Thursday, 21 June 2018
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कांग्रेस के साथ रहते RJD और LJP से समझौता नहीं: CPI(ML)

पटना, सीपीआई(एमएल) ने बिहार की 40 सीटों में से 20 पर लड़ने और बाकी सीटें दूसरी लेफ्ट पार्टियों के लिए छोड़ने का फैसला लेते हुए मंगलवार साफ कर दिया कि उसका आरजेडी या एलजेपी के साथ समझौता नहीं हो सकता। पटना में संपन्न सीपीआई(एमएल) की दो दिवसीय राज्य स्थायी समिति की बैठक में लिए गए इस फैसले से अवगत कराते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा किया कि आरजेडी और एलजेपी का कांग्रेस के साथ गठबंधन होने पर इनके साथ कोई समझौता नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि हमने आरजेडी और एलजेपी के साथ कोई गठबंधन की बात नहीं कही थी। कुछ लोग जो कि ऐसे गठबंधन की बात कर रहे हैं उनकी भावना को वे समझते हैं। इसमें सबसे बड़ी राजनीतिक दिक्कत इन दोनों दलों की राजनीति कांगेस के साथ जुड़ी हुई है और हमारा यह मानना है कि आज देश में जो हालात और संकट हैं उसके लिए केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस जिम्मेदार है। दीपांकर ने कहा कि आरजेडी का यह मानना कि बीजेपी के नरेंद्र मोदी या अन्य सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला कांग्रेस के साथ मिलकर ही किया जा सकता है। उस दल के कुशासन, घोटाला, सांप्रदायिकता की नीति ही बीजेपी के ताकत के सोर्स हैं।

उन्होंने कहा कि आरजेडी के साथ उनकी किसी प्रकार के गठबंधन को लेकर उनकी बातचीत न तो राष्ट्रीय स्तर पर और न ही बिहार स्तर पर अब तक हुई है। दीपांकर ने कहा कि कांग्रेस के साथ आरजेडी के गठबंधन नहीं होने पर आरजेडी द्वारा पहल किए जाने पर क्या सीपीआई(एमएल) उसके साथ गठबंधन करेगी? दीपांकर ने कहा कि कांग्रेस परस्ती को छोड़कर अगर वह दल एक नये रास्ते पर चलता है और उनकी सोच में बदलाव आता है तो निश्चित तौर पर बात हो सकती है। भट्टाचार्य ने कहा कि नीतीश सरकार से प्रदेश की जनता नाराज है। इसलिए उसके साथ उनके दल का कोई समझौता नहीं हो सकता, क्योंकि बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद भी उसके साथ सत्ता में रहते हुए भंग किए गए अमीरदास आयोग को फिर से बहाल, भूमि सुधार आयोग और समान शिक्षा आयोग की रिपोर्ट को क्यों नहीं लागू किया।
 
उन्होंने कहा कि सीपीआई और सीपीआई(एम) से उनकी बातचीत चल रही है उनकी पार्टी ने बिहार की 20 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले से सीपीआई और सीपीआई(एम) को अवगत करा दिया है। दीपांकर ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार की जिन 20 सीटों पर वर्ष 2014 के दौरान लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया है उनमें आरा, काराकाट, जहानाबाद, पाटलिपुत्र, सीवान, कटिहार, नालंदा, बक्सर, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, वाल्मिकिनगर, झंझारपुर, गया, सासाराम, उजियारपुर, जमुई, पूणिर्या, अररिया और गोपालगंज शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सीपीआई(एमएल) अन्य दोनों वामदलों सीपीआई और सीपीआई(एम) के साथ अगला लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है। लेकिन एमएल द्वारा जिन सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है उनमें उन दलों द्वारा लड़े जानी वाली सीटों के नाम शामिल नहीं है। दीपांकर ने कहा कि सीपीआई(एमएल) की इस सूची में शामिल सीटों में से किसी पर भी अगर ये दोनों वाम दल चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उसको लेकर उनसे बात की जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान पटना साहिब संसदीय सीट पर साझा उम्मीदवारी का प्रस्ताव लाया है और वे चाहेंगे कि इसको लेकर वाम दलों के बीच आम सहमति बने। भट्टाचार्य ने कहा कि लोकसभा चुनाव की तैयारी के क्रम में 10 जनवरी से 25 जनवरी तक पूरे राज्य में जिला एवं विधानसभा स्तर तक जनसंवाद यात्रा और फरवरी महीने में 15 जिलों में जनदावेदारी रैली का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांगेस के सर्मथन से सरकार बनाने का जो फैसला लिया है उसका वह स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जनता से वादा किया है उस पर वह अमल करेगी।
 
 
 

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