभूति होगी। संभोग की चर्चा से कतराना या उस पर लिखी गई श्रेष्ठ किताबों को न पढ़ना एक प्रकर से अशिक्षित रहने जैसा है। कामसूत्र इसलिए लिखा गया था कि लोगों में सेक्स के प्रति फैली भ्रांतियां दूर हों और वे इस शक्ति का अपने जीवन को सुंदर बना सकें।


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