Thursday, 21 June 2018
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दागी सांसदों-विधायकों संबंधी अध्यादेश वापस

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (): देश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला चर्चित और विवादित दागी विधायकों और सांसदों को बचाने वाले अध्यादेश को सरकार ने वापस ले लिया है। बुधवार शाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया। सरकार ने अध्यादेश और बिल दोनों वापस ले लिया है। दोपहर में ही यह साफ हो गया था कि सरकार इस विवादित अध्यादेश को वापस लेगी बस इसपर कैबिनेट की बैठक में मुहर लगने का इंतजार हो रहा था।
बैठक के कुछ ही देर बार ही सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने दागी सांसदो,विधायकों संबंधी अध्यादेश और बिल को वापस लिए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश और बिल दोनों वापस ले लिया गया है। इससे पहले के घटनाक्रम में दागी नेताओं को बचाने वाले अध्यादेश के मुद्दे पर आज कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई थी। बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अहमद पटेल और गृहमंत्री सुशील शिंदे मौजूद थे।
सूत्रों के मुताबिक बुधवार सुबह प्रधानमंत्री आवास पर भी पर कांग्रेस कोर गु्रप की बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अहमद पटेल और गृह मंत्री सुशील शिंदे मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में अध्यादेश को वापस लेने पर सहमति बनी। सोनिया ने भी राहुल के रुख का समर्थन किया।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज यहां राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और समझा जाता है कि उन्होंने दागी सांसदों, विधायकों से संबंधित विवादास्पद अध्यादेश के मुद्दे पर उन्हें जानकारी दी।  दरअसल, तीखे बयान में राहुल गाधी ने इसे बकवास बताया था, जिसके बाद सरकार के पास इस अध्यादेश को वापस लेने के अलावा कोई चारा नहीं है।
गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस अध्यादेश पर कड़ा विरोध जताया था। उन्होंने अध्यादेश को फाड़कर फेंके जाने की बात कही थी। तभी से सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार यह अध्यादेश वापस लेगी।
इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में राहुल ने अध्यादेश विवाद पर पीएम से अफसोस जताया है। उनका मकसद अपमान करना नहीं था। साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह अध्यादेश के खिलाफ हैं। लोगों में इस अध्यादेश के खिलाफ गुस्सा है। उनकी मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री इस बातचीत से संतुष्ट हैं और उन्होंने राहुल की बात मान ली है।
उधर, जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी अन्ना हजारे ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

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