Thursday, 18 January 2018
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न कमज़ोर न भयभीत,चुनाव के लिए तैयार!

नई दिल्ली।। दिल्ली विधानसभा चुनावों में लगातार चौथी बार अपने नेतृत्व में कांग्रेस को सफलता दिलाने की तैयारियों में जुटीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आज कहा कि वह एक बार फिर चुनावी जंग के लिए तैयार हैं।

75 वर्षीय शीला ने कहा, ‘‘ हम पूरे आत्मविश्वास के साथ नवंबर- दिसंबर में होने वाले चुनावों में उतरेंगे। हम कमज़ोर या डरे हुए नहीं हैं।’’

दिल्ली में 16 दिसंबर को हुए सामूहिक बलात्कार और कानून व्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों के कारण शीला सरकार पिछले कुछ महीनों से मुश्किल दौर से गुजर रही है। दिल्ली में इस वर्ष नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

1998 से लगातार तीन बार दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत का परचम लहराने वाली शीला ने कहा कि वह अपने रिकार्ड के आधार पर विधानसभा चुनाव लडेंगी और दिल्ली को एक बेहतर शहर बनाने की दिशा में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ हर सरकार के बारे में आप कुछ महसूस कर सकते है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अत्यधिक जरूरतमंदों तक पहुंचने के लिए क्या कर रहे है।

इस लिहाज़ से हमारा रिकार्ड अच्छा है।’’ यह पूछने पर कि क्या वह आगामी चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करेंगी, शीला ने कहा, ‘‘ मेरा भागने का कोई इरादा नहीं है।

यहां हमेशा कुछ न कुछ नया करने के लिए रहता है इसलिए मैं कभी नहीं थकी। दिल्ली एक बहुत रोमांचक शहर है। यहां हमेशा कुछ न कुछ रोमांचक करने के लिए होता है।’’

मीडिया का एक वर्ग शीला को प्रधानमंत्री का संभावित उम्मीदवार बता रहा है। इस विषय पर शीला ने कहा कि वह अभी दिल्ली विधानसभा चुनावों की तैयारियों में लगी हैं और भविष्य के बारे में कुछ नहीं कह सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘ आप जानते हैं कि जब मैं दिल्ली आई थी तो मैंने दूर दूर तक नहीं सोचा था कि मैं कभी यहां चुनाव लड़ूंगी।’’

भाजपा की चुनौती के बारे में शीला ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल होगा कि भविष्य में क्या होगा क्योंकि पूरे समीकरण ही बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ विजय कुमार मल्होत्रा ने पिछली बार और उनसे पहले मदन लाल खुराना ने जैसी चुनौतियां पेश की थी, भाजपा अभी तक उस तरह की चुनौती पेश करने में सक्षम नहीं है। हर चुनौती अलग होती है।

यह तो केवल वक्त की बताएगा कि भविष्य में क्या होगा।’’ शीला ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के बारे में कहा, ‘‘ उनकी राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट नहीं है।

मुझे नहीं लगता कि वह अब लोकपाल विधेयक के बारे में चर्चा करते हैं, तो वे लड़ किसके लिए रहे हैं?’’ उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का रिकार्ड अच्छा रहा है और लोग दिल्ली में अब ज्यादा पुल, मेट्रो, बसें और स्कूल तथा बेहतर सड़कें देख सकते हैं।

उन्होंने उनकी सरकार की कुछ योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली ऐसा पहला राज्य है जिसने समाज में हाशिए पर रखे गए ट्रांसजेंडर के लिए पेंशन योजना शुरू की है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ हमने पिछली बार एचआईवी:एड्स के मरीजों के लिए ऐसी योजना लागू की थी और इस बार हमने उनके लिए यह किया है। अब हमारे पास लोगों तक पहुंचने के कई तरीके हैं।

मसलन ‘अन्नश्री’ देश की पहली नकद हस्तांतरण की योजना है। यह पीडीएस से आगे की योजना है। पीडीएस की सुविधा नहीं पाने वाले लोगों को अन्नश्री की योजना का लाभ मिल रहा है। ऐसा ही विधवा पेंशन मुहैया कराने में भी हो रहा है।’’

यह पूछने पर कि ऐसा क्या था जो वह करना चाहती थीं लेकिन पिछले 14 वर्षों के कार्यकाल में नहीं कर पाई, शीला ने कहा कि वह दिल्ली को सबसे साफ और सुरक्षित शहर बनाना चाहती हैं लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकीं।

उन्होंने कहा, ‘‘ यदि हमारे पास जमीन प्राप्त करने में थोड़ा और लचीलापन होता तो हम झोपड़ियों में रह रहे लोगों के लिए और अधिक मकान बना सकते थे। ’’ दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जे पी अग्रवाल के साथ उनके रिश्ते खास अच्छे नहीं हैं।

इस बारे में पूछे जाने पर शीला ने कहा ‘‘ मेरी उनसे निजी दुश्मनी नहीं है और न ही मुझे लगता है कि हमारे बीच हितों को लेकर टकराव है।

यदि कुछ मतभेद हैं तो उन्हें दूर किया जा सकता है।’’ पिछले वर्ष निकाय चुनावों में हार के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ मैंने खुद को नगरपालिका चुनावों से दूर रखा। हम चुनाव हार गए।

मुझे लगता है कि हम जीत सकते थे। एमसीडी को तीन भागों में बांटने का कदम ऐतिहासिक था। हम इसे लोगो को ठीक से समझा नहीं सके।’’

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