Thursday, 21 June 2018
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पौड़ी में फिर फटा बादल, कई गांव तबाह

नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड के कई हिस्सों में आज तेज बारिश हो रही है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि आज मौसम ने साथ दिया तो तबाही के बाद फंसे हुए लोगों को निकालने का काम पूरा कर लिया जाएगा। अभी अलग-अलग इलाकों में करीब 4000 लोग फंसे हुए हैं। राहत की खबर रूद्रप्रयाग से मिल रही है, जहां आज मौसम पूरी तरह से साफ है, लेकिन राज्य के दूसरे हिस्सों से तेज बारिश की खबरें हैं। पौड़ी के थैलीसैंण इलाके में तेज बारिश और बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन में कई घर तबाह हो गए हैं। कुछ गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ गईं।  बारिश के बाद इलाके के खेत पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान पैथानी और मुलुंद इलाके में हुआ है, जहां पहुंचने वाली सभी सड़कें तबाह हो गई हैं। फिलहाल यहां जिन लोगों के घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, उन्होंने स्कूलों में शरण ले रखी है। उत्तराखंड में आए सैलाब के बाद यहां का ऊखीमठ इलाका भी पूरी तरह से तबाह हो गया है। यह वही गांव है जहां सर्दियों के मौसम में केदारनाथ के बंद होने पर भगवान शिव की प्रतिमा को रखा जाता है। हादसे के बाद से गांव में मातम का माहौल है। इस गांव के कई लोग केदारनाथ मंदिर से जुड़े हुए हैं और सैलाब के बाद से गांव के कई लोग लापता हैं।

मंगलवार को ज्यादातर मौसम साफ रहा, जिसकी वजह से राहत और बचाव के काम में जुटे हेलीकॉप्टर लगातार उड़ते रहे। यहां के जंगल चट्टी भैरव चट्टी और हर्षिल में भी हेलीकॉप्टरों के जरिये करीब 2000 लोगों को निकाला गया। केदारनाथ से लोगों को निकाला जा चुका है। यहां अब एक बड़ी चुनौती शवों के अंतिम संस्कार की है। शवों के खराब होने पर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर सामूहिक संस्कार के लिए सूखी लकड़ियां जुटाना आसान काम नहीं है, हालांकि हेलीकॉप्टरों के जरिये सूखी लकड़ियों को पहुंचाया जा रहा है।

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने एक पत्र जारी कर मीडिया से फंसे हुए लोगों की पहचान कराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि प्रेस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया फंसे हुए लोगों के फोटो या वीडियो तैयार कराने में मदद करे ताकि उन्हें बचाया जा सके। इसे वे अपने अखबारों और चैनलों में दिखा भी सकते हैं।

सरकार दावा कर रही है कि उसने प्रभावित इलाकों में कई सेवाएं बहाल कर दी हैं। पहाड़ों के 1129 गांवों में बिजली बहाल कर दी गई है, साथ ही साथ प्रभावित इलाकों में 313 डॉक्टरों के साथ साथ करीब 5000 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगी हुई है। बद्रीनाथ, पांडुकेश्वर, गोविंदघाट, जोशीमठ, गोपेश्वर, गौचर, रूद्रप्रयाग, श्रीनगर और उत्तरकाशी समते कई जगहों पर पीने के पानी की आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है। बाढ़ पीड़ितों को निकालकर देहरादून के हवाई अड्डे पर लाया जा रहा है। यहां सैकड़ों की संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके परिवारवालों या रिश्तेदारों की कोई खबर नहीं मिल पाई है। ये लोग अपनों को ढूंढने के लिए उनकी तस्वीरें लिए घूम रहे हैं।

हम दलों को भी जोड़ेंगे और दिलों को भी जोड़ेंगे

पठानकोट: चुनाव अभियान समि‌ति की कमान संभालने के बाद अपनी पहली रैली में नरेंद्र मोदी ने भाजपा की एनडीए प्लस की योजना को आगे बढ़ाने की बुनियाद रख दी है। साथ ही इस बात के भी संकेत दिए कि धारा-370 को लेकर जनसंघ के संस्थापक नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को वह हर हाल में पूरा करेंगे।

पंजाब और जम्मू एवं कश्मीर की सीमा पर स्थित माधोपुर में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 60वीं पुण्यतिथि पर आयोजित संकल्प रैली में नरेंद्र मोदी ने गठबंधन सरकारों और चैधरी देवीलाल, बंशी लाल और फारुक अब्दुल्ला जैसे नेताओं के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हम दलों को भी जोड़ेंगे और दिलों को भी जोड़ेंगे। मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी की विचारधारा पर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी यह संकल्प लेती है कि वह उनके अधूरे सपनों को हर हाल में पूरा करेगी। मोदी ने कहा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आजाद भारत के पहले शहीद हैं। और हम उनकी शहादत को ऐसे ही जाया नहीं होने देंगे।

 

मोदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हिंदुस्तान में सबसे पहले राजनीतिक दलों को जोड़ने का काम किया था। मोदी ने कहा, मुखर्जी ने 1952 में पहली संसद में ही विभिन्न दलों के 35 सांसदों का मोर्चा बनाया था। और इस मोर्चा के बूते वे कांग्रेस की कारगुजारियों का पर्दाफाश करना चाहते थे। मोदी ने कहा ‌कि हिंदुस्तान के निर्माण में किसी ने कितना भी योगदान दिया हो, कांग्रेस किसी के योगदान को मानने के लिए तैयार नहीं है। किसी की शहादत को वह शहादत मानने को तैयार नहीं है। इसी प्रकार से वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को भी भुला देना चाहती थी। उन्होंने सरकार से श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच कराए जाने की मांग की।

 

मोदी ने कहा, डॉ. मुखर्जी हमेशा मानव सेवा के लिए तत्पर रहते थे। बंगाल में जब भुखमरी चरम पर थी तब लोगों के जीवन को बचाने के लिए उन्होंने सेवा यज्ञ चलाया था। 1943 में बंगाल में भुखमरी के समय जिस तरह से उन्होंने लोगों की सेवा के लिए सेवा यज्ञ चलाया था ठीक वैसे ही हम उत्तराखंड में प्रभावित लोगों के लिए सेवा यज्ञ करेंगे। उत्तराखंड के दौरे से लौटे मोदी ने संकल्प रैली में कहा कि आपदा की इस घडी में पूरा देश उत्तराखंड के साथ है। उत्तराखंड को इस स्थिति से निबटने में देश मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

 

कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए मोदी ने कहा, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बड़ी कुशलता से देश को जोड़ा लेकिन पंडित नेहरू के शासनकाल में कश्मीर मुद्दे पर लिया गया निर्णय आज परेशानी का सबब बना हुआ है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कश्मीरियों को मरहम लगाया गया। एकता के सूत्र में बांधने की कोशिश की गई। जब अटल बिहारी वाजपेयी कश्‍मीर की समस्‍या को हल करने की कोशिश कर रहे थे तो कश्‍मीर के कुछ नेता उनके इन प्रयासों को नाकाम करने में जुटी थी। उन्होंने कहा कि यदि वाजपेयी सरकार 2004 में केंद्र में वापसी करती तो कश्‍मीरी पंडितों को न्‍याय मिलता।

 

मोदी ने कहा, कश्‍मीर के लोगों को भी देश के अन्‍य लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का हक है। मैं कहीं पढ़ रहा था कि कश्‍मीर घाटी से 300 लड़कियां कोचिंग के लिए कोटा में हैं। उनकी आंखों में आगे बढ़ने और कुछ कर दिखाने का सपना है।

 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हमला करते हुए मोदी ने कहा, ृमैं प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि सरबजीत सिंह को मार दिया गया, आपने क्या किया। हमारे जवानों के सिर काट लिए गए उसके लिए आपने क्‍या किया?ृ मोदी ने सरकार के भारत निर्माण विज्ञापन पर भी चुटकी ली। उन्होंने ‌कहा कि केंद्र सरकार ने भारत निर्माण विज्ञापन जारी किया था जिसमें कहा गया था कि ‌हक है मेरा, जबकि मैंने कहा कि शक है मेरा। मेरे ऐसा कहने के बाद केंद्र सरकार ने इस विज्ञापन को टेलीविजन से हटा लिया। तो क्या यूपीए सरकार को भी अपने विज्ञापन पर शक है।

फिर नक्सली हमला, अधिकारी शहीद

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शनिवार को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक अधिकारी शहीद हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बल के जवानों के दस्ते का नेतृत्व कर रहे असिस्टेंट कमांडेंट एसके दास राज्य के गरियाबंद जिले के जंगलों में गश्त पर निकले थे, जब उनकी हथियारबंद एक नक्सली दस्ते से मुठभेड़ हो गई। गोलीबारी में दास को पेट और कमर के हिस्से में गोलियां लगीं। दास इस इलाके के विशेष नक्सल विरोधी अभियान के लिए 211 बटालियन से जुडे सीआरपीएफ जवानों के दल का नेतृत्व कर रहे थे।  उल्लेखनीय है कि 25 मई को नक्सलियों द्वारा दरभा घाटी में कांग्रेस के एक काफिले पर किए गए बर्बर हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस नरसंहार में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और सलवा जुडूम आंदोलन के संस्थापक महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस के कई बडे नेताओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। नक्सली हमले में जान गंवाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के पीएसओ ने भी शनिवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। 25 मई को कांग्रेस के काफिले पर हुए इस हमले में अब तक जान गंवाने वालों की कुल संख्या 28 तक जा पहुंची है।

रामकृष्ण केयर अस्पताल के डॉक्टर संदीप दवे के मुताबिक, ‘हमले में गोलीबारी से पीएसओ सियाराम सिंह की आंतों में गंभीर जख्म हो गए थे। जिससे उनके शरीर के कई हिस्सों में संक्रमण पैदा हो गया था। इस वजह से उनके कई अंगों ने एकसाथ काम करना बंद कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।’

दवे ने कहा कि हमले में घायल दस और लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वे सभी खतरे से बाहर हैं। छत्तीसगढ़ सैन्य बल के जवान बिहार निवासी सियाराम माना कैंप की चैथी बटालियन में श्रद्धांजलि दी गई।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमले का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि शुक्रवार को नक्सलियों ने सलवा जुडूम के 20 नेताओं की हिटलिस्ट जारी कर दी। सुकमा जिले के डीएम को लिखे पत्र में नक्सलियों की दरभा डिवीजनल कमेटी ने 20 लोगों को जान से मारने की धमकी दी।
शुक्रवार को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने रायगढ़ जिले के नादेली गांव जाकर दिवंगत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल के परिजनों से मुलाकात की थी।

शिंदे ने कहा था कि आने वाले दिनों में बस्तर इलाके में नक्सलियों के खिलाफ केंद्रीय बल और प्रदेश पुलिस मिलकर कार्रवाई करेंगे।

हमले के बारे में खुफिया नाकामी पर गृहमंत्री ने कहा कि जांच से सच्चाई का खुलासा हो जाएगा। हमले के पीछे राजनीतिक साजिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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