Thursday, 18 January 2018
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पुरूषों के मुकाबले महिला नेता कम भ्रष्ट?

नई दिल्ली, क्या महिला नेता अपने पुरुष सहयोगियों के मुकाबले कम भ्रष्ट होती हैं। इस सवाल का जबाव तलाशते हुए विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में भारत के उल्लेख का जिक्र पहले कर लेते हैं।रिपोर्ट के अनुसार भारत की ग्राम पंचायतों में महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद से जिन गांवों में महिला सरपंच हैं, वहां पुरूष सरपंचों वाले गांवों की तुलना में रिश्वत के मामले 2.7 प्रतिशत से 3.2 प्रतिशत कम रहे। बैंक की वार्षिक विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 30 प्रतिशत होने के बाद से गांवों में बदलाव दिखने लगा हैं, गांवों में भ्रष्टाचार अपेक्षाकृत कम हुआ, स्वच्छ पेयजल, स्कूल, स्वच्छता आदि विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा, यानि प्राथमिकतायें बदली। अक्सर कहा जाता है कि अगर सता में महिलायें ज्यादा आयें तो भ्रष्टाचार से ज्यादा अच्छी तरह से निबटा जा सकेगा, तर्क है कि महिलायें कम रिश्वत लेती है और उन्हें निजी कायदे से ज्यादा दुनिया की भलाई की फिक्र रहती है, लेकिन क्या यह सही है? अक्सर कहा जाता है कि यह सवाल खुद में एक गुत्थी है, भ्रष्टाचार को की पुरूष से जोडना एक पहेली है, लेकिन कुछ सर्वेक्षणों से यह भी जरूर पता चला है कि भ्रष्टाचार पर कुछ चोट तो निश्चय ही उनके आने से हो जाती है, ऐसा लगता है कि महिलायें जहां शीर्ष पदों पर पहुंचती है अधिकतर ऐसे समाज ज्यादा लोकतांत्रिक व पारदर्शी होते हैं और इस तरह के समाज में सामान्यत: भ्रष्टाचार को लेकर ज्यादा रोष होता है और वे समाज उसे बर्दाश्त नहीं करते हैं। महिलाओं के सत्तारढ होने से शासन बेहतर तरीके से चलता है और इससे निश्चय ही भ्रष्टाचार कम होता है। पेरू में सुश्री रूबरीना करीम द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार जब यातायात पुलिस में 2500 महिला कर्मियों को एक साथ शहर की सडकों पर गश्ती ड्यूटी पर लगाया गया तो पिछले 14 वर्षों के भ्रष्टाचार के आंकडों में कमी आई। मैक्सिको ने भी इसी उदाहरण को अपनाते हुए सडकों पर भ्रष्टाचार कम करने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को सडकों पर गश्ती ड्यूटी पर तैनात कर दिया। वर्ष 1975 से 1978 तक ईरान में महिलाओं के मामले की मंत्री रही तथा फिलहाल एक महिला संस्था की प्रमुख एक महनाज अरवामी का कहना है कि अगर महिलाओं की आवाज ताकतवर होती है तो सरकार की क्वालिटी पर गहरा सकारात्मक असर पडता है। इंडोनेशिया की पहली महिला वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती जिसे कडक तथा तेज तर्रार सुधारवादी कहा जाता है, उनका भी कहना है कि अगर बुनियादी स्तर पर ज्यादा से ज्यादा महिलायें सत्ता में आती है तो संसाधनों के आवंटन की प्राथमिकतायें निश्चय ही बदलती है, महिलायें पहले बच्चों के बारे में सोचती हैं, बच्चों का तथा परिवार को पेट कैसे भरे जायें, जबकि अधिकतर पुरूष ज्यादातर अपने हितों के बारे में सोचते हैं।

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