Wednesday, 13 December 2017
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एलएसआर कॉलेज की छात्रा को मिला 29 लाख रुपए का पैकेज

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेन (एलएसआर) में इस साल रिकार्ड प्लेसमेंट दर्ज किया गया है। बी.कॉम की एक छात्रा को सबसे ज्यादा 29 लाख रुपए सालाना का पैकेज मिला है।

 

 

पिछले साल किसी भी छात्रा को मिलने वाला सबसे बड़ा पैकेज 18 लाख रुपए का था। एक कॉलेज अधिकारी ने कहा, ‘रिया ग्रोवर को पाथ्रेनन-ईवाई नाम की एक स्ट्रेटजी कंसलटेंसी ने 29 लाख रुपए के पैकेज की पेशकश की है जो इस साल का सबसे बड़ा पैकेज है।’ इस साल अब तक 94 छात्राओं को नौकरी की पेशकश हुई है।

दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है दिल्ली


नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है। 91 देशों के 1600 शहरों में कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है। `ऐम्बिएंट एयर पॉल्यूशन` नामक इस रिपोर्ट के 2014 के संस्करण में 91 देशों के करीब 1600 शहरों में वायु प्रदूषण के ताजा हालात का ब्योरा दिया गया है। देश की राजधानी दिल्ली की हवाओं में PM2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) यानि सांस के साथ अंदर जाने वाले पार्टिकल, 2.5 माइक्रोन्स से छोटे पार्टिकल का कॉन्सनट्रेशन सबसे ज्यादा है। दिल्ली में यह 153 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

एशिया के दूसरे सघन आबादी वाले शहरों में भी दिल्ली के मुकाबले वायु प्रदूषण कम है। पाकिस्तान के करांची में यह 117 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि चीन के बीजिंग में 56 और शंघाई में 36 है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार PM2.5 का कॉन्सनट्रेशन प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। WHO की इस रिपोर्ट के बाद यह साफ है कि अगर जल्दी ही दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस पहल नही किए गए तो आने वाले दिनों में यहां बीमारियों में इजाफा हो सकता है।

दिल्ली सरकार के सभी मुखियों को एलजी का हुक्म

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार की कार्यपद्धति को चुस्त-दुरूस्त बनाने, उसे लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील व लोकपरक बनाने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने आज विशेष बैठक बुलाई। इस दौरान दिल्ली सरकार के सभी विभागों के मुखियों को निर्देश जारी किए कि वे लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए दो घंटे दरबार लगाएं। अपने कार्यालय में प्रात: 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक बुधवार को छोड़कर सभी कार्य दिवसों पर उपस्थित रहेंगे। साथ ही वे जन सुनवाई करेंगे और लोगों की समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा सभी विभाग अपने-अपने विभागों की उपलब्धिओं, महत्वपूर्ण फैसलों, योजनाओं व नीतियों को सप्ताह में एक बार व आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभाग सप्ताह में 2 बार मुख्य सचिव को बताएंगे।
 मुख्य सचिव संजय कुमार श्रीवास्तव से इस विषय में सभी विभागाध्यक्षों को अलग-अलग 2 आदेश जारी कर कहा है कि सभी प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, सरकारी उपक्रमों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अपने-अपने कार्यालयों में रोजाना पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 1 बजे (2घंटे) बुधवार को छोड़कर सभी कार्यदिवसों पर जन सुनवाई करेंगे। लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे। किन्ही अपरिहार्य कारणों से विभागाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके विभाग मेंं दूसरे नंबर पर वरिष्ठम अधिकारी जन सुनवाई करेंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि उक्त 2 घंटे के समय के दौरान और कोई बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालयों का दौरा भी सुनिश्चित करेंगे।

मुख्य सचिव ने इस बावत बाकायदे विभागों की सूची व रिपोर्ट प्रस्तुत करने के उनके दिन भी तय कर दिए हैं। आदेश के अनुसार गृह विभाग, वित विभाग, सतर्कता, समाज कल्याण महिला व बाल विकास, भाषा एवं चुनाव विभाग अपनी रिपोर्ट सोमवार को भेजेंगे। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग, प्रशिक्षण एवं तकनीकि शिक्षा, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, शहरी विकास व स्थानीय निकाय विभाग मंगलवार को, भूमि एवं भवन विभाग, राजस्व विभाव, लोक निर्माण व दिल्ली विधान सभा बुधवार को रोजगार एवं श्रम, विकास विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, पर्यावरण, सामान्य प्रशासन, योजना प्रशासनिक कार्य विभाग वृहस्पतिवार को विधि एवं न्याय व विधायी कार्य, पर्यटन कला एवं संस्कृति, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उद्योग, गुरूद्वारा चुनाव, दिल्ली स्कील मिशन व मिशन कन्वर्जन्स विभाग शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव व निदेशक सूचना एवं प्रचार को भेजेंगे।
वहीं आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों को सप्ताह में 2 बार इस प्रकार के रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इन विभागों में दिल्ली जल बोर्ड सोमवार व वृहस्पतिवार के दिन, दिल्ली नगर निगम(उत्तर, दक्षिण व पूर्व) मंगलवार व शुक्रवार को,  नई दिल्ली पालिका परिषद भी मंगलवार व शुक्रवार को शिक्षा विभाग मंगलवार व वृहस्पतिवार को, खाद्य व आपूर्ति विभाग सोमवार व वृहस्पतिवार को और परिवहन विभाग सोमवार व वृहस्पतिवार को अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव, निदेशक सूचना एवं प्रचार व उपराज्यपाल के मीडिया सलाहकार को भेजेंगे। जहां यह आवश्यक समझा जाय कि मामला बहुत हीं आवश्यक प्रकृति का है वैसी स्थिति में प्रधान सचिव, सचिव व संबंधित विभागाध्यक्ष इस प्रकार की जानकारी सीधे भी प्रेस को दे सकते हैं और उसकी प्रति मुख्य सचिव, निदेशक सूचना एवं प्रचार व उपराज्यपाल के मीडिया सलाहकार को भेजी जा सकती है।

थप्‍पड़ मारने वाले हमलावर लाली से मिले केजरीवाल

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान उन्हें थप्पड़ मारने वाले हमलावर लाली से बुधवार को मुलाकात की।

लाली ने केजरीवाल को झूठा करार देते हुए मंगलवार को सुल्तानपुरी इलाके में रोड शो के दौरान उन्हें थप्पड़ मारा था, जिसके बाद आप कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई कर दी थी। इससे पहले पार्टी नेताओं ने बताया कि केजरीवाल पहले 38 वर्षीय लाली से मिलने केकारी जाएंगे। आप प्रमुख इसके बाद जामिया नगर निवासी 19 वर्षीय अब्दुल वाहिद से मिलेंगे, जिसने चार अप्रैल की रैली के दौरान केजरीवाल को दो बार घूंसा मारा था।

केजरीवाल पर दक्षिणपुरी इलाके में हमला तब किया गया था, जब वह दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से आप के उम्मीदवार देवेंद्र शेरावत और तीन विधायकों के साथ मौजूद थे।

दिल्ली में प्रचार थमा अब मतदान प्रतिशत पर नजर

नई दिल्ली [वूमेन एक्सप्रेस ब्यूरो]। दिल्ली दरबार की त्रिकोणीय लड़ाई में मतदान प्रतिशत की अहमियत बढ़ गई है। चुनाव आयोग और कई गैर सरकारी संगठनों ने मतदाताओं को उनके वोट की ताकत बताने के लिए अभियान चला कर इसकी उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। आयोग ने हालांकि मतदाता सूची में शामिल फर्जी नामों को हटाने पर गंभीरता से काम नहीं किया। इस वजह से मतदान प्रतिशत बढ़ाने के प्रयास पर चोट भी पहुंच सकती है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान सोमवार शाम थम गया। मतदाता अब बुधवार को अपने वोट के जरिये चुनाव में खड़े आठ सौ से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद करेंगे। देश के विभिन्न राज्यों में लगातार मतदान प्रतिशत भले बढ़ रहा है, लेकिन दिल्ली जैसे महानगरों में इसका उतना असर नहीं दिख रहा। वर्ष 1993 में जब दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे तो यहां 61.8 फीसद मतदान हुआ था। उसके बाद 1998 में यह घटकर 49 फीसद रह गया। वर्ष 2003 में मतदान थोड़ा बढ़कर 53.4 फीसद और 2008 में 57.58 फीसद रहा। वर्ष 2007 में एमसीडी (नगर निगम) चुनाव में सिर्फ 40 फीसद लोगों ने ही वोट डाले।

 

आयोग के कहने पर सरकारी और गैर सरकारी सभी दफ्तरों में सार्वजनिक छुंट्टी होने के बावजूद दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाकों में तो महज 35 फीसद लोग ही वोट डालने निकले। इसी तरह पिछले साल महाराष्ट्र के दस बड़े शहरों में स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान सिर्फ 46 फीसद वोट पड़े थे। जबकि, चेन्नई में वर्ष 2011 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में 48 फीसद वोट पड़े।

दिल्ली विधानसभा चुनाव को इस बार आम आदमी पार्टी (आप) ने दिलचस्प बना दिया है। पिछली बार एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर जीत-हार का अंतर एक से डेढ़ हजार वोट का था। ऐसे में अगर मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ा तो जीतने और हारने वाले उम्मीदवारों के बीच फर्क और कम हो सकता है।

'दैनिक जागरण' ने भी 'सभी चुनें, सही चुनें' अभियान के जरिये मतदाताओं को उनके वोट की ताकत बताई। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफा‌र्म्स (एडीआर) और जनाग्रह जैसे गैर सरकारी संगठन भी इस काम में लगे हुए हैं। चुनाव आयोग ने भी इस बार नए मतदाताओं को जोड़ने और लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने की काफी कोशिश की। लेकिन, आयोग ने उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने में गंभीरता नहीं दिखाई है, जो अब यहां मौजूद नहीं हैं।

'जनाग्रह' की ओर से करवाए गए अध्ययन के मुताबिक दिल्ली की मतदाता सूची में मौजूद 1.23 करोड़ लोगों में से लगभग 23 लाख ऐसे हैं, जिनके नाम हटा दिए जाने चाहिए थे। बुराड़ी सीट पर तो 24 फीसद मतदाता गायब पाए गए। बड़े दल इस बारे में जानकारी होने के बावजूद यह सोच कर इसे दुरुस्त करवाने पर ध्यान नहीं देते, कि बोगस वोट डलवा कर इसका फायदा उठा सकेंगे।


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