Thursday, 24 May 2018
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बदलावों की अनदेखी या उपेक्षा न करें युवा व महिलाएं

नई दिल्ली (वूमन एक्सप्रेस): आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आमतौर पर हम अपने शरीर में होने वाले बदलावों की अनदेखी कर देते हैं। अमूमन शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन, उभार, गांठ और त्वचा के रंगों और शारीरिक संरचना में होने वाले वाले बदलाव, आंतों की क्षमता में अचानक आए परिवर्तन तथा वजन में अप्रत्याशित कमी कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया जाता है, लेकिन कैंसर की शुरुआती पहचान के दौरान कैंसर पनपने में इनकी अहम भूमिका मानी जाती है।

शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान के लिए आत्मपरीक्षण (प्राथमिक बचाव) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्मशिला अस्पताल और शोध केंद्र ने जागरुकता पर जोर दिया। एक कार्यक्रम के दौरान एकेडमिक्स के निदेशक डॉ. रमेश डावर ने कहा कि शैशव अवस्था से किशोरावस्था और फिर वयस्क होने तक हर व्यक्ति अपने शरीर में होने वाले बदलाव से वाकिफ होता है।

परिवर्तन और विकास प्रक्रिया जारी रहती है, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। आप अपने शरीर में होने वाले बदलावों से सबसे ज्यादा वाकिफ रहते हैं। लेकिन, हम सबकी दिक्कत यह है कि हम इन बदलावों की अनदेखी या उपेक्षा कर देते हैं। उनके मुताबिक कभी-कभी शरीर में होने वाले परिवर्तन हमारी आधारभूत चिकित्सा स्थिति के लक्षण से जुड़े होते हैं, मसलन माहवारी के दौरान उभरने वाले अस्पष्ट धब्बे गर्भाशय में कैंसर का लक्षण हो सकते हैं।


सर्जिकल ओन्कोलॉजी (कैंसर सर्जरी विज्ञान विभाग) के कंसल्टेंट डॉ.शरण चैदरी कहते हैं कि हमें अपने शरीर की हर माह सिर से पैर तक जांच कराते रहना चाहिए, ताकि किसी नए या बदलते जख्म को खोज सकें, क्योंकि यह कैंसर रोग पैदा कर सकते हैं या कैंसर पनपने का कारण हो सकते हैं।


स्त्री रोग विशेषज्ञ और कैंसर से मुक्ति पा चुकी डॉ. आशी सहाय कहती हैं कि एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के नाते उनके पास आत्मपरीक्षण के बाद कैंसर का संदेह/लक्षण लेकर कई महिलाएं आती रही हैं। लेकिन, कभी यह नहीं सोचा था कि इन महिलाओं में, मैं भी हो सकती हूं। अपने कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम के दौरान डॉ. डावर ने सलाह दी कि मैं भी इस कार्यक्रम में शामिल हो जाऊं और जांच के नतीजे देखने के बाद मैं स्तब्ध रह गई।


मुझमें कैंसर पॉजिटिव पाया गया लेकिन सौभाग्यशाली रही कि आरंभिक चरण में ही इसकी पहचान कर ली गई। मैंने सही समय पर उपचार कराना शुरू कर दिया और अब मैं कैंसर से मुक्ति पा चुकी हूं और परिवार के साथ अपना खुशहाल जीवन बिता रही हूं।


दीप्ति यशांक अध्र्यु (स्तर कैंसर से मुक्ति पाने वाली) जैसे कैंसर रोग से छुटकारा पाने वाले अन्य लोगों ने भी अपने अनुभवों का साझा किया।


मेडिकल ऑन्कोलाजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. मीनू वालिया के मुताबिक अपने स्तन की जांच करने के दौरान स्तन या कॉंख वाले क्षेत्रों में सूजन और सख्त गांठ या अंदर से मोटी होती चमड़ी अवश्य नजर रखनी चाहिए। स्तन में सूजन, गर्मी, लाली या कालापन, स्तर के आकार में परिवर्तन, त्वचा में गड्ढ़े या सिकुडऩ, खुजलाहट, पपड़ीदार घाव या निपल पर फुंसी और किसी दाग में नए प्रकार के दर्द की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

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