Wednesday, 13 December 2017
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2जी: कोर्ट में पेशी के लिए अनिल अंबानी को सम्मन

नई दिल्ली : रिलायंस एडीएजी चेयरमैन अनिल अंबानी को 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाला मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत के समक्ष सरकारी गवाह के तौर पर 26 जुलाई को पेश होने को सोमवार को सम्मन जारी किया गया।

सीबीआई ने अनिल अंबानी सहित 5 गवाहों की एक सूची अदालत को सौंपी। अदालत के सूत्रों के मुताबिक, विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी ने इन गवाहों को जारी किए जाने वाले सम्मन पर दस्तखत कर दिए हैं।

अनिल अंबानी के अलावा सीबीआई ने अनंत राज इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष (वित्त) योगेश शर्मा को अदालत के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए 24 जुलाई को बुलाया है। आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारी देवेंद्र चंदावरकर और केंद्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के विशेषज्ञ दीपक आर हांडा को गवाई के लिए 25 जुलाई को पेश होने को कहा गया है। चंदावरकर पहले भी पेश हो चुके हैं।

अदालत को सौंपी गई गवाहों की सूची में अनिल अंबानी का बयान 26 जुलाई को दर्ज किए जाने की संभावना है, जबकि सीएफएसएल के एक अन्य विशेषज्ञ विजय वर्मा को भी उसी दिन बुलाया गया है।

उल्लेखनीय है कि अदालत ने 19 जुलाई को अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना अंबानी एवं 11 अन्य को इस मामले में गवाह बनाने का सीबीआई का अनुरोध स्वीकार लिया था।

इससे पहले, रिलायंस टेलीकाम लिमिटेड ने अंबानी को सरकारी गवाह के तौर पर बुलाने के निचली अदालत के आदेश को आज ही उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। 

लाजपत नगर में प्लाट दिलाने के नाम पर ठगे एसआई ने बीस लाख रूपए

नई दिल्ली, 26 जून(ब्यूरो)लाजपत नगर में तीन करोड़ रूपए में प्लाट दिलाने के नाम दिल्ली पुलिस के एक एसआई ने बीस लाख रूपए ठग लिए। आरोपी एसआई गौतम तिवारी को अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में राहत देने से इंकार कर दिया है। तिवारी को अग्रिम जमानत देने से मना करते हुए न्यायमूर्ति विभू बकारू ने कहा कि एसआई पर लगे आरोप गंभीर है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। अदालत के रवैये को देखते हुए आरोपी ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापिस ले ली।

तिवारी ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका में कहा था कि उस पर लगे आरोप स्पष्ट नहीं है। न ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत है। जबकि सरकारी वकील नवीन शर्मा का कहना था कि मामला गंभीर है। एक पुलिसकर्मी का काम अपराध पर लगाम कसना है,मगर इस मामले में पुलिसकर्मी पर खुद अपराध में शामिल होने का आरोप है।

 कालकाजी थाना की पुलिस ने बीके पेरिवाल नामक व्यक्ति की शिकायत पर औंकार सिंह उर्फ मास्टर जी, दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर गौतम तिवारी, डीडीए के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रेम शंकर शर्मा, शाहदरा के फायर स्टेशन आफिसर राजवीर सिंह, विजय कुमार, सुरेंद्र कुमार, ओमप्रकाश और केके पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि वह राजवीर को जानता था। राजवीर ने उसे प्रेम शंकर से यह कहकर मिलवाया कि वह डीडीए में डिप्टी डायरेक्टर है। उक्त सभी आरोपियों ने उसे लाजपत नगर में 3 करोड़ रूपए में एक अच्छा प्लाट दिलाने का लालच दिया।

जिसके तौर पर उन्होंने उसे फर्जी आक्शन लेटर भी दिया और उससे नवम्बर 2011 में 10 लाख  रूपए ले लिए। 2 दिसम्बर 2011 में सब इंस्पेक्टर गौतम तिवारी केके पांडेय के साथ उसके पास आया और 10 लाख रूपए मांगे। उसने बैंक से 10 लाख रूपए निकलवा कर तिवारी को दे दिए। बाद में उसे पता चला कि प्रेम शंकर डिप्टी डायरेक्टर नहीं, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है और उस पर ठगी के 8 अन्य मामले भी दर्ज हैं।

पुलिस ने उक्त मामले में प्रेमशंकर राजवीर और विजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अन्य आरोपी अभी फरार चल रहे हैं।

जैश-ए-मोहमद के तीन आतंकियों को दी हाईकोर्ट ने उम्रकैद

-दो अन्य आरोपियों को दी 11-11 साल की सजा
नई दिल्ली, 3 मई (ब्यूरो)पोटा के तहत उम्रकैद की सजा पाए जैश-ए-मोह मद के तीन आतंकियों को दिल्ली उच्च न्यायालय ने राहत देने से इंकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। निचली अदालत ने इन तीनों को पोटा,देश के खिलाफ युद्ध छेडऩे सहित अन्य धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा दी थी।
हालांकि न्यायालय ने दो अन्य आतंकी अतीक-उर-जामा व उसके भाई रईस-उर-जामा को राहत देते हुए उनको दी गई उम्रकैद की सजा को 11-11 साल की सजा में तब्दील कर दिया है।
दिल्ली पुलिस ने इन पांचों आतंकियों को एक मुठभेड़ के बाद 30-31 अगस्त 2003 की रात पकड़ा था। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा मे आ र्स व असला पकड़ा था। इतना ही नहीं पुलिस को सदर बाजार से एक विस्फोटक भरा ट्रक भी मिला था। इतना ही नहीं पुलिस ने मु य आरोपी नूर मोह मद तांत्रे से 19.20 लाख रूपए भी बरामद किए थे।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने कहा कि दोनों आरोपी भाईयों को इसलिए राहत दी जा रही है क्योंकि वह अपनी गिर तारी से पहले कभी किसी आतंकी गतिविधि में सलिप्त नहीं रहे हैं। न ही वह ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान गए थे। न ही उनके पास से गिर तारी के समय कोई आ र्स व असला मिला।
हालांकि अदालत ने नूर मोह मद तांत्रे,परवेज अहमद मीर व फरोज अहमद भट्ट की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया और उनको दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि इन तीनों के वकील एम एस खान ने कहा है कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
निचली अदालत ने तीन जनवरी 2011 को पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी थी।
आरोपी रईस व उसका भाई अतीक उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद के रहने वाले हैं। यह दोनों हबीबुल्लाह के भाई है। हबीबुल्लाह को दिल्ली पुलिस ने तीस अगस्त 2003 को निजामुद्दीन पुल के पास मिलेनियम पार्क के पास एक पाकिस्तानी जहूर के साथ इनकांउटर में मार दिया था।

 

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