Wednesday, 13 December 2017
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दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री पद को लेकर 'महाभारतÓ

नई दिल्ली,: भारतीय जनता पार्टी में पहले प्रधानमंत्री पद के लिए मारामारी हुई तो अब दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री पद को लेकर 'महाभारतÓ छिड़ गया है। दिल्ली की बागडोर किसे मिलेगी यह तो अभी तक फाइनल भी नहीं हुआ है, लेकिन प्रदेश ईकाई के कई नेता अपने आप को मुख्यमंत्री प्रत्याशी होने की हवा भी छोड़ दी है।

लगातार मंथन के बावजूद बीजेपी दिल्ली में अपना सीएम कैंडिडेट तय ही नहीं कर पा रही है। सभी अपना ढ़ोल पीट रहे हैं। यह दीगर है कि कुछ नेता गुपचुप तरीके से तो कुछ नेता खुलेआम मीडिया तक पहुंच गए हैं। दो दिन से मीडिया की सुर्खियां बने इन नेताओं की हरकत से भाजपा हाईकमान भी हैरान है।

यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी ने आज सभी के सपनों को तोड़ते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अभी दिल्ली के लिए किसी भी मुख्यमंत्री प्रत्याशी का चयन नहीं हुआ है। इस मामले पर कोई भी फैसला पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।  इसके लिए आगामी रविवार 20 अक्टूबर को पार्टी के चुनाव समिति की बैठक होगी जिसमें नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में दिल्ली के लिए भाजपा के सीएम प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया जाएगा।
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दिल्ली चुनाव के पार्टी प्रभारी नितिन गडकरी ने कहा, दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उतारने के लिए भाजपा ने किसी भी नेता का चयन अभी नहीं किया है। इस संदर्भ में संसदीय बोर्ड द्वारा ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।Ó गडकरी का यह बयान इन कयासों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए अपनी पसंद सिर्फ पूर्व मंत्री हर्ष वर्धन तक ही सीमित रखी है। वर्धन की छवि काफी साफ सुथरी है और दिल्ली पार्टी के समर्थकों के बीच उनकी स्वीकार्यता काफी व्यापक है।
उधर, पार्टी के सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के कई वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रदेश प्रमुख विजय गोयल के काम करने के तरीके पर नाराजगी जाहिर की है।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली बीजेपी में सीएम उम्मीदवार को लेकर हो रहे विवाद को निपटाने के लिए एवं सीएम उम्मीदवार के चयन के लिए बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह,  रामलाल और दिल्ली बीजेपी के प्रभारी नितिन गडकरी विशेष मीटिंग किए. लेकिन इसमें कोई फैसला नहीं हो पाया है। इसलिए सीएम कैंडिडेट के नाम का फैसला अब पार्टी की संसदीय बोर्ड पर छोड़ दिया गया है।
उधर, कांग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी में दिल्ली में मुख्यमंत्री प्रत्याशी को लेकर छिड़े आपसी विवाद का चटकारा ले रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा में केंद्र की तरह अब दिल्ली में भी प्रत्याशी को लेकर झगड़ा हो रहा है। आगे पता नहीं क्या होगा। लेकिन इतना तो तय है कि हर्षवर्धन या फिर गोयल में से अगर किसी एक के नाम पर मुहर लगती है तो भाजपा में एक बार फिर बगावत होनी तय है, जिसका पूरा लाभ कांग्रेस पार्टी को मिलेगा।
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