Sunday, 22 April 2018
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लाजपत नगर में प्लाट दिलाने के नाम पर ठगे एसआई ने बीस लाख रूपए

नई दिल्ली, 26 जून(ब्यूरो)लाजपत नगर में तीन करोड़ रूपए में प्लाट दिलाने के नाम दिल्ली पुलिस के एक एसआई ने बीस लाख रूपए ठग लिए। आरोपी एसआई गौतम तिवारी को अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में राहत देने से इंकार कर दिया है। तिवारी को अग्रिम जमानत देने से मना करते हुए न्यायमूर्ति विभू बकारू ने कहा कि एसआई पर लगे आरोप गंभीर है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। अदालत के रवैये को देखते हुए आरोपी ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापिस ले ली।

तिवारी ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका में कहा था कि उस पर लगे आरोप स्पष्ट नहीं है। न ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत है। जबकि सरकारी वकील नवीन शर्मा का कहना था कि मामला गंभीर है। एक पुलिसकर्मी का काम अपराध पर लगाम कसना है,मगर इस मामले में पुलिसकर्मी पर खुद अपराध में शामिल होने का आरोप है।

 कालकाजी थाना की पुलिस ने बीके पेरिवाल नामक व्यक्ति की शिकायत पर औंकार सिंह उर्फ मास्टर जी, दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर गौतम तिवारी, डीडीए के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रेम शंकर शर्मा, शाहदरा के फायर स्टेशन आफिसर राजवीर सिंह, विजय कुमार, सुरेंद्र कुमार, ओमप्रकाश और केके पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि वह राजवीर को जानता था। राजवीर ने उसे प्रेम शंकर से यह कहकर मिलवाया कि वह डीडीए में डिप्टी डायरेक्टर है। उक्त सभी आरोपियों ने उसे लाजपत नगर में 3 करोड़ रूपए में एक अच्छा प्लाट दिलाने का लालच दिया।

जिसके तौर पर उन्होंने उसे फर्जी आक्शन लेटर भी दिया और उससे नवम्बर 2011 में 10 लाख  रूपए ले लिए। 2 दिसम्बर 2011 में सब इंस्पेक्टर गौतम तिवारी केके पांडेय के साथ उसके पास आया और 10 लाख रूपए मांगे। उसने बैंक से 10 लाख रूपए निकलवा कर तिवारी को दे दिए। बाद में उसे पता चला कि प्रेम शंकर डिप्टी डायरेक्टर नहीं, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है और उस पर ठगी के 8 अन्य मामले भी दर्ज हैं।

पुलिस ने उक्त मामले में प्रेमशंकर राजवीर और विजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अन्य आरोपी अभी फरार चल रहे हैं।

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