Sunday, 23 September 2018
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मप्र. चुनाव : महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी

भोपाल : महिलाओं को राजनीति में आगे लाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाली दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भाजपा और कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में 14वीं विधानसभा के गठन के लिए 25 नवंबर को होने वाले चुनाव में उन्हें टिकट देने में खासी कंजूसी बरती है।

प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा एवं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा 230 विधानसभा सीटों के लिए किए गए टिकट वितरण का विश्लेषण करने से पता चलता है कि महिलाओं के राजनीतिक संरक्षण की बातें करने वाली कांग्रेस ने टिकट देने में उनके प्रति उतनी ही कंजूसी बरती है। कांग्रेस ने इस चुनाव में महिलाओं को केवल 10 प्रतिशत यानी 23 सीटों पर मौका दिया है, जबकि भाजपा ने भी मात्र 13 प्रतिशत यानी 28 महिलाओं को विधानसभा पहुंचने का अवसर प्रदान किया है।

दिलचस्प पहलू यह है कि कांग्रेस में यह स्थिति तब है, जब पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष मध्य प्रदेश की ही शोभा ओझा हैं। शोभा ओझा जब महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं थीं, तब उन्होंने हर जिले से कम से कम एक महिला नेता को प्रत्याशी बनाने की पुरजोर वकालत की थी। प्रदेश महिला कांग्रेस की एक पदाधिकारी ने अपना नाम सामने नहीं लाने की शर्त पर कहा कि अब टिकट वितरण के बाद यह साफ हो चुका है कि शोभा ओझा नई दिल्ली में महिलाओं की लड़ाई पूरी ताकत से नहीं लड़ सकी हैं।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा में ताकतवर महिला नेताओं को टिकट देने में कांग्रेस की तुलना में पूरी उदारता नजर आती है, क्योंकि भाजपा ने 28 महिला प्रत्याशियों पर अपना भरोसा जताया है। यह और बात है कि यह उदारता उसने उन सीटों पर बरती है, जहां भाजपा को अपनी स्थिति कमजोर लगती है।

इस बारे में विस्तार से प्रकाश डालने को कहने पर प्रदेश महिला कांग्रेस पदाधिकारी ने कहा कि उदाहरण के तौर पर सेमरिया सीट पर मौजूदा भाजपा विधायक अभय मिश्र विरोधी लहर होने की वजह से ही संभवत: उनका टिकट काटकर उनकी पत्नी नीलम मिश्र को टिकट दिया गया है। इसी प्रकार सुरखी और पृथ्वीपुर विधानसभा सीटों पर भाजपा चूंकि लगातार पराजित होती आई है, इसलिए वहां से क्रमश: पारूल साहू एवं अनीता नायक को मौका दिया गया है।

इंदौर क्रमांक-3, सैलाना, पेटलावद, चाचौड़ा एवं विजयराघवगढ़ में भी भाजपा लगातार हार रही है ओर यहां उसने महिलाओं पर दांव आजमाया हैं महिला कांग्रेस की इस नेता के जवाब में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी ने केवल उन्हीं प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं, जिनके जीतने का उसे भरोसा है। हमारा मापदण्ड इस चुनाव में जीतने वाले प्रत्याशियों को मौका देना रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि भाजपा ने केवल उन्हीं सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है, जहां वह कमजोर रही है। भाजपा ने जिताऊ सीटों पर यह सोचकर भी मौका दिया है कि ्रव्यवस्था विरोधी लहर्र का असर कम हो। इनमें यशोधराराजे सिंधिया, अर्चना चिटनीस, माया सिंह, मालिनी गौड़, रंजना बघेल, नंदनी मरावी एवं मीना सिंह ऐसी ही प्रत्याशी हैं। ये सभी भाजपा की सीटों में इजाफा कर सकती हैं।

कांग्रेस ने प्रदेश में केवल 23 महिला प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अर्चना जायसवाल कहती हैं कि यदि ्रस्क्रीनिंग कमेटी्र में महिला सदस्य होतीं, तो वह महिलाओं का पक्ष दमदारी से रख सकती थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अर्चना कहती हैं कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, सागर एवं जबलपुर ऐसे शहर हैं, जहां एक भी महिला को टिकट नहीं दिया गया। हमने तो पार्टी आलाकमान से उन विधानसभा सीटों पर महिलाओं को टिकट देने की मांग की थी, जहां से कांग्रेस लगातार हारती आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 230 में से 60 से 70 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस लगातार पराजित होती आ रही है। पार्टी चाहती तो इनमें महिलाओं को मौका देकर उन्हें आजमा सकती थी।

भाजपा ने जिन प्रमुख महिला नेताओं को टिकट देकर उन पर इस चुनाव में भरोसा जताया है, उनमें ग्वालियर पूर्व से माया सिंह, शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया, चाचौड़ा से ममता मीना, सीहोर से ऊषा सक्सेना, सेमरिया से नीलम मिश्र, सुरखी से पारूल साहू, पृथ्वीपुर से अनीता नायक, छतरपुर से ललिता यादव, मलेहरा से रेखा यादव, हटा से उमा देवी खटीक, पन्ना से कुसुम सिंह मेहदेले, सैलाना से संगीता चारेल, इंदौर-3 से ऊषा ठाकुर, इंदौर-4 से मालिनी गौड़, बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस, पेटलावद से निर्मला भूरिया, मनावर से रंजना बघेल, धार से नीना वर्मा, विजयराघवगढ़ से पदमा शुक्ल, बरगी से प्रतिभा सिंह, लखनादौन से शशि ठाकुर, सिहोरा से नंदनी मरावी, मण्डला से सम्पतिया उइके, जयसिंह नगर से प्रमिला सिंह एवं मानपुर से मीना सिंह शामिल हैं।

इसी प्रकार कांग्रेस ने जिन प्रमुख महिलाओं को टिकट से नवाजा है, उनमें डबरा से इमरती देवी, करेरा से शकुंतला खटीक, कुरवई से पानबाई पंथी, शमशाबाद से ज्योत्सना यादव, पिपरिया से ममता नागौत्रा, बीना से निर्मला सप्रे, खरगापुर से चंदा देवी गौर, देवास से रेखा वर्मा, महिदपुर से डा. कल्पना परूलेकर, रतलाम ग्रामीण से लक्ष्मी बाई खराड़ी, रतलाम शहर से अदिति देवसर, आमला से सुनीता भेले, अलीराजपुर से सेना पटेल, शहपुरा से गंगाबाई उरैती, लांजी से हिना कांवरे, सिहोरा से जमुना मरावी, परसवाड़ा से मधु भगत, चितरंगी सरस्वती सिंह, गाडरवारा से साधना स्थापक एवं मानपुर से शकुंतला प्रधान शामिल हैं।

डांस बार पर प्रतिबंध लगा पाएगी महाराष्ट्र सरकार?

मुंबई : महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने यहां विधानसभा में आज कहा कि महाराष्ट्र सरकार अपने इस रूख पर कायम है कि डांस बार बंद होने चाहिए और वह डांस बार पर प्रतिबंध को खारिज करने वाले बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को सही ठहराने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अगले दो दिन पर कोई फैसला करेगी।

सदन में मनसे विधायक बाला नंदगांवकर के एक सवाल के जवाब में पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार डांस बार पर प्रतिबंध को खारिज करने वाले बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को सही ठहराने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले पर दो दिन पर कोई फैसला करेगी।

नंदगांवकर और वरिष्ठ पीडब्ल्यूपी विधायक गणपतिराव देशमुख डांस बारों पर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर राज्य सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों के बारे में जानना चाहते थे।

गृह मंत्री ने कहा, हमने दिल्ली और मुंबई में विशेषज्ञों से कानूनी राय मांगी है। राज्य सरकार का नजरिया यह है कि डांस बारों पर प्रतिबंध जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने आगे के कदम तय करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है।

उन्होंने संकेत दिया कि सरकार किसी विषमता को समाप्त करने के लिए प्रमुख होटलों से नृत्य प्रदर्शन लाइसेंस वापस लेने पर विचार कर रही है। पाटिल ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो तीन या पांच सितारा होटलों को जारी किये गये डांस बार लाइसेंस भी वापस लिये जाएंगे।

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