Wednesday, 13 December 2017
Blue Red Green

पत्नी ग़र करती है प्यार तो खूब करेगी किस

क्या आप जानते हैं कि आपकी पत्नी आपको कितना प्यार करती है? नहीं, तो इसका फॉर्मूला जान लीजिये. अगर आपकी पत्नी आपको सचमु प्यार करती है तो वह आपको बार-बार गले लगाएगी और किस करेगी. अब गौर आपको करना है कि आपकी पत्नी आपको कितनी बार आपको गले लगाती हैं, या आपका ‘चुंबन’ लेती है.

लंदन में डेली मेल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में एक नये सर्वेक्षण के हवाले से बताया गया है कि महिलाएं अगर अपने पति से प्यार करती हैं तो उन्हें गले लगाती है और चुंबन लेती हैं और नखरे भी कम दिखाती हैं.

अध्ययन में पाया गया कि पुरूष स्वभाव से रोमांटिक नहीं होते हैं और वे घर के काम काज में योगदान देकर अपना प्यार जाहिर करते हैं.

इस सर्वेक्षण में 168 दंपतियों को शामिल किया गया. पुरूषों ने विभिन्न तरीकों से अपनी भावनाएं महिलाओं को जाहिर की.

एक ओर जहां महिलाओं ने नकारात्मक विचार और भावनाएं छिपाकर प्यार प्रदर्शित किया, वहीं दूसरी ओर पुरूषों ने कपड़े धोने जैसे घर के

जो पति अपनी पत्नी से अधिक प्यार करते हैं, उनके सहवास करने की अधिक संभावना होती है.

काम-काज में हाथ बंटाकर या कामुक क्रियाओं की शुरूआत करके अपना प्यार जाहिर किया.

जो पति अपनी पत्नी से अधिक प्यार करते हैं, उनके सहवास करने की अधिक संभावना होती है. इस बारे में अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि यह इस विचार का समर्थन करता है कि पुरुषों के लिए सेक्स के ज़रिये अपने प्यार को प्रकट करने का यह एक अहम माध्यम है.

अध्ययन में दावा किया गया है कि महिलाओं की ओर से कामुक क्रियाओं की शुरूआत करने की कम संभावना होती है.

यह अध्ययन पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी बुलेटिन में प्रकाशित हुआ है.

 

सेक्स लाइफ को कैसे मधुर बनायें


आज की इस तेज रफ्तार भरी जिंदगी में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हों तो एक-दूसरे के साथ बैठने और बातचीत के लिए भी समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर पड़ता है उनकी सेक्स लाइफ पर।

लंबे समय तक सेक्स के प्रति उदासीनता धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन पर असर डालने लगती है। नतीजा होता है आपसी कड़वाहट और रिश्तों में तनाव। सेक्स के सिंपल टिप्स अपनाकर आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर और लुभावना बना सकते हैं। आइए जाने ऐसी ही कुछ बातें जिनसे आप अपनी सेक्स लाइफ को मधुर बना सकते हैं।

• नियमित सेक्स
यह सच है कि तनाव और थकान का पति-पत्नी के यौन जीवन पर बुरा असर पड़ता है, मगर वहीं यह भी सच है कि सेक्स ही आपके जीवन में पैदा होने वाले दबावों और परेशानियों से जूझने का टॉनिक भी बनता है। इसलिए कोशिश करें कि सप्ताह में तीन बार तक सेक्स संबंध जरूर बनाये, इससे आपकी सेक्स लाइफ मधुर होगी।

• रिश्तों में निकटता लाये
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं सेक्स का असर आपसी रिश्तों पर भी पड़ता है। रिश्तों में निकटता लाकर पति-पत्नी सेक्स लाइफ को मधुर बना सकते है, उनके पास आपस में एक-दूसरे से कहने लिए बहुत कुछ होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा बातें करें,

• सेक्स ऐसा जिसे दोनों एंज्वाय करें
मनोचिकित्सकों का मानना है कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए ऐसा सेक्स जरूरी है जिसे पति-पत्नी दोनों एंज्वाय करें। इसके लिए जरूरी है कि इसे एक मशीनी क्रिया में बदलने की बजाय दिलचस्प बनाने पर जोर दिया जाए। इसमें फोरप्ले और कल्पनाशीलता की अहम भूमिका होती है। दरअसल यही आपको तनाव से मुक्त करता है और एक-दूसरे के करीब लाता है। सेक्स के दौरान सिर्फ एक-दूसरे के अंगों को सहलाकर और चूमकर शिथिलता दूर की जा सकती है। आपस में मधुर बातें, ओरल सेक्स या हस्तमैथुन के जरिए रुटीन की सेक्स लाइफ को ज्यादा स्पाइसी बनाया जा सकता है।

• अपने साथी को समय दें
शादी के कुछ सालों बाद कुछ जोड़े पाते हैं कि सहवास और दृढ़ता अपनी वास्तविक चमक खोती जा रही है साथ ही दिन-ब-दिन सहवास करना सिर्फ एक रुटीन उद्देश्य रह जाता है. इसलिए अपने साथी को पूरा-पूरा टाइम दें, इसका सबसे बेहतर तरीका है कि पॉजिटिव प्रयासों से अपने पार्टनर को बहकाएं,

• अच्छी तरह बढ़ कर तैयारी करें
यदि आप बाहर खाना या फिल्म देखने का मन बनाते हैं तो यह एक बेहतर अवसर है जहां आप एंज्वाय करेंगे. बहलाने का कोई भी मौका मिलता है तो उसे न छोड़ें। यही स्थिति ऐसी होगी जब आपका पार्टनर सहजता से सोचेगा कि आप उसे कितना चाहते हैं। कभी-कभी उसे उपहार भी दें। जैसे उसकी बगैर जानकारी के उसके लिये उसका पसंदीदा परफ्यूम लाकर दें या फिर कोई सहवासी सा अण्डरवियर उसे गिफ्ट करें। ऐसे में जब भी वह इनका प्रयोग करेगी आपको याद करे रोमांचित होगी।

• आपस में छेड़छाड़ करें
आपसी छेड़छाड़ दो प्रेमियों के बीच का महत्वपूर्ण फोरप्ले होती है। इस दौरान धीमी लाइट जलाकर कोई पसंदीदा संगीत चालू कर लें। छेड़छाड़ के बीच-बीच में एक दूसरे को किस करने का मौका न गंवाएं साथ ही एक दूसरे से चिपक कर लेटे,इस दौरान पूरी सौम्यता बरते न कि सीधे सेक्सक के लिए उन्मुख हो जाएं। इससे सेक्सक लाइफ में मधुरता आएगी।

भारतीय परंपरा में पति-पत्नी एक दोस्त!

जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने की शपथ लेने को ही शादी कहते हैं। प्राय: सभी समाजों में विवाह एक तरह की वचनबद्धता ही है।

स्त्री-पुरुष कुछ संकल्पों के बंधन में बंधते हैं। भारतीय समाज में 'विवाह' स्त्री और पुरुष के जीवन में महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी संस्कार है। विवाह की व्याख्या ऊपर उठाना, योग देना, ग्रहण करना, धारण करना आदि के अर्थ में की गई है। दांपत्य जीवन त्याग और समर्पण की भावना पर आधारित है। यह पितृ ऋण उतारने का एक साधन है।

दो व्यक्तियों के इस शारीरिक और मानसिक एकीकरण के लिए हिंदू विवाह पद्धति में बहुत सारे विधि-विधान हैं। विवाह संस्कार के मूल आधार गृह्य सूत्र और धर्म सूत्र हैं। मुख्य रूप से पारस्कर और बौधायन गृह्यसूत्र के अनुसार इस अनुष्ठान को संपन्न किया जाता है।

आदर्श दांपत्य जीवन के लिए पति-पत्नी में सखा भाव अनिवार्य है। इस दृष्टि से विवाह पद्धति में उल्लेखनीय संस्कार हैं -पाणिग्रहण, सप्तपदी, हृदयालम्भन या हृदय स्पर्श, पतिगृह में वधू का स्वागत और स्थालीपाक होम।

पाणिग्रहण संस्कार से पहले कन्यादान करने की प्रथा है। उस समय कन्या का संरक्षक वर के सामने प्रतिबंध अर्थात् शर्त रखता है कि तुम धर्म, अर्थ, काम की प्राप्ति में इसका अतिक्रमण (उपेक्षा) न करना। तीन बार यह शर्त दुहराई जाती है और हर बार वर कहता है 'नहीं करूंगा।'

पाणिग्रहण के समय कन्या का दाहिना हाथ अपने हाथ में लेता हुआ वह कहता है- मैं सौभाग्य के लिए तेरा पाणिग्रहण करता हूं। तू मुझ पति के साथ दीर्घायु होना। कुछ सूत्रों में इस कर्म के बाद यह भी कहलवाया गया -मैं साम हूं, तुम ऋचा हो, मैं आकाश हूं, तुम पृथ्वी हो, आओ हम दोनों विवाह करें, बहुत से पुत्र उत्पन्न करें, हम एक दूसरे को प्रिय हों, हमारी एक दूसरे में आसक्ति हो, हमारा मन प्रसन्न रहे। हम सौ वर्ष तक जीवित रहें।

सप्तपदी का महत्व सभी स्मृतिकारों ने स्वीकार किया है। मनु के अनुसार इसके बिना विवाह पूर्ण नहीं मानाजाएगा। इसमें वर और वधू अपना - अपना दाहिना पैर एक - एक पद के साथ आगे बढ़ाते हैं। पहले वर, पीछेकन्या। जिस जगह से सीधा पैर उठाया, उसी जगह बायां पैर रखते जाते हैं।

इस प्रकार सात मंत्रों से सप्तपदचलते हैं। मंत्रों के माध्यम से वर वधू को सखी मान कर अन्न, ऊर्जा, धन, पशुओं और सभी ऋतुओं में सुख औरसातों लोकों में यश की प्राप्ति की कामना करता है। कई मंत्रों में वर विश्व के पोषक विष्णु की सहायता से धनधान्यऔर सुख की प्राप्ति की कामना करता है।

कुछ मंत्रों में कन्या द्वारा यज्ञ, दान, धन रखने, पशु खरीदने में अपनी सम्मति का अधिकार मांगा गया है।सप्तपदी के बाद हृदयालम्भन अथवा हृदय स्पर्श का विधान है। वर अपना दाहिना हाथ वधू के दायें कंधे पर से लेजाकर उसके हृदय का स्पर्श करते हुए मंत्र पाठ करता है जिसका आशय यह है कि मेरे हृदय में तुम्हारा हृदय हो,अपने मन के साथ मेरे मन को संयुक्त करो।

अनन्य चित्त होकर मेरे वचन का पालन करो, प्रजापति तुम्हें मेरेलिए नियुक्त करें अर्थात् मेरे प्रति तुम्हारी आसक्ति करें। यह मंत्र केवल शरीर - संयोग की स्थिरता का ही नहीं मन, वचन और कर्म से पति - पत्नी के हृदयों के एक होने का भी प्रतीक है।

पति गृह में प्रवेश के कुछ समय बाद पति, पत्नी को पका हुआ अन्न खिलाता है। इसे ' स्थालीपाक होम ' कहाजाता है। आजकल यही प्रथा ' प्रीतिभोज ' कहलाती है। पहला ग्रास खिलाते हुए पति का कथन पूर्ण एकीकरण काप्रतीक है - मैं अपने प्राणों से तेरे प्राणों को, अपनी अस्थियों से अस्थियों को, मांस से मांस को और त्वचा सेत्वचा को धारण करता हूं। दांपत्य में इसी एकात्म भाव की आवश्यकता होती है।

इसके अभाव में संबंधों में दरारेंआने लगती हैं। इनको पाटने के लिए किसी मैरिज काउंसिलर के पास जाने की जरूरत नहीं। सिर्फ विवाह केसमय दिए और लिए गए करारों को फिर से याद करने की दरकार होती है।

गर्भावस्था के दौरान न रहें तनाव में!

लंदन।। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान तनाव का अजन्मे बच्चे पर उसके आने वाले बरसों में बुरा प्रभाव हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मां बनने जा रही महिलाओं के साथ तनाव के समय में सहयोग करना चाहिए।

ब्रिटेन की गर्भवती महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया। समाचार पत्र ‘डेली मेल’ के मुताबिक शोधकर्ताओं ने देखा कि गर्भावस्था के दौरान किसी प्रियजन की मौत या अलगाव या फिर अन्य तरह के तनावों से गुजरने वाली महिलाओं के बच्चों के चार साल की उम्र में पहुंचने तक वे बीमार हो जाते हैं।

लंदन के किंग्स कॉलेज के इंस्टीट्यूट ऑफ साइकैट्री के शोधकर्ताओं के मुताबिक यह बहुत महत्वपूर्ण है कि तनाव के समय में गर्भवती महिलाओं के साथ सहयोग किया जाए। यह देखा गया कि गर्भावस्था के दौरान तनाव और बच्चों के बीमार पडऩे के बीच महत्वपूर्ण सम्बंध है।

गर्भावस्था के दौरान दो गम्भीर तनाव आपके बच्चे में बीमारी का खतरा पांच गुना तक बढ़ा देते हैं। करीब 150 गर्भवती महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन के दौरान उनसे उनकी गर्भावस्था की एकदम शुरुआत में और फिर उनके बच्चे को जन्म देने से कुछ सप्ताह पहले उनसे उनके तनाव के विषय में पूछा गया।

महिलाओं से परिवार में किसी प्रियजन की मौत, अलगाव, अचानक बेरोजगारी और गर्भावस्था के दौरान परेशानी व तनाव के कई अन्य कारणों के विषय में पूछा गया। बच्चों के जन्म के चार साल बाद इन महिलाओं से दोबारा सम्पर्क किया गया।

उनसे उनके बच्चों के स्वास्थ्य के विषय में पूछा गया और यह पूछा गया कि क्या बच्चों को कोई ऐसी बीमारी हुई जिसकी वजह से उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा हो या अस्पताल में भर्ती करना पड़ा हो। अध्ययन में गर्भावस्था के दौरान तनाव व बच्चों के बीच सीधा सम्पर्क देखा गया।

जिन बच्चों की माताएं गर्भावस्था के दौरान तनाव में रहीं, उनमें अस्थमा या पेट में कीड़े जैसे संक्रमण की बीमारियां देखी गईं।


Amount of short articles:
Amount of articles links:

Photo Gallery

Poll

सही है, तथ्यों पर आधारित लेख है - 100%
गलत है, धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं - 0%
बता नहीं सकते - 0%