Monday, 20 August 2018
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यादों के काफिलों में ले जाती है ख़ुशबू!

महक या ख़ुशबू एक ऐसा शब्द या एक ऐसा एहसास जो मन मंदिर के अंदर से गुज़रता हुआ अंतर आत्मा में विलीन होता हुआ सा महसूस होता है। मुझे ख़ुशबू बहुत पसंद है फिर चाहे वो किसी इत्र की ख़ुशबू हो, या फिर मंदिर में जलने वाली किसी अगरबत्ती या धूप की ख़ुशबू हो, या फिर किसी मज़ार पर जलने वाले लोबान की ख़ुशबू या फिर चाहे वो हवन सामाग्री की ही ख़ुशबू क्यूँ न हो, मुझे महका-महका सा माहौल बहुत पसंद आता है।

भीनी-भीनी सी दूर से आती सुगंध में जैसे मन को एक आसीम शांति का आभास होता है मुझे, यहाँ तक कि मेरे जीवन में कुछ ख़ुशबू ऐसी भी हैं, जिसका मेरे जीवन में किसी न किसी याद से एक नाता सा जुड़ा है।

जैसे बचपन जुड़ा है चंदन और मोगरे की महक से, तो कॉलेज की ज़िंदगी और यादें जुड़ी है विको टर्मरिक और पॉंन्डस टेल्कम पाउडर की ख़ुशबू से जिसमें कहीं हल्की सी महक हिमानी टेल्कम पाउडर की भी शामिल है। जिसे याद करते ही मेरा मन मुझे सीधे परीक्षा हाल में ले जाता हैं। जहां आस पास बैठे सभी लोग के पास से उन दिनों यह गिनी चुनी ख़ुशबुओं की महक ही आया करती थी।

चंदन और मोगरा मुझे इसलिए प्यारा है क्यूंकि बचपन में मेरे नाना जी पूजन करते वक्त अक्सर हम बच्चों से चंदन घिसवाया करते थे और पूजा ख़त्म होने के पश्चात सभी को चंदन का टीका भी लगाया करते थे और केवल महज़ उस एक चंदन के टीके के लालच में सभी मामा मौसी के बच्चों में होड़ सी रहा करती थी।

कौन पहले जाकर चंदन घिसेगा और किसे सबसे ज्यादा चंदन लगाने को मिलगा कि सब सुबह से शाम तक महक सकें। इसलिए शायद आज भी मेरे घर में असली चंदन न सही मगर विको टर्मरिक क्रीम ज़रूर मिल जाएगा आपको, मगर किसी सौंदर्य प्रसाधन की  दृष्टि से नहीं, बल्कि बस कुछ महकी हुई सी यादों को याद करने के लिए और एक दवा के रूप में जो जलने, कटने, या छिलने पर लगाने के काम आती है। यानि एक Antiseptic Cream के रूप में,

वैसे सौदर्य प्रसाधन की दृष्टि से में यहाँ एक बात बताना चाहूंगी यूं तो चंदन से अच्छी पूरे विश्व में कोई सुगंध नहीं है  और चूंकि यह मस्तिष्क ठंडा रखता है, इसलिए औषधि के रूप में भी मस्तिष्क को ठंडा रखने वाली इसे अच्छी कोई बूटी नहीं, किन्तु यदि आप इसे एक सौदर्य बढ़ाने वाले प्रसाधन के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं तो याद रखें शुष्क अर्थात रूखी सुखी त्वचा वाले व्यक्ति कभी इसके पाउडर का सीधा प्रयोग अपनी त्वचा पर ना करें इसे हमेशा किसी नमी युक्त पढ़ार्थ के साथ ही प्रयोग करें, वरना आपकी शुष्क त्वचा और भी रूखी हो सकती है।

अब बात आती है मोगरे के फूलों की, यूं तो दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फूल गुलाब का है।  जिसे लोग अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में नहाने के पानी से लेकर, गुलकंद के रूप में खाने और गुलाबी कपड़ों और प्रसाधनों को इस्तमाल कर गुलाब जैसा दिखने और महकने की ख्वाइश भी रखते है। इसलिए ऐसा माना जाता है कि पूरी दुनिया में सभी लड़कियों को केवल गुलाब का ही फूल सबसे ज्यादा पसंद आता है।

जबकि मैं उन में से नहीं हूँ :) मुझे गुलाब से ज्यादा पसंद है मोगरा ,राजनीगंधा, और लेवेंडर की ख़ुशबू। मोगरा मुझे इसलिए पसंद है क्यूँकि यह मेरे घर के आँगन में ही लगा था गर्मियों की हर रात मेरे घर का आँगन हमेशा मोगरे के फूलों से महकता था और हम लोग हर रात उस पौधे से माफी मांगते और रात में ही सारे फूल तोड़ कर पानी में डालकर रख लिया करते थे और मम्मी हर सुबह उन फूलों को शिवजी पर चढ़ाया दिया करती थी। क्यूंकि ऐसा माना जाता है न कि शिवजी को सफ़ेद चीज़ें बहुत अधिक प्रिय होती हैं और इसलिए मैं और मेरी मम्मी दोनों ही शिवजी को बहुत मानते हैं।

खैर उन दिनों रात को ही मोगरे के फूल तोड लेने के पीछे भी एक कारण था। वो यह कि सुबह कितनी भी जल्दी उठो फूल चोरी हो ही जाया करते थे। जिसके चलते हमारे ही घर के गृह देवता को हमारे ही आँगन के फूल ही नहीं मिल पाते थे इसलिए मजबूरी में हमे वो सारे फूल रात में ही तोड़ने पड़ते थे। मगर सुबह शिवजी को वह फूल अर्पण करने के बाद जो पानी बचा होता था, जिसमें रात भर वो फूल भिगो के रखे गए होते थे उस पानी को  अपने नहाने वाले पानी में शुमार करने में मुझे बड़ा मज़ा आता था हालांकी उस ज़रा से पानी से महक शायद नाम चार की भी ना आती हो मगर उस पानी को इस्तमाल करने से मन को एक महकने का भ्रम और एक प्रकार का संतोष ज़रूर मिला करता था, खैर यह सब ख़ुशबू में डूबे रहने की दिवानगी थी और कुछ नहीं। उन दिनों हमारे घर में एक छोटी सी कृष्ण जी की चंदन की लकड़ी से बनी प्रतिमा भी थी जो कुछ देर पानी में डालने से पूरा पानी चंदन की ख़ुशबू से महका दिया करती थी। हमारे पूरे घर में शायद ख़ुशबू के लिए ऐसा पागल पन सिर्फ मुझे ही था।

ख़ुशबू से संबन्धित एक और बात बताऊँ आपको, जिसे पढ़कर शायद आप मुझे पागल समझे :-) मगर ख़ुशबू के मामले में, ज़रा ऐसी ही हूँ मैं :-) मुझे कोई भी इत्र या पेरफ्यूम शरीर से ज्यादा कपड़ों पर लगाने और डालने में मज़ा आता है जैसे दुपट्टे या साड़ी के पल्लू पर, गले और कलाई पर तो मैं बस नाम के लिए लगाया करती हूँ।

इन सब बातों के अलावा एक बात और मुझे इन ख़ुशबुओं के अलावा कुछ ऐसी चीजों की महक भी पसंद है जो शायद ख़ुशबुओं के शब्दकोश में नहीं पायी जाती। जैसे मुझे कभी-कभी पेट्रोल, बूट पोलिश की महक भी बुरी नहीं लगती और यदि खाने पीने की बात करें तो मुझे कॉफी पाउडर की सुगंध बेहद पसंद है। आज भी कॉफी बनाने से पहले में एक बार कॉफी को सूँघती ज़रूर हूँ और मसालों में घर के बने गरम मसाले की ख़ुशबू भी मुझे बेहद पसंद है।

मगर इन सब ख़ुशबुओं से परे भी इंसान के जीवन में कुछ एक ख़ुशबू ऐसी भी होती हैं, जिनको कोई नाम नहीं दिया जा सकता, बस केवल महसूस किया जा सकता है। जैसे पहले-पहले प्यार की ख़ुशबू, किसी खास के जिस्म की वो ख़ुशबू जो आपके अंतस में उसकी पहचान बन के बस जाती है। जिसे सिर्फ आप महसूस कर सकते हो दूसरा और कोई नहीं....यह सब पढ़कर लग रहा है ना आपको की मैं एकदम पागल हूँ।

मगर क्या करूँ जब बात ख़ुशबू की हो रही हो तो इन सभी ख़ुशबुओं का ज़िक्र न करना इस महक शब्द के साथ नाइंसाफ़ी होगी मेरे लिए, आपके जीवन में भी आपकी यादों से जुड़ी कई सारी ऐसी ही ख़ुशबू होंगी जिनको आज भी सूंघने पर आप यादों के काफिलों में खो जाते होंगे।  है ना ? तो आज आप भी अपनी टिप्पणियों में मेरे साथ सांझा कीजिये अपने-अपने जीवन की महक।


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