Wednesday, 17 October 2018
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पौड़ी में फिर फटा बादल, कई गांव तबाह

नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड के कई हिस्सों में आज तेज बारिश हो रही है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि आज मौसम ने साथ दिया तो तबाही के बाद फंसे हुए लोगों को निकालने का काम पूरा कर लिया जाएगा। अभी अलग-अलग इलाकों में करीब 4000 लोग फंसे हुए हैं। राहत की खबर रूद्रप्रयाग से मिल रही है, जहां आज मौसम पूरी तरह से साफ है, लेकिन राज्य के दूसरे हिस्सों से तेज बारिश की खबरें हैं। पौड़ी के थैलीसैंण इलाके में तेज बारिश और बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन में कई घर तबाह हो गए हैं। कुछ गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ गईं।  बारिश के बाद इलाके के खेत पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान पैथानी और मुलुंद इलाके में हुआ है, जहां पहुंचने वाली सभी सड़कें तबाह हो गई हैं। फिलहाल यहां जिन लोगों के घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, उन्होंने स्कूलों में शरण ले रखी है। उत्तराखंड में आए सैलाब के बाद यहां का ऊखीमठ इलाका भी पूरी तरह से तबाह हो गया है। यह वही गांव है जहां सर्दियों के मौसम में केदारनाथ के बंद होने पर भगवान शिव की प्रतिमा को रखा जाता है। हादसे के बाद से गांव में मातम का माहौल है। इस गांव के कई लोग केदारनाथ मंदिर से जुड़े हुए हैं और सैलाब के बाद से गांव के कई लोग लापता हैं।

मंगलवार को ज्यादातर मौसम साफ रहा, जिसकी वजह से राहत और बचाव के काम में जुटे हेलीकॉप्टर लगातार उड़ते रहे। यहां के जंगल चट्टी भैरव चट्टी और हर्षिल में भी हेलीकॉप्टरों के जरिये करीब 2000 लोगों को निकाला गया। केदारनाथ से लोगों को निकाला जा चुका है। यहां अब एक बड़ी चुनौती शवों के अंतिम संस्कार की है। शवों के खराब होने पर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर सामूहिक संस्कार के लिए सूखी लकड़ियां जुटाना आसान काम नहीं है, हालांकि हेलीकॉप्टरों के जरिये सूखी लकड़ियों को पहुंचाया जा रहा है।

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने एक पत्र जारी कर मीडिया से फंसे हुए लोगों की पहचान कराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि प्रेस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया फंसे हुए लोगों के फोटो या वीडियो तैयार कराने में मदद करे ताकि उन्हें बचाया जा सके। इसे वे अपने अखबारों और चैनलों में दिखा भी सकते हैं।

सरकार दावा कर रही है कि उसने प्रभावित इलाकों में कई सेवाएं बहाल कर दी हैं। पहाड़ों के 1129 गांवों में बिजली बहाल कर दी गई है, साथ ही साथ प्रभावित इलाकों में 313 डॉक्टरों के साथ साथ करीब 5000 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगी हुई है। बद्रीनाथ, पांडुकेश्वर, गोविंदघाट, जोशीमठ, गोपेश्वर, गौचर, रूद्रप्रयाग, श्रीनगर और उत्तरकाशी समते कई जगहों पर पीने के पानी की आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है। बाढ़ पीड़ितों को निकालकर देहरादून के हवाई अड्डे पर लाया जा रहा है। यहां सैकड़ों की संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके परिवारवालों या रिश्तेदारों की कोई खबर नहीं मिल पाई है। ये लोग अपनों को ढूंढने के लिए उनकी तस्वीरें लिए घूम रहे हैं।

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