Thursday, 16 August 2018
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सजायाफ्ता को 'सजा' के निर्णय से चौतरफा खुशी

मुरादाबाद। सुप्रीम कोर्ट के दो साल से अधिक की सजा वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता खत्म करने और जेल से चुनाव लड़ने पर रोक के निर्णय का हर ओर स्वागत किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी इसका स्वागत किया है, जबकि समाजशास्त्रियों व शिक्षाविदों ने इसे सियासत व अपराध के गठजोड़ को तोड़ने की मजबूत पहल बताया है।

शहर विधायक हाजी यूसुफ अंसारी का कहना है कि सियासत में वैसे ही किसी अपराधी को जगह नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से इसपर पूरी तरह रोक लग गई है। अब सियासत का मतलब सिर्फ समाजसेवा रहेगा।

कुंदरकी के विधायक हाजी रिजवान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसला का स्वागत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति में साफ चरित्र वाले लोग आएंगे। सत्ता से बाहुबली का दखल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलना भी बंद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे भी मामले सामने आए है कि झूठे मुकदमा फंसा कर उसे सजा करा दी जाती है, ऐसे मामले को रोकने के लिए भी प्रयास किया जाना चाहिए।

हिंदू कालेज के राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता डा.बृजभूषण सिंह का कहना है कि सियासी दलों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सकारात्मक तरीके से स्वीकार करना चाहिए। जो काम विधायिका को करना चाहिए था, वह न्यायपालिका को करना पड़ा। इससे राजनीति में अपराध व अपराधियों के दखल पर रोक लगेगी। सत्ता की हनक में गलत काम करने वाले राजनीतिज्ञों पर इस फैसले से दबाव बनेगा, जो भारतीय राजनीति के लिए शुभ संकेत की तरह है।

केजीके कालेज के समाजशास्त्र के प्रवक्ता डा.जीसी पांडेय का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। राजनीति और अपराध का गठजोड़ तोड़ने के लिए इसी तरह के कड़े फैसले की जरूरत थी। इससे राजनीतिक अपराधीकरण रुकेगा। संसद व विधानसभाओं में साफ छवि के जनप्रतिनिधि रहेंगे तो विकास का माहौल बनेगा। सामाजिक दृष्टि से यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा।

सपा के महानगर अध्यक्ष शोएब पाशा का कहना है कि सपा वैसे ही राजनीति में अपराधियों के आने के विरोध में रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अपराधियों का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।

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