Monday, 20 August 2018
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जैश-ए-मोहमद के तीन आतंकियों को दी हाईकोर्ट ने उम्रकैद

-दो अन्य आरोपियों को दी 11-11 साल की सजा
नई दिल्ली, 3 मई (ब्यूरो)पोटा के तहत उम्रकैद की सजा पाए जैश-ए-मोह मद के तीन आतंकियों को दिल्ली उच्च न्यायालय ने राहत देने से इंकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। निचली अदालत ने इन तीनों को पोटा,देश के खिलाफ युद्ध छेडऩे सहित अन्य धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा दी थी।
हालांकि न्यायालय ने दो अन्य आतंकी अतीक-उर-जामा व उसके भाई रईस-उर-जामा को राहत देते हुए उनको दी गई उम्रकैद की सजा को 11-11 साल की सजा में तब्दील कर दिया है।
दिल्ली पुलिस ने इन पांचों आतंकियों को एक मुठभेड़ के बाद 30-31 अगस्त 2003 की रात पकड़ा था। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा मे आ र्स व असला पकड़ा था। इतना ही नहीं पुलिस को सदर बाजार से एक विस्फोटक भरा ट्रक भी मिला था। इतना ही नहीं पुलिस ने मु य आरोपी नूर मोह मद तांत्रे से 19.20 लाख रूपए भी बरामद किए थे।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने कहा कि दोनों आरोपी भाईयों को इसलिए राहत दी जा रही है क्योंकि वह अपनी गिर तारी से पहले कभी किसी आतंकी गतिविधि में सलिप्त नहीं रहे हैं। न ही वह ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान गए थे। न ही उनके पास से गिर तारी के समय कोई आ र्स व असला मिला।
हालांकि अदालत ने नूर मोह मद तांत्रे,परवेज अहमद मीर व फरोज अहमद भट्ट की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया और उनको दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि इन तीनों के वकील एम एस खान ने कहा है कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
निचली अदालत ने तीन जनवरी 2011 को पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी थी।
आरोपी रईस व उसका भाई अतीक उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद के रहने वाले हैं। यह दोनों हबीबुल्लाह के भाई है। हबीबुल्लाह को दिल्ली पुलिस ने तीस अगस्त 2003 को निजामुद्दीन पुल के पास मिलेनियम पार्क के पास एक पाकिस्तानी जहूर के साथ इनकांउटर में मार दिया था।

 

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