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आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत दुनिया में बने सर्वश्रेष्ठ

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आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत दुनिया में बने सर्वश्रेष्ठ

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–अभी कई काम करने हैं, लक्ष्य के साथ आगे बढऩा चाहिए : गृहमंत्री
–आपदा प्रबंधन की सभी इकाईयों का साझा Annual Conference

–एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, होम गाड्र्स और फायर सर्विसेज के योगदान की सराहना

(नीता बुधौलिया)

नई दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आपदा प्रबंधन की सभी इकाइयों एसडीआरएफ NDRF, सिविल डिफेंस, होम गाड्र्स और फायर सर्विसेज के योगदान की तहेदिल से सराहना की। साथ ही कहा कि भारत ने काफी कम समय में ही आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी विशेषज्ञता हासिल की है, लेकिन अभी और कई काम किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी भारत दुनिया में सर्वप्रथम हो, सर्वश्रेष्ठ हो, इस लक्ष्य के साथ हमें आगे बढऩा चाहिए।
गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित आपदा प्रबंधन की सभी इकाईयों के साझा Annual Conference को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर शाह ने कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत दुनिया का सातवां और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारा देश पहाड़, नदियाँ, समंदर, जंगल सहित इतनी विविधताओं से भी भरा हुआ है कि यहाँ आपदा आने के सभी लक्षण विद्यमान हैं। साथ ही, जिस प्रकार से दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता जा रहा है, आपदा आने की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ती जा रही है। लिहाजा, आपदा के समय हमारी तैयारी भी उसी हिसाब से होनी चाहिए।

Home Minister, Amit Shah addressing the Annual Conference on Capacity Building of SDRFs,


केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन पर एक समग्र दृष्टिकोण के विचार को हमारे देश में लगातार अनदेखा किया जाता रहा, इस विषय पर गंभीरता से कभी विश्लेषण भी नहीं हुआ। वर्ष 2001 में जब भुज, गुजरात में विनाशक भूकंप आया, तब उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात आपदा प्राधिकरण की नींव रखी, उस वक्त मैं गुजरात का गृह मंत्री था।

राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति का गठन किया

मुझे याद है कि दुनिया भर से इस क्षेत्र में महारत रखने वाले विशेषज्ञों को बुलाया गया था। तब हमारी भोगौलिक स्थिति के साथ-साथ आपदा के हर खतरे का व्यापक विश्लेषण किया गया था और यह केवल गुजरात तक सीमित नहीं था, बल्कि देश भर के आपदा से जुड़े खतरे इस विश्लेषण में समाहित किये गए थे। और वहीं से देश में आपदा प्रबंधन की दिशा में समग्रता पूर्वक विचार की शुरुआत हुई। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति का गठन किया और शरद पवार को उसका अध्यक्ष बनाया गया। बाद में 2005 में एनडीएमए का गठन हुआ। पहले हमारी आपदा प्रबंधन का दृष्टिकोण केवल राहत बचाव तक ही सीमित था लेकिन 2001 में इसे बदल कर रोकथाम, प्रसमन, तैयारी, कार्यवाही, राहत पुनर्निर्माण और पुनर्वसन – आपदा प्रबंधन के एक समग्र दृष्टिकोण की शुरुआत हुई।

रास्ता लंबा है, आपदा प्रबंधन की दिशा में सर्वश्रेष्ठ बनना है

2001 से लेकर 2019 तक हम तेज गति से इस दिशा में आगे बढ़े हैं और परिणाम भी अच्छे आये हैं लेकिन हमें इसी पर संतोष कर रुकना नहीं है रास्ता लंबा है और हमें आपदा प्रबंधन की दिशा में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनना है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई सारे देश आपदा प्रबंधन पर भारत के मॉडल को अपनाने और समझने पर मजबूर होंगे, तब हमें समझना चाहिए कि हमने कुछ सफलता अर्जित की है और ऐसा लक्ष्य लेकर हमें आगे बढऩा चाहिए। इस मौके पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, एनडीआरएफ के डीजी एस. एन. प्रधान सहित कई अधिकारी और देश भर से आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

एनडीआरएफ ने देश-विदेश में अच्छा काम किया


गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि गठन से लेकर आज तक एनडीआरएफ ने न केवल भारत बल्कि विश्व के कई देशों में भी अच्छा काम किया है। आज 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एनडीआरएफ मौजूद है। 12 बटालियन और 28 आरआरसी देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस दिशा में काम कर रही है और 2020 तक चार और वाहनियां इसके साथ जुड़ेंकर इसकी ताकत को बढ़ाएंगी। एनडीआरएफ ने अब तक लगभग तीन हजार बचाव अभियानों के दौरान अपने जान की बाजी लगाते हुए लगभग एक लाख से ज्यादा जीवन को बचाने का काम किया है। एनडीआरएफ की तर्ज पर देश के 24 राज्यों में एसडीआरएफ का गठन हुआ है। नागपुर में अब इसके लिए एक बहुत बड़ा सेंटर भी बनने जा रहा है।

आपदा प्रबंधन का बजट बढ़ाया


अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार आपदा प्रबंधन की चुनौतियों और इसकी जरूरत को समझती है, इसलिए 13वें वित्त आयोग में (2010-2014) जहां आपदा प्रबंधन के लिए 14098 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे, वहीं 14 वित्त आयोग (2015-2020) के लिए केंद्र सरकार ने इसके लिए 32142 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। आपदा प्रबंधन के बजट में ये वृद्धि मार्ग में आने वाली चुनौतियों से निबटने के लिए आवंटित किया गया ताकि आपदा प्रबंधन में लगी सभी इकाइयां सभी आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित हो सकें और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रया के लिए उपलब्ध रह सकें।

हर जिला मुख्यालय में आपदा प्रबंधन की टीम होनी चाहिए


अमित शाह ने कहा कि देश भर में आपदा प्रबंधन के जितने संसाधन बिखरे हुए हैं, इसका भी एक रजिस्टर एनडीआरएफ के पास होना चाहिए। हर जिला मुख्यालय में आपदा प्रबंधन की एक टीम होनी चाहिए और उनके पास ऐसी लिस्ट होनी चाहिए जिसमें उस क्षेत्र के बड़े उद्योगों की जानकारी हो, साथ ही आपदा से निबटने के लिए उनके पास मौजूद उपकरणों की भी जानकारियाँ हो।

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